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नेपाल में जंगली जानवरों को मारने की नौबत

Fri, 01 Feb 2013 10:28 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Fri, 01 Feb 2013 10:28 AM IST
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attacks prompt nepal to cap wildlife growth

कई देशों में बाघ और गैंडे जैसे जानवर लुप्त होने की कगार पर हैं। आमतौर पर हर देश में वन्यजीव संरक्षण की बात जोरों शोरों से होती है। लेकिन नेपाल में कहानी अलग है।

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नेपाल में अधिकारियों का कहना है कि उन्हें बाघ समेत अन्य जानवरों की संख्या पर लगाम कसनी पड़ेगी। अधिकारियों के मुताबिक, मनुष्यों पर वन्यजीवों के हमले बहुत बढ़ गए हैं जिस वजह से उन्हें ये कदम उठाना पड़ेगा।
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ये समस्या उन इलाकों में अधिक है जो राष्ट्रीय पार्कों और मानव बस्तियों के बीच पड़ते हैं। दक्षिणी नेपाल के चितवन नेशनल पार्क में 500 से ज्यादा गैंडे हैं। कुछ साल पहले तक ये संख्या इससे आधी थी। यहां 125 से अधिक बाघ हैं। बरदिया नेशनल पार्क में 90 के दशक के मुकाबले हाथियों की संख्या दस गुना बढ़ गई है।
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बस और नहीं
स्नो लेपर्ड और रेड पांडा जैसे जानवरों पर लुप्त होने का खतरा था लेकिन इनकी संख्या भी अब नेपाल में बढ़ रही है। नेपाल में 24 फीसदी जमीन संरक्षित भूमि है।

इस कारण वन और वन्यजीव तो फलफूल रहे हैं लेकिन जानवरों के हमलों के कारण इंसानों की मौत के मामले भी बढ़ गए हैं। हाथियों के हमलों में पिछले पाँच सालों में 80 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं।

पिछले महीने दक्षिणी नेपाल में कई लोग हड़ताल पर चले गए थे और मांग की थी कि तीन लोगों को मार चुके एक हाथी को मार दिया जाए।

कई जगह हाथी मनुष्यों के घरों और खेतों को नष्ट कर चुके हैं जबकि पिछले महीने एक तेंदुए ने कई लोगों को मार डाला था।

नेपाल में नेशनल पार्क और वन्य जीव संरक्षण विभाग के पूर्व प्रमुख कृष्ण आचार्य कहते हैं कि पहले जानवरों के हमलों में करीब 30 लोगों की मौत का रिकॉर्ड हमारे पास होता था, लेकिन पिछले कुछ सालों में ये संख्या बहुत बढ़ गई है। अब ये तय करने का समय आ चुका है कि हमें वन्यजीवों की कितनी प्रजातियां रखनी हैं।


अधिकारी कहते हैं कि वन्यजीवों के लिए संरक्षित इलाकों का दायरा बढ़ाने के आसार कम हैं क्योंकि नेपाल में पहले से ही जमीन का बहुत बड़ा हिस्सा इसके लिए दिया जा चुका है। कृष्ण आचार्य इसके लिए एक सुझाव देते हैं। वे कहते हैं कि हमने नौ ऐसी प्रजातियों की सूची बनाई है जिन्हें ऐसी जगह स्थानांतरित किया जा सके जहां ये जीव कम संख्या में हैं।

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