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बड़ा खुलासा : 2003 से भारत में सक्रिय है कैंब्रिज एनालिटिका

Thu, 29 Mar 2018 08:28 AM IST
एजेंसी, लंदन
एजेंसी, लंदन Updated Thu, 29 Mar 2018 08:28 AM IST
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cambridge analytica is active in India since 2003
कैंब्रिज एनालिटिका
ब्रिटिश व्हिसलब्लोअर क्रिस्टोफर वाइली ने फेसबुक डाटा लीक मामले में फंसी कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका (सीए) के भारतीय प्रोजेक्टों का ब्यौरा जारी कर दिया है। दावा है कि सीए भारत में 2003 से सक्रिय थी। उसने अपनी सहायक कंपनी स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन लेबोरेट्रीज (एससीएल) की मदद से कई राज्यों में जातिगत सर्वे और चुनावी विश्लेषण किया है। बुधवार को ट्विटर पर जारी सूचना में वाइली ने कहा, 2010 के बिहार चुनाव में जेडीयू उसकी क्लाइंट थी। इसके अलावा एससीएल ने उत्तर प्रदेश में कुछ जातिगत सर्वे भी किए।
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वाइली ने कहा, मेरे पास भारतीय पत्रकारों की तरफ से लगातार आग्रह आ रहे थे, इसलिए मैंने भारत में एससीएल के कुछ पुराने प्रोजेक्टों का डाटा शेयर किया है। जो सवाल सबसे ज्यादा पूछे जा रहे थे उसके संदर्भ में मेरा कहना है कि हां, एससीएल भारत में काम कर रही है और वहां इसके दफ्तर हैं। यह आधुनिक उपनिवेशवाद जैसा ही कुछ है।
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वाइली की ओर से जारी दस्तावेज के अनुसार, एससीएल इंडिया को 2010 में जेडीयू के लिए रिसर्च और रणनीति तैयार करने का काम सौंपा गया था। एससीएल ने अपने क्लाइंट की मदद के लिए 75 प्रतिशत घरों को कवर करने वाले बिहेवियरल रिसर्च प्रोग्राम बनाया। इसका मकसद न केवल उम्मीदवार के लिए सही सीट की पहचान करना था बल्कि अपने अभियान के जरिये सही लोगों तक सही संदेश पहुंचाना और सही जाति को टॉरगेट करना था।
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वाइली के दस्तावेज के अनुसार, 2011-12 में एक राष्ट्रीय पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश में जातिगत जनगणना और जाति आधारित रिसर्च अभियान चलाया गया। इस रिसर्च में जाति आधारित ढांचे और राज्य में इसकी पैठ का विश्लेषण किया गया। ताकि पार्टी के कोर वोटर और राय बदलने वाले वोटरों की पहचान का पता लगाकर किसी नतीजे पर पहुंचा जा सके।

कैंब्रिज एनालिटिका के पूर्व कर्मचारी वाइली ने एक दिन पहले ब्रिटिश संसद की डिजिटल, कल्चर, मीडिया एंड स्पोर्ट्स (डीसीएमएस) कमेटी को बताया कि सीए भारत में बड़े पैमाने पर काम करती थी। उसका मानना है कि कांग्रेस भी उसके क्लाइंट में से एक थी।

600 से ज्यादा जिलों और 7 लाख गांवों का डाटाबेस

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christopher wylie
वाइली ने भारत में एससीएल के सभी पूर्व प्रोजेक्टों का स्क्रीन शॉट शेयर करते हुए कहा, एससीएल इंडिया के पास 600 से ज्यादा जिलों और 7 लाख गांवों का डाटाबेस है। यह लगातार अपडेट होता रहता है। इसमें घरेलू  जनसंख्या शामिल है। खासतौर पर जाति आधारित डाटा पर फोकस किया गया है।

ऐसे करती है काम

कंपनी इन सूचनाओं को आवश्यक जानकारी के मुताबिक विश्लेषण के लिए ऑनलाइन मैपिंग एप्लीकेशन पर लिंक करती है। एससीएल इंडिया अपने क्लाइंट से वादा करती थी कि वह आबादी के अंदर लक्षित समूह (टॉरगेट ग्रुप) को प्रभावित करने और जरूरी निष्कर्ष तक पहुंचने में मदद करती है। क्लाइंट को पूरी रिसर्च के साथ सही सूत्रों के जरिये सही कम्युनिकेशन चैनल का इस्तेमाल कर सही संदेश पहुंचाया जाता है।

गाजियाबाद में मुख्यालय, नौ क्षेत्रीय ऑफिस 

भारत में रिसर्च के लिए एससीएल ने गाजियाबाद में मुख्यालय बनाया है। इसके अलावा अहमदाबाद, बंगलूरू, कटक, गुवाहाटी, हैदराबाद, इंदौर, कोलकाता, पटना और पुणे में कंपनी के नौ क्षेत्रीय ऑफिस हैं।

2003 में राजस्थान-एमपी में किया काम 

कंपनी ने कई राज्यों में काम किया। 2003 में राजस्थान में एक बड़ी राज्य स्तरीय पार्टी के लिए काम किया। 2003 में एससीएल इंडिया ने एक राष्ट्रीय पार्टी के लिए राय बदलने वाले वोटरों का चुनावी विश्लेषण किया। 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक बड़ी पार्टी के लिए राजनीतिक सर्वे किया। 2009 के लोकसभा चुनावों में कई प्रत्याशियों के चुनाव अभियानों का प्रबंधन संभाला।

2007 में छह राज्यों में चलाया विशेष अभियान 

एससीएल इंडिया को ट्रांस नेशनल प्रोग्राम की मदद के लिए 2007 में एक रिसर्च कम्युनिकेशन अभियान चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके जरिये केरल, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश नॉन डिजायर बिहेवियर से जिहाद का समर्थन करने वाले लोगों का मुकाबला किया जाना था। 
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