फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   angel markel and sms

एसएमएस करना छोड़ देंगी चांसलर मर्केल?

Wed, 30 Oct 2013 01:25 PM IST
Updated Wed, 30 Oct 2013 01:25 PM IST
विज्ञापन
angel markel and sms

जर्मन संसद में बैठकर किसी को एसएमएस करते देख लोगों की त्यौरियां चढ़ने लगती हैं। लेकिन अगर आप चासंलर एंजेला मर्केल हैं तो किसी को बुरा नहीं लगता।

विज्ञापन


आप उन्हें हमेशा एसएमएस करते हुए देख सकते हैं। संसद में बहस के दौरान भी उनके हाथ ही उंगलियां तेज़ी से चलती रहती हैं।

कभी-कभी वो सदन में बैठे अपनी पार्टी के सांसदों को एसएमएस करती हैं, और फिर उनकी तरफ देखती हैं ताकि पता चले उनका संदेश मिला या नहीं।

चांसलर दफ्तर में पहले मंजिल पर उनका मोबाइल चार्ज होता है, बाकी समय यह उनके हाथ से दूर नहीं रहता है।

जासूसी पर तलाक

जब से उन्हें पता चला है कि उनके मोबाइल संदेश वॉशिंगटन के पास मैरिलैंड में अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के दफ्तर में कोई पढ़ सकता है, तब भी उन्होंने कहा है कि अपनी आदतें बदलने का उनका कोई इरादा नहीं है।
विज्ञापन


बेशक वो मोबाइल फोन इस्तेमाल करेंगी, लेकिन इस बात में संदेह नहीं कि हालिया घटनाक्रम ने उन्हें हिला दिया है।

खास कर पूर्वी जर्मनी में जहां मर्केल पली पढ़ीं, वहां लोगों के फोन टैप किया जाना कोई नई बात नहीं थी।

जब बर्लिन की दीवार गिरी को एक राजनेता को पता चला कि उनके पति ही उनकी जासूसी कर रहे थे। ये रहस्य खुलने के बाद उनका तलाक हो गया था।

एडवर्ड स्नोडेन
पूर्व सीआईए कॉन्ट्रैक्टर एडवर्ड स्नोडेन की ओर से लीक जानकारी के आधार पर ये जासूसी के दावे किए जा रहे हैं
पूर्वी जर्मनी में जब कम्युनिस्ट शासन का अंत हुआ तो पता चला कि सुरक्षा विभाग यानी श्टासी के लिए 91 हजार लोग काम करते थे।

ज्यादा सुरक्षा नहीं

लेकिन कम्युनिस्ट राज में पले बढ़े होने के बावजूद मर्केल लोगों पर काफी भरोसा करती हैं। जासूसी के दावों के सामने आने के बाद उन्होंने कहा था कि दोस्त एक दूसरे की जासूसी नहीं करते हैं, बल्कि भरोसा करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुझे लगता है कि अन्य विश्व नेताओं के मुक़ाबले मर्केल की सुरक्षा बहुत कम है।

एक बार मैं उनकी एक बैठक में गया जहां वो कुछ प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने जा रही थीं। वहां एक आदमी मुख्य प्रवेश द्वार पर इधर उधर लंबे लंबे डग भर कर चल रहा था। उसके हाथ में एक बड़ा डंडा था जिसमें झंडा लगा हुआ था।

मुझे इस बात का भरोसा था कि जब मर्केल आएंगी तो उस व्यक्ति को वहां नहीं रहने दिया जाएगा। खैर, पुलिस उसके पास गई और उससे बात की गई।

अगर ये घटना अमेरिका या ब्रिटेन की होती तो उस व्यक्ति को पुलिस गाड़ी में बिठाती और वहां से ले जाती। लेकिन इस व्यक्ति को वहीं रहने दिया गया। उससे कहा गया कि बस समस्या ये है कि झंडे का डंडा बहुत बड़ा है।

वो व्यक्ति वहीं रहा और मर्केल के सामने झंडा लहराता रहा, बगैर डंडे के।

मुझे ये देखकर बड़ा अच्छा लगा। वैसा ही अच्छा उन्हें एसएमएस करते हुए देखकर लगता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed