{"_id":"1198d25fb4e9c037cd5971a9cc7e93f9","slug":"call-for-un-council-meet-on-egypt","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूएन: मिस्र में सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील","category":{"title":"Rest of World","title_hn":"बाकी दुनिया","slug":"rest-of-world"}}
यूएन: मिस्र में सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील
Updated Fri, 16 Aug 2013 07:58 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मिस्र की राजधानी क़ाहिरा में सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थकों पर की गई सैन्य कार्रवाई पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक हुई।
विज्ञापन
बैठक के बाद जारी एक संक्षिप्त बयान में सुरक्षा परिषद ने हिंसा में हुई मौतों पर खेद प्रकट किया और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
बैठक का उद्देशय मिस्र को यह संकेत देना था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र वहां के घटनाक्रम पर है।
एक बंद कमरे में होने वाली इस बैठक को ब्रिटेन, फ़्रांस और ऑस्ट्रेलिया के कहने पर बुलाया गया था। इन देशों की सरकारों ने मिस्र में हुई हिंसा की कड़ी आलोचना की है। तुर्की ने मिस्र से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है।
विज्ञापन
मिस्र के अधिकारियों के मुताबिक़ बुधवार को हुई सैन्य कार्रवाई में छह सौ से ज्यादा लोग मारे गए हैं। जबकि ब्रदरहुड ने हिंसा में दो हज़ार से अधिक लोगों के मारे जाने का दावा किया है।
विज्ञापन
इस बीच राजधानी क़ाहिरा और अन्य शहरों में लगातार दूसरे दिन रात का कर्फ्यू लगाया गया है। गुरुवार को दिन के वक़्त अपदस्थ राषट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों और सैन्य बलों के बीच अलेक्ज़ेंड्रिया में हिंसक झड़पें होती रहीं। क़ाहिरा के पश्चिमी उपनगर गीज़ा में सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया। मुस्लिम ब्रदरहुड ने जुमे की नमाज़ के बाद विरोध रैलियों का आह्वान किया है। ब्रदरहुड ने जुमे को 'गुस्से का दिन' घोषित किया है।
ओबामा ने की आलोचना
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी हिंसक सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। ओबामा ने कहा कि मिस्र की सड़कों पर नागरिक मारे जा रहे हैं, ऐसे में मिस्र के साथ अमेरिका के रिश्ते सामान्य नहीं रह सकते। ओबामा ने मिस्र के साथ अगले महीने होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास को भी रद्द कर दिया है।
ओबामा ने कहा, "मिस्र की अंतरिम सरकार और सेना ने जो क़दम उठाए हैं अमेरिका उसकी कडी़ आलोचना करता है। हमे नागरिकों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा पर अफ़सोस है। हम मानव गरिमा के लिए ज़रूरी सार्वभौमिक अधिकारों का समर्थन करते हैं जिनमें शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार भी शामिल हैं। सुरक्षा के नाम पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता को छीनने वाले मार्शल लॉ का विरोध करते हैं। इसके तहत नागरिकों से उनके अधिकार छीन लिए जाते है।"
अमेरिका मिस्र का क़रीबी सहयोगी रहा है। लेकिन मौजूदा हालात में मिस्र के साथ संबंध बनाए रखना अमेरिका के लिए मुश्किल हो रहा है।
ओबामा ने आगे कहा, "हम मिस्र के साथ अपने संबंधों को बनाए रखना चाहते हैं लेकिन जब सड़कों पर नागरिक मारे जा रहे हों और अधिकार छीने जा रहे हों तब हमारे पारंपरिक संबंध जारी नहीं रह सकते। इसी के नतीजे में हमने मिस्र को बताया है कि अगले महीने होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास को रद्द किया जाता है। इससे आगे बढ़ते हुए मैंने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से मिस्र की अंतरिम सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के परिणामों का आंकलन करने और मिस्र और अमेरिका के रिश्तों के संबंध में ज़रूरत पड़ने पर और क़दम उठाने के लिए कहा है।"
अंतिम संस्कार
इस बीच सैन्य कार्रवाई में मारे गए मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थकों को दफ़न किया जाना शुरू हो गया है। क़ाहिरा के नस्र शहर में एक मस्जिद में रखे कुछ शवों की पहचान अभी की जानी है। कई शव गलने भी लगे हैं।
एक ब्रदरहुड समर्थक ने कहा, "शव इस तरह ज़मीन पर पड़े हैं और हम उन्हें दफ़ना नहीं पा रहे हैं। कुछ अधिकारी आए थे और लोगों से अपने संबंधियों को दफ़नाने के लिए कहा था। जो लोग मारे गए हैं वे मुसलमान थे। जो हुआ है वह नरसंहार था जिसके बारे में मिस्र के हर नागरिक को सवाल करना चाहिए।"
ग़ैरक़ानूनी मौतें
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच भी बुधवार को हुई हिंसा की जाँच कर रहा है। संगठन की मिस्र इकाई की निदेशक हेबा मोरायेफ़ ने ये जानकारी दी।
उन्होंने कहा, "हम बुधवार को विरोध प्रदर्शनों को हटाने के लिए सेना द्वारा की गई कार्रवाई की जाँच करने की प्रक्रिया में हैं। हम इस बात की जाँच कर रहे हैं कि सेना द्वारा किया गया बल प्रयोग किस हद तक ज़रूरत से ज़्यादा और ग़ैरक़ानूनी था। हम जानते हैं कि मुस्लिम ब्रदरहुड की ओर भी कुछ हथियार थे। अकेले रबा अल अदविया में ही कम से कम 235 लोग मारे गए हैं। यह संख्या बहुत ज़्यादा भी हो सकती है। हम यह स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं कि कितनी ग़ैरक़ानूनी मौतें हुईं।"
मिस्र के उपराष्ट्रपति मोहम्मद अल बारादेई ने हिंसा के बाद अंतरिम सरकार से इस्तीफ़ा दे दिया है।
अंतिम विकल्प
लेकिन दूसरी तरफ़ मिस्र की सोशल डेमेक्रेटिक पार्टी के मुखिया मोहम्मद अबुलग़ार का मानना है कि विरोध प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के अलावा प्रशासन के पास कोई विकल्प नहीं था।
उन्होंने कहा, 'कोई देश यह बर्दाश्त नहीं करेगा कि हज़ारों की तादाद में हथियारों से लैस लोग शहर के मुख्य चौराहों पर इकट्ठा हों। यूरोप का कोई भी देश इस तरह के जमावड़े को कभी भी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने प्रयास किया और वे नाकाम हो गया और उन्होंने कहा कि वे नाकाम हो गए। हम यूरोप से मिले, हम अमरीकियों से मिले और हम जानते थे कि वे कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। हमने मुस्लिम ब्रदरहुड से बात करने की हर संभव कोशिश की। उन्होंने हमसे बात करने या कोई भी समझौता करने से साफ़ इंकार कर दिया।'
हिंसक कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए मिस्र की अंतरिम सरकार ने कहा है कि पुलिस को आत्मरक्षा में फॉयरिंग करने की अनुमति दी गई थी।