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सीरिया पर रिपोर्ट का इंतज़ार: बान की-मून
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 29 Aug 2013 08:51 PM IST
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने कहा है कि सीरिया में रासायनिक हमले को लेकर हथियार निरीक्षक उन्हें शनिवार को रिपोर्ट सौंपेंगे।
इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि अमेरिका इस नतीजे पर पहुंचा है कि सीरिया सरकार ने ही पिछले सप्ताह दमिश्क के पास रासायनिक हथियारों से हमला कराया था।
लेकिन ओबामा ने ये भी कहा कि उन्होने सीरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया है लेकिन भविष्य में ऐसे किसी भी कदम का उद्देश्य रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के प्रति डर पैदा करना होगा।
एक अमेरिकी प्रसारक पीबीएस को दिए इंटरव्यू में ओबामा ने कहा है कि वो मानते हैं कि सीरियाई सरकार ही इस हमले के लिए जिम्मेदार है और वो तुरंत चेतावनी भेजना चाहते हैं।
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उन्होंने कहा कि रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल अमरीकी हितों के खिलाफ और इस वक्त धनुष से तीर छोड़ना सीरिया के युद्ध में सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
ये बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र में सीरिया को लेकर खींचतान चल रही है।
संयुक्त राष्ट्र में खींचतान
ब्रितानी संसद में गुरुवार को सैन्य दखल के प्रस्ताव पर होने वाला मतदान भी अभी तय नहीं है। विपक्षी लेबर पार्टी ने सीरिया के दोषी होने के "पुख्ता सबूत" होने की मांग की है।
लेबर पार्टी ने मांग की कि संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों की रिपोर्ट का इंतजार किया जाए। इसके बाद प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को पीछे हटना पड़ा।
हालांकि लेबर पार्टी अब भी सीरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर पेश किए गए प्रस्ताव के खिलाफ मतदान कर सकती है।
ब्रिटेन ने सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव रखकर सीरिया में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई को अधिकृत किए जाने की कोशिश की है जबकि सीरिया के सहयोगी रूस ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताई है।
इससे संयुक्त राष्ट्र में कूटनीतिक रूकावटें पैदा हो गई हैं जो सीरिया के मुद्दे पर लंबे समय से चली आ रही हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में रूस के रवैये की आलोचना की है और कहा है कि कूटनीतिक कमजोरियों को सीरियाई सरकार के बचाव की वजह नहीं बनने दिया जा सकता।
इस सवाल के जवाब में कि सीरिया पर सीमित कार्रवाई करने से क्या हासिल होगा, ओबामा ने कहा कि ‘‘इससे बशर-अल-असद सरकार को एक सख़्त संदेश जाएगा कि वो दोबारा ऐसा ना करें।’’
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इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि अमेरिका इस नतीजे पर पहुंचा है कि सीरिया सरकार ने ही पिछले सप्ताह दमिश्क के पास रासायनिक हथियारों से हमला कराया था।
लेकिन ओबामा ने ये भी कहा कि उन्होने सीरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया है लेकिन भविष्य में ऐसे किसी भी कदम का उद्देश्य रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के प्रति डर पैदा करना होगा।
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एक अमेरिकी प्रसारक पीबीएस को दिए इंटरव्यू में ओबामा ने कहा है कि वो मानते हैं कि सीरियाई सरकार ही इस हमले के लिए जिम्मेदार है और वो तुरंत चेतावनी भेजना चाहते हैं।
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उन्होंने कहा कि रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल अमरीकी हितों के खिलाफ और इस वक्त धनुष से तीर छोड़ना सीरिया के युद्ध में सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
ये बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र में सीरिया को लेकर खींचतान चल रही है।
संयुक्त राष्ट्र में खींचतान
ब्रितानी संसद में गुरुवार को सैन्य दखल के प्रस्ताव पर होने वाला मतदान भी अभी तय नहीं है। विपक्षी लेबर पार्टी ने सीरिया के दोषी होने के "पुख्ता सबूत" होने की मांग की है।
लेबर पार्टी ने मांग की कि संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों की रिपोर्ट का इंतजार किया जाए। इसके बाद प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को पीछे हटना पड़ा।
हालांकि लेबर पार्टी अब भी सीरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर पेश किए गए प्रस्ताव के खिलाफ मतदान कर सकती है।
ब्रिटेन ने सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव रखकर सीरिया में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई को अधिकृत किए जाने की कोशिश की है जबकि सीरिया के सहयोगी रूस ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताई है।
इससे संयुक्त राष्ट्र में कूटनीतिक रूकावटें पैदा हो गई हैं जो सीरिया के मुद्दे पर लंबे समय से चली आ रही हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में रूस के रवैये की आलोचना की है और कहा है कि कूटनीतिक कमजोरियों को सीरियाई सरकार के बचाव की वजह नहीं बनने दिया जा सकता।
इस सवाल के जवाब में कि सीरिया पर सीमित कार्रवाई करने से क्या हासिल होगा, ओबामा ने कहा कि ‘‘इससे बशर-अल-असद सरकार को एक सख़्त संदेश जाएगा कि वो दोबारा ऐसा ना करें।’’