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चीन-उत्तर कोरिया: दोस्ती बनी रहेगी?

Wed, 06 Feb 2013 04:17 PM IST
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china media, chian, pyongyang, north korea, nuclear test, un, kim jong un Updated Wed, 06 Feb 2013 04:17 PM IST
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उत्तर कोरिया चीन को अपने एक निकटम सहयोगी की तरह देखता है लेकिन शायद ये स्थिति लंबे समय तक न बनी रह पाए।

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उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव को दरकिनार करते हुए परमाणु परीक्षण करने को लेकर अड़े हुए हैं। बीजिंग में मीडिया और विशेषज्ञ प्योंगयोंग का सालों से समर्थन करते रहे है लेकिन इस मुद्दे पर वो उससे नाराज नजर आ रहे हैं।

दी ग्लोबल टाइम्स अखबार में लिखा है कि अगर उत्तर कोरिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के विरुद्ध तीसरा परमाणु परीक्षण करता है तो चीन को उसे आर्थिक सहायता देना कम कर देनी चाहिए।
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सहायता में कमी

अखबार के मुताबिक अगर उत्तर कोरिया बार-बार दी जा रही चेतावनियों के बावजूद तीसरी बार परमाणु परीक्षण करता है तो उससे इसकी भारी कीमत वसूली जानी चाहिए। चीन से जो उसे मदद मिल सकती है उसमें कमी होनी चाहिए।
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अखबार के संपादकीय में लिखा गया है कि इससे पहले कि प्योंगयोंग का भ्रम टूटे चीन को ये बात उत्तर कोरिया के सामने रख देनी चाहिए। साथ ही इसमें लिखा है कि चीन प्योंगयोंग से कभी नहीं डरा। अगर प्योंगयोंग चीन के प्रति कड़ा रवैया अपनाता है तो चीन को उसका मजबूती से जवाब देना चाहिए, अगर इसका द्विपक्षीय संबंधों पर भी असर पड़े तब भी।

प्रभाव

उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण करने की जिद ने चीन को भी मुश्किल में डाल दिया है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समूदाय को चीन से ये उम्मीद है कि वो अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके कोरयाई प्रायद्वीप में तनाव को कम करने में सफल रहेगा।


कम्यूनिस्ट पार्टी के सेट्रल पार्टी स्कूल में उत्तर कोरिया पर विशेषज्ञ चांग लियांगुई ने ग्लोबल टाइम्स को बताया है कि अगर चीन प्योंगयोंग को परमाणु परीक्षण करने से रोकने में विफल हो जाता है तो वो हमेशा के लिए प्रभावी भूमिका निभाने का मौका खो देगा। प्रोफेसर चांग का कहना है कि ये चीन की कुटनीति के लिए मुश्किल घड़ी है।

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