'प्रिंस चार्ल्स ने हिटलर से की पुतिन की तुलना'
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पोलैंड युद्ध की एक शरणार्थी का कहना है कि ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रूस में किए जा रहे कामों की तुलना हिटलर के यूरोप में किए गए कामों से की है।
कनाडा के नोवा स्कॉटिया अप्रवासी संग्रहालय में काम करने वाली मैरीने फर्ग्युसन ने प्रिंस चार्ल्स से मुलाकात के बाद यह बात कही।
उन्होंने कहा कि जब वो लोग हिटलर के देशों पर कब्जे की बात कर रहे थे तो राजकुमार ने "कुछ इस आशय की बात की 'उससे कुछ अलग नहीं है यह.. जो पुतिन कर रहे हैं।'"
ब्रिटेन के राजनिवास क्लेयरेंस हाउस ने इसे एक निजी बातचीत बताते हुए किसी भी तरह की टिप्पणी से इंकार किया है।
प्रिंस चार्ल्स और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दूसरे विश्वयुद्ध के संबंध में फ्रांस में अगले महीने होने वाली एक सालाना बैठक में शामिल होना है।
हालांकि रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दमित्री पेस्कोव ने चीन से बीबीसी को बताया कि इस बारे में 'पुतिन फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं।'
यूक्रेन में हस्तक्षेप से तुलना
ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स आजकल डचेज ऑफ कार्नवाल कैमिला के साथ कनाडा की चार दिन की यात्रा पर हैं। सोमवार को वह हैलिफैक्स में बने राष्ट्रीय आप्रवासी संग्रहालय को देखने गए थे।
वहां प्रिंस चार्ल्स ने संग्रहालय के लिए स्वेच्छा से काम करने वाली फर्ग्यूसन से बात की, जो नाजी कब्जे के ठीक पहले पोलैंड छोडकर कनाडा आ गई थीं।
अखबार 'डेली मेल' के अनुसार, 78 वर्षीय फर्ग्यूसन अपने माता-पिता और दो बहनों के साथ पोलैंड से कनाडा भाग आई थीं, जबकि उनके परिवार के अन्य सदस्य पकडे गए थे और नाजी कैंपों में भेज दिए गए थे।
फर्ग्यूसन कहती हैं, "उन्होंने (प्रिंस चार्ल्स ने) मुझसे पूछा कि मैं कनाडा कब आई, मैंने बताया कि मैं साल 1939 में कनाडा आई हूं।"
फिर उनके बीच इस बात पर चर्चा होने लगी कि "कैसे हिटलर ने अलग-अलग देशों पर कब्जा किया।"
फर्ग्यूसन ने आगे कहा कि हालांकि उन्हें प्रिंस चार्ल्स की बात शब्दशः याद नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा था, 'इस समय जो हो रहा है यह उससे कुछ अलग नहीं है.. जो पुतिन रूस में कर रहे हैं।"
वे कहती हैं, "लेकिन यह सब बस क्षण भर की बात है।.. यह बहुत छोटी टिप्पणी थी।"
'निजी बातचीत'
इससे पहले जब रूस ने मार्च में यूक्रेन के नागरिकों को वीजा देना शुरू किया था, तब अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भी पुतिन और हिटलर के बीच इसी तरह की तुलना की थी।
उन्होंने कहा था,"यह घटना तो बिलकुल वैसी ही है जैसा हिटलर ने 30 साल पहले किया था।"
इससे पहले प्रिंस चार्ल्स को विवादित मुद्दों पर उनके विचार जाहिर करते मंत्रियों को भेजे गए कथित "काली मकडी" वाले ज्ञापन को लेकर भी आलोचना झेलनी पडी थी।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने बीबीसी रेडियो-4 के कार्यक्रम 'वर्ल्ड एट वन' में कहा कि वह "किसी की निजी बातचीत पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।"
वहीं उप प्रधानमंत्री निक क्लेग ने ये कहते हुए प्रिंस चार्ल्स का बचाव किया है कि "यह साफ तौर से निजी बातचीत थी।"
उन्होंने बीबीसी के टेलीविजन कार्यक्रम 'ब्रेकफस्ट' में कहा,"मैंने ऐसा कभी नहीं माना कि अगर आप शाही परिवार का हिस्सा हैं, तो आपको मौन व्रत धारण कर लेना चाहिए।"
राजनीतिक प्रतिक्रिया
यूकेआईपी के नेता नाइजेल फैरेज ने कहा कि हालांकि वह राजशाही का समर्थन करते हैं लेकिन कई बार प्रिंस चार्ल्स के लिए "यह अच्छा रहेगा" कि वह ऐसी चीजों में न पडें।
लेकिन विदेश मामलों की प्रवर समिति के पूर्व अध्यक्ष और लेबर पार्टी सांसद माइक गेप्स ने कहा कि राजकुमार को उनकी "स्वतंत्र विदेश नीति" को खत्म नहीं करना चाहिए।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "संवैधानिक राजशाही में नीति और कूटनीति, संसद और सरकार को तय करना चाहिए। राजशाही दिखाई देने की चीज है, सुनाई देने की नहीं।"
कंजर्वेटिव पार्टी अध्यक्ष ग्रांट शैप्पस का कहना है, "लोग अपने अपने हिसाब से कुछ भी सोचने को स्वतंत्र हैं। लेकिन ये मंत्रियों को शोभा नहीं देता कि वे शाही शख्सियतों की बातों पर टीका-टिप्पणी करें।"
इस सवाल पर, कि क्या यह मामला रूस में उठाया जाएगा, मॉस्को में ब्रिटेन के राजदूत रहे सर टोनी ब्रेन्टन कहते हैं कि राजकुमार की ताजा टिप्पणियों का गंभीर "दुष्प्रभाव" पडने की आशंका कम ही है।