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अमेरिका: भारतीय आव्रजकों को भुगतना पड़ता है ग्रीन कार्ड की तय सीमा का दंड
Fri, 07 Aug 2020 07:00 AM IST
संदीप भट्ट
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: संदीप भट्ट
Updated Fri, 07 Aug 2020 07:00 AM IST
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ग्रीन कार्ड
अमेरिका के एक शीर्ष सीनेटर ने कहा है कि देश में कानूनी स्थायी निवास के लिए जारी किए जाने वाले ग्रीन कार्ड की तय सीमा का दंड भारत के आव्रजकों को भुगतना पड़ता है। यह तय सीमा हर देश के लिए है लेकिन भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड का इंतजार 200 वर्षों तक का हो जाता है।
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उन्होंने इस भेदभाव को योग्यता आधारित आव्रजन प्रणाली के सिद्धांतों से ‘असंगत’ बताया।रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर माइक ली ने कहा कि भारतीय आईटी पेशेवरों को मौजूदा आव्रजन प्रणाली से सबसे अधिक नुकसान होता है जिसके तहत हर देश को ग्रीन कार्ड जारी करने का सात प्रतिशत कोटा आवंटित किया गया है।
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ज्यादातर भारतीय आईटी पेशेवर उच्च कौशल वाले होते हैं और वे मुख्यत: एच-1बी कार्य वीजा पर अमेरिका आते हैं। ली ने कहा, हो सकता है कि इसके लिए कई दशकों पहले कुछ वैध कारण हो, लेकिन अब यह ऐसी व्यवस्था बन गई है जिससे एक देश के ग्रीन कार्ड आवेदकों से काफी भेदभाव होता है।
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