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बांग्लादेश में आदिवासी और रोहिंग्या शरणार्थियों के बीच टकराव का खतरा
एजेंसी/ कॉक्स बाजार
Updated Mon, 02 Oct 2017 05:26 AM IST
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बांग्लादेश म्यांमार के साथ लगे एक अशांत पहाड़ी जिले में बस चुके करीब 15 हजार रोहिंग्या शरणार्थियों को वहां से लाकर एक शिविर में रख रहा है। एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि पिछले पांच हफ्तों में दक्षिणपूर्व बांग्लादेश पहुंचे करीब पांच लाख रोहिंग्या सरकारी जमीन पर बने शिविरों में पहुंच चुके हैं। लेकिन हजारों रोहिंग्या निकटवर्ती बंदरबन जिले में बस चुके हैं, जिनमें से अधिकतर मुस्लिम हैं।
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यह जिला चटगांव पहाड़ी इलाकों का हिस्सा, जहां की स्थानीय जनजातियों ने 1980 और 1990 के दशक में एक अलगाववादी विद्रोह किया था। ऐसे में अधिकारियों ने चिंता जताई है कि उनके वहां रहने से वहां की जनजातियों और स्थानीय मुस्लिम जनसंख्या के बीच सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है। वहां की जनजातियां प्रमुख रूप से बौद्ध हैं।
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बंदरबन सरकार के प्रबंधक दिलीप कुमार बानिक ने बताया कि यही कारण है कि वहां बस चुके रोहिंग्याओं को कैंप में लाने का फैसला लिया गया है। बानिक ने यह भी बताया कि सरकार ने बांग्लादेश और म्यांमार के बीच लगने वाले नो-मैन्स लैंड में भी करीब 12 हजार रोहिंग्या बसे हुए हैं, उन्हें भी शरणार्थी शिविरों में लाया जाएगा।
बंदरबन में आईएस सक्रिय
बंदरबन जिले में इसी साल जून में एक स्थानीय राजनेता की हत्या के बाद मुस्लिमों ने जनजातीय समुदाय के हजारों घरों में आग लगा दी थी। वहीं इसी साल मई में एक 75 वर्षीय बौद्ध भिक्षु की हत्या कर दी गई थी। इस हत्या की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी। स्थानीय जनजातियों द्वारा छेड़ा गया अलगाववादी विद्रोह सरकार के साथ किए गए एक शांति समझौते के बाद 1997 में खत्म हुआ था। ऐसे में सरकार ने चिंता जाहिर की है कि यदि क्षेत्र में रोहिंग्या बसते गए तो विद्रोह एक बार फिर शुरू हो सकता है।