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नाथूला दर्रे से होगी मानसरोवर यात्रा, चीन तैयार

Mon, 02 Feb 2015 10:22 AM IST
Updated Mon, 02 Feb 2015 10:22 AM IST
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china india relation and kailash mansarovar tourism.

भारत और चीन ने सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर गतिरोध कम करने संबंधी समझौतों पर काम करना शुरू कर दिया है। इन समझौतों को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी चीन यात्रा के दौरान अंतिम रूप दिया जाएगा।

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चीन में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि नरेंद्र मोदी चीन का दौरा 26 मई से पहले तब करेंगे जब उनकी सरकार एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी। समझौतों की शुरुआत के तौर पर फिलहाल दोनों देश तिब्बत स्थित मानसरोवर जाने के एक अतिरिक्त रास्ते के लिए तैयार हो गए हैं।
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रविवार को चीनी नेताओं के साथ बैठक के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पत्रकारों को बताया, “दोनों देशों में इस समय मजबूत नेता हैं और दोनों ही देश सीमा समस्या का स्थाई हल निकालने के इच्छुक हैं।”
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उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने मुद्दों की पहचान के लिए एक कॉन्टैक्ट ग्रुप बना दिया है और नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के दौरान इस पर कार्रवाई शुरू होगी।

इसका मक़सद ये है कि दोनों देशों के बीच पहले मतभेद के क्षेत्रों की पहचान की जाए और फिर उन्हें कैसे कम किया जाए, इस पर काम होगा।

मानसरोवर के लिए रास्ता देने को चीन तैयार

china india relation and kailash mansarovar tourism.

चीन के विदेश मंत्री वॉन्ग यी का कहना था कि उनका देश सहमति के आधार पर भारत से रिश्तों को मजबूत बनाने का इच्छुक है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों के बीच अमरीका के साथ भारत की दोस्ती आड़े नहीं आएगी।

एक सवाल के जवाब में वॉन्ग ने कहा, “अमरीका के साथ भारत के अपने ढंग के रिश्ते हैं, हमारे अपने ढंग के। हम चाहते हैं कि भारत दुनिया में हर जगह अपने दोस्त बनाए।”

सिक्किम में नाथूला दर्रे से होकर मानसरोवर तक जाने वाला रास्ता इस साल जून से शुरू हो जाएगा। ये भारत का प्रस्ताव था जिसे चीन ने स्वीकार कर लिया है।

चीन में भारत के राजदूत अशोक कंठ ने बताया कि यात्रा के पहले दौर में पचास तीर्थयात्रियों के पांच समूह होंगे। नाथूला से शुरू होकर मानसरोवर तक पहुंचने और फिर वापसी में कुल 12 दिन लगेंगे। मौजूदा समय में हर साल कुल 900 यात्री मानसरोवर की यात्रा करते हैं और ये संख्या इसके अतिरिक्त होगी।

इसके अलावा भारत आसियान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहता है। ये वो क्षेत्र है जहां चीन काफी प्रभावशाली स्थिति में है। दूसरी ओर चीन चाहता है कि भारत उसकी सिल्क मार्ग और समुद्री सिल्क मार्ग योजनाओं पर भी सहमत हो जाए।

लेकिन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्पष्ट किया, “हम किसी अदला-बदली जैसी शर्तों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं।”

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