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बांग्लादेश में इस्लाम समर्थकों का उग्र प्रदर्शन

Tue, 07 May 2013 01:53 AM IST
Updated Tue, 07 May 2013 01:53 AM IST
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bangladesh violence worsens
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हिंसक इस्लामिक प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोलों और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया है।
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रविवार को देश में कड़े इस्लामिक क़ानून लागू करने की मांग को लेकर हिफाजत-ए-इस्लाम के पांच लाख से अधिक समर्थकों ने रविवार को राजधानी ढाका में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दुकानों और वाहनों में आग लगानी शुरू कर दी।

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प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों में क़रीब छह लोगों की मौत होने और 60 लोगों के घायल होने की खबर है। अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि कुछ लोग सिर में गोली लगने से घायल डुए हैं।
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इसके बाद, पुलिस ने ढाका के मुख्य व्यापारिक केंद्र पर नियंत्रण कर लिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद हज़ारों लोग वहां से भाग गए और आस पास के इलाकों में छिप गए।

'डेली स्टार' वेबसाइट का कहना है कि रात पौने तीन बजे प्रदर्शन स्थल पर डटे प्रदर्शकारी अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते रहे, लेकिन जब पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए कार्रवाई की,तो उनके पास भागने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा।

इसके बाद वहां पर प्रदर्ऩकारियों के जूते चप्पलों का अंबार ही नज़र आया। रविवार देर रात तक पुलिस प्रदर्शनकारियों की धर पकड के लिए जु़टी रही।

सोमवार तड़के ढाका में लोगों की आँख जब खुली तो भी रुक रुक कर गोलियों के चलने की आवाज़ें सुनाई देती रहीं।

पुलिस का अभियान
बीबीसी बंगाली सेवा का कहना है कि पुलिस ने जब इलाक़े को नियंत्रण में लेना शुरू किया तो मोतीझील इलाके में हज़ारों प्रदर्शनकारियों को भागते हुए देखा गया।

एक पुलिस प्रवक्ता ने सोमवार सुबह बताया कि अधिकारियों ने व्यापारिक केंद्र को अपने कब्जें में ले लिया है। पुलिस के जवान आसपास की इमारतों में छिपे प्रदर्शनकारियों की तलाश कर रहे हैं।

शहर के मध्य में स्थित ढाका की सबसे बड़ी मस्जिद के आसपास का इलाका उस समय युद्धक्षेत्र में बदल गया, जब पुलिस ने पत्थरबाजी कर रहे दंगाइयों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे, रबर की गोलियां चलाईं और डंडे बरसाए।

इससे पहले, प्रदर्शनकारियों ने रविवार को सड़कों को जाम कर राजधानी ढाका का देश के अन्य हिस्सों से संपर्क काट दिया था।

ढाका के 'डेली स्टार' अखबार का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को ढाका पहुंचाने के लिए संगठन ने क़रीब तीन हज़ार बसों, मिनीबसों और लारियों को किराए पर लिया था। अन्य प्रदर्शनकारी रेलगाड़ियों पर सवार होकर पहुंचे।


समाचार एजंसी एएफ़पी के मुताबिक़ मोतीझील की ओर जा रही कम से कम छह सड़कों पर प्रदर्शनकारियों ने 'अल्ला-हो- अकबर' और 'एक बात। एक मांग। नास्तिकों को फांसी दो' के नारे लगाते हए प्रदर्शन किया।

इस्लामिक शिक्षा
'हिफाजत-ए-इस्लाम' देश में महिला-पुरुषों को दूर रहने और सख्त इस्लामिक शिक्षा को लागू करना चाहता है।

इस आंदोलन को देश में चल रहे धार्मिक शिक्षा केंद्रों यानी का मदरसों का समर्थन हासिल है।

यह संगठन महिलाओं के विकास की राष्ट्रीय नीति का विरोध करता है, इससे महिला संगठनों में नाराज़गी है।

बांग्लादेश को धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र मानने वाली सरकार ने हिफाजत-ए-इस्लाम की ईशनिंदा के लिए नया क़ानून बनाने की मांग को खारिज कर दिया है।

प्रधानमंत्री शेख हसीना का कहना है कि इसके लिए पहले से मौजूद क़ानून ही पर्याप्त है।

बांग्लादेश की आबादी के क़रीब 90 फ़ीसदी मुसलमान हैं और बाकी की 10 फ़ीसदी आबादी में ज्यादातर हिंदू हैं।

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