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तालिबान कमांडर मुल्ला उमर के जीवन से जुड़े अहम राज

Mon, 06 Apr 2015 01:21 PM IST
Updated Mon, 06 Apr 2015 01:21 PM IST
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biography of taliban commander mullah omar

अफगान तालिबान ने एकांत में रहने वाले अपने नेता मुल्ला मोहम्मद उमर की जीवनी प्रकाशित की है। मुल्ला उमर के अफगान तालिबान के सर्वोच्च कमांडर के रूप में 19 साल पूरे होने की खुशी में ऐसा किया गया है।

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पांच हजार शब्द की यह जीवनी अफगान तालिबान की मुख्य वेबसाइट पर छापी गई है। इसमें उनके जन्म और परवरिश के बारे में विवादित तथ्यों को स्पष्ट किया गया है। इसके अनुसार मुल्ला उमर का पसंदीदा हथियार आरपीजी 7 है। इसमें कहा गया है कि वह एक साधारण जीवन जीते हैं और उनमें हंसाने का एक 'ख़ास' हुनर है।

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देश-दुनिया से जुड़े रहते हैं

biography of taliban commander mullah omar

जीवनी में कहा गया है कि उमर कहां हैं, यह कोई नहीं जानता पर वह दिन-प्रतिदिन की देश-दुनिया के खबरों से "जुड़े रहते" हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने मुल्ला उमर के सिर पर एक करोड़ डॉलर का इनाम रखा है। अफगानिस्तान पर अमेरिकी-नेतृत्व में हुए 2001 के हमलों के बाद से मुल्ला उमर को नहीं देखा गया है।

अल-कायदा के नेता ओसामा बिन लादेन के लिए मुल्ला उमर का समर्थन इस अभियान का मुख्य कारण था। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि तालिबान ने अपने नेता के 19 साल पूरे होने पर उनकी जीवनी क्यों छापी। लेकिन कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह अफगानिस्तान में इस्लामी राज्य के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने का प्रयास हो सकता है।

'मुजाहिद' के नाम से है पहचान

biography of taliban commander mullah omar

टिप्पणीकारों और तालिबान पर नजर रखने वाले मुल्ला उमर के जन्म और विरासत सहित कई अन्य तथ्यों पर सहमत नहीं हो पाए हैं। प्रकाशित जीवनी के अनुसार वह मुल्ला का जन्म 1960 में देश के दक्षिण में कंधार प्रांत के खाकरेज ज‌िले के चाह-ए-हिम्मत नामक गांव में हुआ था।

जीवनी में तालिबान अपने सर्वोच्च नेता को मुल्ला मोहम्मद उमर 'मुजाहिद' के नाम से संबोधित करता है। इसमें कहा गया है कि वह होतक जनजाति के तोम्जी कबीले से हैं।

आगे कहा गया है कि उनके पिता मौलवी गुलाम नबी एक "सम्मानित विद्वान और सामाजिक शख्सियत " थे। मुल्ला उमर के जन्म के पांच साल बाद ही उनकी मौत हो गई थी जिसके बाद उनका परिवार उरूजगान प्रांत में आ गया।

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लड़ाई में कुर्बान हुई आंख

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इस जीवनी में कहा गया है कि सोवियत सेनाओं के अफगानिस्तान पर आक्रमण के बाद मुल्ला उमर "अपने धार्मिक दायित्व का निर्वाह करने के लिए" मदरसा छो़ड़ कर जिहादी बन गए। जीवनी के अनुसार उनके सैन्य अभियानों में 1983 से 1991 के बीच रूसी सैनिकों से लड़ते हुए मुल्ला उमर चार बार घायल हुए और उनकी दांई आंख भी फूट गई।

वर्ष 1994 में मुल्ला उमर ने सरदारों के बीच चल रही "गुटीय लड़ाई" से निपटने के लिए इस्लामी मुजाहिद्दीन का नेतृत्व किया जिसके बाद 1992 में कम्युनिस्ट

शासन के पतन हो गया। इसके बाद 1996 में उन्हें "अमीर-उल-मोमीन" का ख‌िताब दिया गया और वह सर्वोच्च नेता बन गए।
2001 में बामियान बुद्ध की प्रतिमा को नष्ट करने के लिए तालिबान की दुनिया भर में आलोचना हुई थी

जीवनी में कहा गया है कि क़ाबुल पर कब्जा करने के बाद मुल्ला उमर ने वहां इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान की स्थापना की और 'शरीयत क़ानून को बर्दाश्त न कर पाने वाली' 'दुनिया की घमंडी काफ‌िर ताकतों' के ख़िलाफ़ संयुक्त सैन्य आक्रमण शुरू किया।

'करिश्माई व्यक्तित्व'

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जीवनी के "करिश्माई व्यक्तित्व" वाले भाग में कहा गया है कि मुल्ला उमर शांत स्वभाव के हैं और अपना आपा या साहस नहीं खोते। इसमें कहा गया है कि उनके पास न तो घर है, न ही कोई विदेशी बैंक खाता। मुल्ला उमर मिलनसार हैं और कभी खुद को अपने सहयोगियों से बड़ा नहीं समझते।

जीवनी में "वर्तमान परिस्थितियों में उनकी दैनिक गतिविधियां" नाम का एक हिस्सा है जिसमें कहा गया है कि "वर्तमान की गंभीर परिस्थितियों में उन पर लगातार दुश्मन नजर रख रहे हैं। लेकिन उनकी दिनचर्या में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया है।"

जीवनी के अनुसार मुल्ला उमर "क्रूर काफिर विदेशी हमलावरों के ख‌िलाफ जिहादी गतिविधियों का ध्यान से निरीक्षण करते हैं।" आगे कहा गया है कि "वह देश और विदेश में होने वाली हर दिन की घटना पर नजर रखते हैं।" कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मुल्ला उमर पाकिस्तान सीमा में या सीमा पर से संचालन कर रहे हैं।

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