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सीरिया की ओर कदम बढ़ा रही है अमेरिकी सेना
बीबीसी
Updated Sat, 24 Aug 2013 03:44 PM IST
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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन सैन्य बेड़ा सीरिया के नजदीक पहुँच रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री चक हेगल ने इस बात पर जोर दिया कि सीरिया में संघर्ष जैसे हालात हैं।
हालांकि उन्होंने कोई ब्योरा नहीं दिया, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी नौसेना पूर्वी भूमध्यसागर में अपना दखल मजबूत कर रही है।
शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि ऐसे आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं कि सीरियाई सरकार ने रासायनिक हथियारों का कथित रूप से इस्तेमाल किया है।
वहीं दूसरी ओर सीरियाई सरकार के मुख्य सहयोगी देश रूस ने कहा है कि ऐसे सबूत सामने आ रहे हैं कि दमिश्क में सीरियाई विद्रोहियों ने ही रासायनिक हमला किया था।
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सीरिया के विपक्षी कार्यकर्ताओं ने दावा किया था कि बुधवार को दमिश्क के सीमावर्ती इलाके में सरकार ने रासायनिक हथियारों से हमला कराया जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए।
दमिश्क के नजदीक हुए कथित रासायनिक हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र (यूएन) समेत कई अन्य देशों ने सीरिया में दखल की मांग को तेज कर दी थी। इसके बावजूद सीरियाई सरकार की ओर ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि वह इस हमले के कथित दावे की जांच करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की टीम को इजाजत देगी।
आकस्मिक स्थिति
विद्रोहियों ने इस हमले में घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराए जाने का एक वीडियो यूट्यूब पर अपलोड किया है। वीडियो में कई बच्चों समेत पीड़ितों को दर्द से तड़पते हुए दिखाया गया है। कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्कत आ रही है।
हालांकि इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हो पाई है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री चक हेगल के मुताबिक राष्ट्रपति ओबामा ने कहा था कि अमेरिका पर सीरिया में हस्तक्षेप करने का दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में पेंटागन को भी मुस्तैद होना चाहिए।
उन्होंने कहा, "अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन की ज़िम्मेदारी है कि सभी तरह की आकस्मिक स्थिति बनने पर राष्ट्रपति को विकल्प मुहैया कराए। इनमें सैन्य बलों की स्थिति तय करने से लेकर कई विकल्प होते हैं, जिनमें से कोई भी विकल्प राष्ट्रपति चुन सकते हैं।"
मलेशिया की यात्रा पर जाते वक़्त हेगल ने संवाददाताओं से यह बताया।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने पहले कहा कि अमरीका का क्रूज़ मिसाइल से लैस चौथा युद्धपोत पूर्वी भूमध्यसागर की ओर बढ़ रहा है।
जांच का दबाव
संयुक्त राष्ट्र संघ महासचिव बान की मून के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा था कि उन्होंने सीरिया में हुए कथित हमले की 'बिना कोई देर किए जांच' करने की माँग की है।
प्रवक्ता के अनुसार महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र की निरस्त्रीकरण प्रमुख एंजेला केन को दमिश्क भेजने का मन बनाया ताकि सीरिया पर इस जांच के लिए दबाव बनाया जा सके।
संयुक्त राष्ट्र के अलावा तुर्की, फ्रांस और ब्रिटेन ने भी ऐसी ही माँग की।
वहीं फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरोंग फेबियूस ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नागरिकों पर किए गए रासायनिक हथियारों के हमले का पूरी शक्ति से जवाब देना चाहिए।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी का कहना था कि अमेरिका रासायनिक हमले के तथ्यों की जांच कर रहा है।
वहीं सीरिया के क़रीबी समझे जाने वाले रूस का कहना है कि विद्रोही हमले की बात कर पश्चिमी मुल्कों से सैन्य सहायता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद के करीबी समझे जाने वाले मुल्क रूस ने आग्रह किया है कि वो हमले की जांच में संयुक्त राष्ट्र टीम की मदद करें।
सीरिया में पिछले 28 महीनों से जारी लड़ाई में एक लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं जबकि लाखों बेघर हो गए हैं।
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हालांकि उन्होंने कोई ब्योरा नहीं दिया, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी नौसेना पूर्वी भूमध्यसागर में अपना दखल मजबूत कर रही है।
शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि ऐसे आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं कि सीरियाई सरकार ने रासायनिक हथियारों का कथित रूप से इस्तेमाल किया है।
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वहीं दूसरी ओर सीरियाई सरकार के मुख्य सहयोगी देश रूस ने कहा है कि ऐसे सबूत सामने आ रहे हैं कि दमिश्क में सीरियाई विद्रोहियों ने ही रासायनिक हमला किया था।
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सीरिया के विपक्षी कार्यकर्ताओं ने दावा किया था कि बुधवार को दमिश्क के सीमावर्ती इलाके में सरकार ने रासायनिक हथियारों से हमला कराया जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए।
दमिश्क के नजदीक हुए कथित रासायनिक हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र (यूएन) समेत कई अन्य देशों ने सीरिया में दखल की मांग को तेज कर दी थी। इसके बावजूद सीरियाई सरकार की ओर ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि वह इस हमले के कथित दावे की जांच करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की टीम को इजाजत देगी।
आकस्मिक स्थिति
विद्रोहियों ने इस हमले में घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराए जाने का एक वीडियो यूट्यूब पर अपलोड किया है। वीडियो में कई बच्चों समेत पीड़ितों को दर्द से तड़पते हुए दिखाया गया है। कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्कत आ रही है।
हालांकि इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हो पाई है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री चक हेगल के मुताबिक राष्ट्रपति ओबामा ने कहा था कि अमेरिका पर सीरिया में हस्तक्षेप करने का दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में पेंटागन को भी मुस्तैद होना चाहिए।
उन्होंने कहा, "अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन की ज़िम्मेदारी है कि सभी तरह की आकस्मिक स्थिति बनने पर राष्ट्रपति को विकल्प मुहैया कराए। इनमें सैन्य बलों की स्थिति तय करने से लेकर कई विकल्प होते हैं, जिनमें से कोई भी विकल्प राष्ट्रपति चुन सकते हैं।"
मलेशिया की यात्रा पर जाते वक़्त हेगल ने संवाददाताओं से यह बताया।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने पहले कहा कि अमरीका का क्रूज़ मिसाइल से लैस चौथा युद्धपोत पूर्वी भूमध्यसागर की ओर बढ़ रहा है।
जांच का दबाव
संयुक्त राष्ट्र संघ महासचिव बान की मून के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा था कि उन्होंने सीरिया में हुए कथित हमले की 'बिना कोई देर किए जांच' करने की माँग की है।
प्रवक्ता के अनुसार महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र की निरस्त्रीकरण प्रमुख एंजेला केन को दमिश्क भेजने का मन बनाया ताकि सीरिया पर इस जांच के लिए दबाव बनाया जा सके।
संयुक्त राष्ट्र के अलावा तुर्की, फ्रांस और ब्रिटेन ने भी ऐसी ही माँग की।
वहीं फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरोंग फेबियूस ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नागरिकों पर किए गए रासायनिक हथियारों के हमले का पूरी शक्ति से जवाब देना चाहिए।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी का कहना था कि अमेरिका रासायनिक हमले के तथ्यों की जांच कर रहा है।
वहीं सीरिया के क़रीबी समझे जाने वाले रूस का कहना है कि विद्रोही हमले की बात कर पश्चिमी मुल्कों से सैन्य सहायता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद के करीबी समझे जाने वाले मुल्क रूस ने आग्रह किया है कि वो हमले की जांच में संयुक्त राष्ट्र टीम की मदद करें।
सीरिया में पिछले 28 महीनों से जारी लड़ाई में एक लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं जबकि लाखों बेघर हो गए हैं।