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मकड़ी के जाले से बना कैंसर का टीका, रेशे से निर्मित माइक्रो कैप्सूल बनाए
एजेंसी, जिनेवा
Updated Thu, 14 Jun 2018 05:32 AM IST
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spider
अब कैंसर को रोकने के लिए मकड़ी के जाले से कैंसर का टीका बनाया गया है। दरअसल, वैज्ञानिकों ने मकड़ी के जाले के रेशे से बने ऐसे माइक्त्रसे कैप्सूल विकसित किए हैं जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं तक सीधे कैंसर वैक्सिन को पहुंचा सकते हैं। कैंसर से लड़ाई के लिए शोधकर्ता इस तरह की वैक्सिन का इस्तेमाल करते हैं जो रोग प्रतिरोधक प्रणाली को सक्रिय कर सके और ट्यूमर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें नष्ट कर सके।
बहरहाल, प्रतिरक्षा तंत्र से जैसी प्रतिक्रिया की उम्मीद होती है, लेकिन वैसी हमेशा मिल नहीं पाती। प्रतिरक्षा प्रणाली और विशेषकर कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने वाली टी लिम्फोसाइट कोशिकाओं पर वैक्सिन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए शोधकर्ताओं ने मकड़ी के जाले के रेशे से निर्मित माइक्रो कैप्सूल बनाए हैं जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं के केंद्र तक सीधे वैक्सिन को पहुंचाने में सक्षम हैं।
इस किस्म के माइक्त्रसे कैप्सूल यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रीबर्ग और लुडविक मैक्जिमिलियान यूनिवर्सिटी, म्यूनिख के शोधकर्ताओं ने विकसित किए हैं। हमारी रोग-प्रतिरोधक प्रणाली में दो तरह की कोशिकाएं होती हैं : एक बी लिम्फोसाइट जो विभिन्न संक्रमणों से लड़ने के लिए एंटीबॉडी का उत्पादन करती हैं। दूसरी कोशिकाएं हैं टी लिम्फोसाइट। कैंसर के अलावा टीबी जैसे कुछ संक्त्रसमक रोगों के मामलों में टी लिम्फोसाइट को सक्रिय करने की जरूरत होती है। ‘जर्नल बायोमटेरियल्स’ नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में में वर्णित इस प्रक्रिया को संक्त्रसमक बीमारियों से बचाने के लिए निवारक टीकों पर भी लागू किया जा सकता है।
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जिनेवा यूनिवर्सिटी (यूएनआईजीई) के कैरोल बोर्क्विन ने कहा कि कैंसर के खिलाफ प्रभावी इम्यूनोथेरेपीटिक दवाओं को विकसित करने के लिए टी लिम्फोसाइट्स की प्रतिक्रिया उत्पन्न करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, ‘मौजूदा टीकों में टी-सेल्स पर केवल सीमित मात्रा तक ही हैं इसलिए इस समस्या को दूर करने के लिए अन्य वैक्सीन प्रक्रियाओं को विकसित करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
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बहरहाल, प्रतिरक्षा तंत्र से जैसी प्रतिक्रिया की उम्मीद होती है, लेकिन वैसी हमेशा मिल नहीं पाती। प्रतिरक्षा प्रणाली और विशेषकर कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने वाली टी लिम्फोसाइट कोशिकाओं पर वैक्सिन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए शोधकर्ताओं ने मकड़ी के जाले के रेशे से निर्मित माइक्रो कैप्सूल बनाए हैं जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं के केंद्र तक सीधे वैक्सिन को पहुंचाने में सक्षम हैं।
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इस किस्म के माइक्त्रसे कैप्सूल यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रीबर्ग और लुडविक मैक्जिमिलियान यूनिवर्सिटी, म्यूनिख के शोधकर्ताओं ने विकसित किए हैं। हमारी रोग-प्रतिरोधक प्रणाली में दो तरह की कोशिकाएं होती हैं : एक बी लिम्फोसाइट जो विभिन्न संक्रमणों से लड़ने के लिए एंटीबॉडी का उत्पादन करती हैं। दूसरी कोशिकाएं हैं टी लिम्फोसाइट। कैंसर के अलावा टीबी जैसे कुछ संक्त्रसमक रोगों के मामलों में टी लिम्फोसाइट को सक्रिय करने की जरूरत होती है। ‘जर्नल बायोमटेरियल्स’ नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में में वर्णित इस प्रक्रिया को संक्त्रसमक बीमारियों से बचाने के लिए निवारक टीकों पर भी लागू किया जा सकता है।
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जिनेवा यूनिवर्सिटी (यूएनआईजीई) के कैरोल बोर्क्विन ने कहा कि कैंसर के खिलाफ प्रभावी इम्यूनोथेरेपीटिक दवाओं को विकसित करने के लिए टी लिम्फोसाइट्स की प्रतिक्रिया उत्पन्न करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, ‘मौजूदा टीकों में टी-सेल्स पर केवल सीमित मात्रा तक ही हैं इसलिए इस समस्या को दूर करने के लिए अन्य वैक्सीन प्रक्रियाओं को विकसित करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।