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बांग्लादेश में 150 सैनिकों को मौत की सजा

Tue, 05 Nov 2013 04:32 PM IST
Updated Tue, 05 Nov 2013 04:32 PM IST
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bangla_mutiny

बांग्लादेश की एक अदालत ने वर्ष 2009 में हुए सैनिक विद्रोह के आरोप में 150 सैनिकों को मौत की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में शामिल आठ सौ से अधिक सैनिक अभियुक्तों को सजा देने का सिलसिला शुरू कर दिया है।

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राजधानी ढाका स्थित बांग्लादेशी राइफल्स के मुख्यालय में हुई इस सैन्य विद्रोह की घटना में सेना के 57 अधिकारियों समेत 74 लोग मारे गए थे।

वेतन और शिकायतों को लेकर चली करीब तीस घंटों की इस बगावत में कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे, बाद में जिनके शव सीवर में फेंक दिए गए थे।

अदालत के इस फैसले में दोषी पाए गए सैनिकों पर हत्या, प्रताडित करने, साजिश और अन्य कई आरोप हैं। इन लोगों को सेना की एक अदालत में पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है।
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विद्रोह के इस मामले में करीब छह हजार सैनिक जेल में सजा काट रहे हैं। यह विद्रोह बाद में देश की अन्य सैन्य छावनियों में भी फैल गया था। इसकी वजह से सरकार और सेना के बीच काफी तनाव बढ गया था।
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दूसरी ओर, ढाका के मेट्रोपॉलिटिन सत्र अदालत के न्यायाधीश मोहम्मद अख्तरूज्जमां ने 157 सैनिकों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इनमें से अधिकतर बोर्डर गार्ड शामिल हैं। जबकि 271 लोगों को रिहा कर दिया गया।

इस मामले में अदालत का पूरा फैसला आना अभी शेष है। डेढ सौ सैनिकों को मौत की सजा का फैसला कडी सुरक्षा के बीच ढाका स्थित एक स्कूल परिसर में खचाखच भरे कमरे में सुनाया गया।

इस बहुचर्चित मामले में कुल 860 सैनिक शामिल हैं और इसको लेकर कई मानवाधिकार संगठन बडे स्तर पर की जा रही कार्यवाही की निष्पक्षता को लेकर सवाल खडे करते रहे हैं।

सैनिक विद्रोह की यह घटना प्रधानमंत्री शेख हसीना के पद संभालने के दो महीने बाद 25 फरवरी 2009 को हुई जब बोर्डर गार्ड बांग्लादेश के सैनिकों ने दो दिन तक अपने सैनिक अधिकारियों के खिलाफ वेतन और दूसरी शिकायतों को लेकर बगावत कर डाली थी।


इसके बाद बांगलादेशी सेना सरकार के उस रुख से खासी नाराज थी, जिसकी वजह से उन्हें ढाका स्थित बोर्डर गार्ड के मुख्यालय पर हमला बोलने की अनुमति नहीं दी गई थी। इस बगावत में उनके कई कमांडर मारे गए थे।

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