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'शादी नहीं कर रही तो आत्मघाती हमलावर बन जाओ'

Sun, 27 Mar 2016 03:27 PM IST
एनी सॉय/बीबीसी अफ़्रीका संवाददाता
एनी सॉय/बीबीसी अफ़्रीका संवाददाता Updated Sun, 27 Mar 2016 03:27 PM IST
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boko haram sucide bomber
नाइजीरिया लड़कियां विस्थापितों के लिए देश के उत्तर-पूर्व में लगाए गए कैंप में - फोटो : Getty

बीती नौ फरवरी को दो नाइजीरिया लड़कियां विस्थापितों के लिए देश के उत्तर-पूर्व में लगाए गए कैंप में पहुंचीं। कुछ ही पलों में उन दोनों ने खुद को कमर पर बंधे विस्फोटक के जरिए उड़ा लिया। इस हमले में 58 लोगों की मौत हो गई थी। इन दोनों लड़कियों के साथ एक तीसरी लड़की भी थी, जिसने चरमपंथी संगठन बोको हराम के आत्मघाती अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया था। ये उसी तीसरी लड़की की कहानी है। हाउवा, उसका काल्पनिक नाम है। वह अपनी उम्र के बारे में नहीं जानती, लेकिन वह 17-18 साल की दिखती है। वह बोको हराम के चरमपंथियों के साथ एक साल से थी। डिकवा कैंप में हमले की जब योजना बनाई गई तो इन तीन लड़कियों को कहा गया है कि उन्हें जन्नत नसीब होगी। लेकिन हाउवा जानती थी कि वह इस हमले में शामिल नहीं होगी। उसने बीबीसी को बताया, “मैंने उन्हें मना कर दिया क्योंकि मेरी मां डिकवा में ही रहती हैं। मैं वहां जाकर लोगों की हत्या नहीं करना चाहती थी। मैं डिकवा जाकर अपने परिवार के साथ रहना पसंद करती, भले वहां रहने पर मेरी मौत हो जाती।”

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हाउवा के मां-बाप और भाई बहन, बोर्नो स्टेट के डिकवा स्थित कैंप में ही रहते हैं, जहां उनके जैसे 50 हज़ार लोग रह हे हैं। बोको हराम से अपने जुड़ने के बारे में हाउवा बताती हैं, “मुझे कुछ आध्यात्मिक समस्याएं थी और बोको हराम के लोगों ने मुझे कहा कि वे मेरी समस्या दूर करेंगे।” ये नहीं मालूम है कि हाउवा को वाकई में क्या मुश्किल थी। उसे ऐसा प्रतीत होता था कि उसे बुरी आत्माएं तंग करती हैं और इन मुश्किलों के चलते ही हाउवा बोको हराम से जुड़ी। हाउवा को लगा कि उसकी समस्याओं का निदान बोको हराम के पास है। चरमपंथियों ने भी हाउवा को अपने साथ शामिल कर लिया। चरमपंथियों के साथ किसी आम दिन के अपने अनुभव के बारे में हाउवा बताती हैं, “हम घास फूस के घरों में रहते थे। जब मेरा पति आसपास होता तो मैं दिन में तीन बार खाना बनाती। मर्द बाहर जाकर मांस चुराकर लाते, जिन्हें हम बनाते थे।” कुछ ही दिनों में हाउवा अपने पति से अलग हो गई और उसने किसी और चरमपंथी से शादी कर ली। उसका दूसरा पति एक दिन भाग गया और तब उसने तीसरी शादी से इनकार कर दिया।
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तब बोको हराम के चरमपंथियों ने हाउवा को सुझाया कि 'जब तुम फिर से शादी नहीं कर रही हो तो आत्मघाती दस्ते में शामिल हो जाओ।' चरमपंथियों ने डिकवा कैंप पर हमले की योजना बनाई और यह बोको हराम के गढ़ मैदुगुरी से करीब 50 मील उत्तर पूर्व में स्थित है। हाउवा उस कैंप को अच्छे से जानती थी और जहां उसे बंधक रखा गया था, वह डिकवा कैंप काफ़ी दूर भी नहीं था। ऐसे में हमले के दिन वह काफ़ी सुबह ही कैंप के लिए निकल गई। उसकी योजना अपने परिवार और कैंप में रहने वाले दूसरे लोगों को अलर्ट करने की थी। लेकिन वह देरी से पहुंची। जब तक वह कैंप पहुंचीं तब तक वहां दोनों लड़कियों ने विस्फोट कर दिया था। सेना के एक अधिकारी ने बीबीसी की टीम को हमले की जगह दिखाई। अधिकारी ने हमें भूरे रंग के धब्बे दिखाते हुए कहा, “यही वो जगह है जहां पहला विस्फोट हुआ था।” वहां ख़ून के धब्बे और धूल की परतें जमीं हुई थीं। कैंप सड़क के दोनों किनारों पर फैला हुआ है, ऐसे में वहां रहने वाले लोगों को हर दिन पानी और भोजन लेने के लिए इस रास्ते से होकर गुजरना होता है। इस कैंप में अभी भी 15 हज़ार लोग रह रहे हैं और वे काफ़ी डरे हुए हैं। लेकिन उनके पास कोई दूसरा सुरक्षित ठिकाना नहीं है। यहां रहने वाले लोग अब किसी पर भी भरोसा नहीं करते, बच्चों पर भी नहीं।


एक बुज़ुर्ग महिला फालमाता मोहम्मद हमले से कुछ मिनट पहले के पलों को याद करते हुए कहती हैं, “एक सैनिक हमें कतार में खड़ा करने की कोशिश कर रहा था, एक महिला लाल नकाब पहने हुए आई और उसके लंबे बाल थे।” फालमाता कहती हैं कि वह महिला पुलिस से शिकायत करने लगी। वो कहती हैं, “जब तक हम सड़क पर पहुंचते, वह हाय करके चिल्लाई और कहने लगी कि उसके पेट में दर्द है। लोग उसकी मदद करने के लिए पहुंचे और उसे जैसे ही उठाया, वैसे ही धमाका हो गया।” बुज़ुर्ग महिला के मुताबिक आस पड़ोस में आग के गोले दिखने लगे और जल्दी ही उन्हें पता चला कि दर्जनों लोगों की लाशें आसपास बिखर चुकी हैं। हाउवा ने ख़ुद से हमला नहीं देखा था, लेकिन उसने धमाके के बाद का फुटेज़ जरूर देखा। हाउवा कहती हैं, “यह देखना कोई प्रसन्नता की बात तो थी नहीं। अपने साथ बम बांधकर ले जाना और साथियों को मारना अच्छी बात नहीं है। पता नहीं ये लड़कियां जानती भी हैं कि ऐसे मिशन में उनकी भी मौत हो जाएगी।”

नाइजीरिया के इस हिस्से में बोको हराम का डर सबके चेहरे पर दिखता है। ख़ासकर माता-पिता के चेहरों पर। बोको हराम के चरमपंथियों ने बोर्नो स्टेट के ही चिबूक नगर से अप्रैल, 2014 में 200 से ज़्यादा स्कूली लड़कियों का अपहरण किया था। इसमें से ज़्यादातर आज भी लापता है। हाउवा ना केवल चरमपंथियों के आदेश की अवहेलना करने में कामयाब रही, बल्कि उनके चंगुल से भाग निकलने में भी कामयाब हुई। अब उसे अपनी ज़िंदगी भी बचानी है। जब हमने उसके भविष्य के बारे में बात की, तो उसका जवाब था, “मैं शिक्षा हासिल करना चाहती हूं।”

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