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बांग्लादेश में हिंदुओं के हत्यारे को फांसी
बीबीसी हिंदी
Updated Tue, 22 Jan 2013 08:05 AM IST
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बांग्लादेश में एक युद्ध अपराध न्यायालय ने एक मुस्लिम धार्मिक नेता को 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए फांसी की सजा सुनवाई है।
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अदालत ने 1971 के युद्ध के दौरान मौलाना अब्दुल कलाम आजाद को व्यक्तिगत तौर पर छह हिंदुओं को गोली मारने और महिलाओं का बलात्कार करने के लिए दोषी पाया है।
मौलाना अब्दुल कलाम आजा को दी गई सज़ा इस विवादित अदालत का पहला फैसला है जिसे युद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए बनाया गया है। तीन साल पहले तैयार इस न्यायालय को संयुक्त राष्ट्र की मान्यता हासिल नहीं है।
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सुनवाई गैर-मौजूदगी में
मौलाना आजाद जमाते इस्लामी के सदस्य हैं और उनके मामले के सुनवाई उनकी ग़ैर मौजूदगी में हुई। खबरों के मुताबिक वो फिछले साल अप्रेल में पाकिस्तान भाग गए थे। जमाते इस्लामी ने बांग्लादेश के पाकिस्तान से अलग होने के खिलाफ मुहिम चलाई थी।
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संगठन पर आरोप था कि उसने आम लोगों के ख़िलाफ़ हुए अत्याचारों में या तो हिस्सा लिया या लोगों को उसके लिए उकसाया। उस पर कई बार पाकिस्तानी फ़ौज के साथ इनमें शामिल होने का इल्जाम है।
समाचार एजेंसी एएफपी ने कहा है कि नौ महीने की जंग के बीच पाकिस्तानी फौज ने 30 लाख लोगों की हत्या की थी और करीब दो लाख महिलाओं का बलात्कार किया गया था।
मानवाधिकार का सवाल
न्यूयार्क स्थित ह्यूमन राईट्स वॉच ने अदालत की कार्रवाही पर सवाल खड़े किए हैं। कहा गया है कि बचाव पक्ष के कई गवाह अदालत परिसर से गायब हो गए। विपक्षी नेता खालिदा जिया ने अदालत को एक 'स्वांग' करार दिया है।
उधर प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने खालिदा जिया से आग्रह किया है कि वो उन लोगों का बचाव करना बंद कर दें जिन्होंने मुल्क की आजादी के खिलाफ काम किया था।