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जब भारतीयों को बचाने के लिए बंदूक लेकर कूद पड़े गवर्नर

Thu, 07 Jan 2016 03:39 PM IST
Updated Thu, 07 Jan 2016 03:39 PM IST
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afghan governor take action against terrorist

अफ़गानिस्तान में मज़ार-ए-शरीफ़ स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास पर जब चरमपंथियों ने हमला किया तो बाख़ प्रांत के गवर्नर अता मोहम्मद नूर एक असॉल्ट राइफ़ल लेकर मुकाबले के लिए उतर गए।

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ट्विटर पर वायरल हो रही तस्वीरों में नूर हथियार पकड़े बाख़ प्रांत की राजधानी मज़ार-ए-शरीफ़ के भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर सैनिकों से बात करते दिख रहे हैं।
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अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय राजदूत अमर सिन्हा ने भी एक ट्वीट कर इसकी पुष्टि की थी। अफ़गानिस्तान में सोवियत हमले के दौरान नूर एक मुजाहिदीन थे और उन्हें जंग का प्रशिक्षण मिला है।
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उन्होंने अहमद शाह मसूद के उत्तरी गठबंधन में बतौर कमांडर भी काम किया है, जो अफ़गानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान विरोध कर रहा था। पढ़िए रविवार रात के हमले के दौरान क्या हुआ था, खुद अता मोहम्मद नूर की ज़ुबानी...

भारत अफगानिस्तान का एक अच्छा दोस्त

afghan governor take action against terrorist

चरपमंथी मज़ार-ए-शरीफ़ स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमला करना चाहते थे क्योंकि भारत अफ़गानिस्तान का एक अच्छा दोस्त है। चरमपंथी मज़ार स्थित वाणिज्य दूतावास में राजनयिकों की हत्या करना चाहते थे। वह भारत और अफ़गानिस्तान के राजनीतिक रिश्तों को खराब करना चाहते थे। हमें इस तरह की रिपोर्टें मिली थीं कि अफ़गानिस्तान के दुश्मन अंदर घुस सकते हैं।

हमने इसे रोकने के लिए कदम उठाए थे लेकिन फिर भी ये घटना हुई। हमले के बाद हमने तुरंत कार्रवाई की और हमने इस हमले को रोकने में कामयाबी हासिल की। पांच से दस मिनट में मैं वाणिज्य दूतावास के दरवाज़े पर पहुंच गया था। मैं खुद इस ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहा था। मेरे पास हथियार थे।

भारतीय राजनयिक अफ़गानिस्तान के दोस्त हैं इसलिए कार्रवाई करना मेरी ज़िम्मेदारी थी। मैंने दूतावास की सुरक्षा के लिए हथियार उठाए। मेरे पास सोवियत यूनियन, आतंकियों, अल-कायदा और तालिबान से लड़ने का तजुर्बा है। मैं लंबे समय से सुरक्षा मामलों से जुड़ा रहा हूं।

मात्र एक शहरी को चोट आई

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एक वक्त मैं अफ़गानिस्तान में मिलिट्री कमांडर और उत्तरी अफ़गानिस्तान में सुरक्षा मामलों का प्रमुख था। मैंने चरमपंथियों से लड़ना अपनी ज़िम्मेदारी समझा। मैं उन पर बहुत नज़दीक से हमले कर रहा था। मेरी कोशिश ये भी थी कि आम शहरियों को कोई नुकसान न पहुंचे। आपने सुना होगा कि इस घटना में मात्र एक शहरी को चोट आई, एक सैनिक मारा गया और आठ सैनिक घायल हुए।

मैं इस ऑपरेशन का नेतृत्व दफ़्तर में डेस्क पर बैठकर नहीं करना चाहता था। हमलावर कौन: हमलावर भारत के कूटनीतिक दुश्मन हैं। हमले के मास्टरमाइंड ऐसे ही लोग हो सकते हैं जिन्हें कश्मीर जैसे मुद्दे पर भारत से समस्या हो।

दीवार पर ये लिखना कि शहीद का खून हज़ार भक्तों को जन्म देता है, साफ़ कर देता है कि हमलावर अफ़गानिस्तान के बाहर से आए थे। हमलावर भारतीयों को निशाना बनाना चाहते थे और ये छद्म युद्ध की तरह ही है।

'दीवार पर खून से लिखना उसका सुबूत'

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हम वाणिज्य दूतावास की सुरक्षा बढ़ाना चाहते हैं। हम राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की संख्या बढ़ाना चाहते हैं। हम पुलिस की पेट्रोलिंग बढ़ाना चाहते हैं। हम चेक प्वांट्स की संख्या बढ़ाएंगे। हम इंटेलिजेंस बेहतर करेंगे। अभी तक मिली जानकारी के आधार पर हम ये पुष्टि कर सकते हैं कि हमलावर अफ़गानिस्तान के बाहर से आए थे और वह उर्दू बोल रहे थे।

दूतावास की दीवार पर खून से लिखना उसका सुबूत है। चरमपंथियों के डीएनए की जांच की जा रही है। हम इस बारे में और इंटेलिजेंस जानकारी इकट्ठी कर रहे हैं। ये हो सकता है कि हमले लश्कर-ए-तोएबा, सिपाहे-मोहम्मद या किसी अन्य चरमपंथी गुट ने करवाए हों। भारत से संबंध: भारत और अफ़गानिस्तान के ऐतिहासिक रिश्ते हैं और उनके संबंध बहुत अच्छे हैं।

मेरे भारतीयों से बेहत अच्छे रिश्ते हैं। मैंने दो बार भारत की यात्रा की है और ये यात्राएं बहुत अच्छी रही हैं। आतंक के खिलाफ़ लड़ाई में भारत ने बहुत अच्छी भूमिका निभाई। भारत ने कमांडर अहमद शाह मसूद, रब्बानी सरकार की हिमायत की। इसी समर्थन के कारण आज हम आज़ाद हैं।

भारत और पाकिस्तान दोनों से रिश्ते रखना हित में

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छद्म युद्ध से किसी को फ़ायदा नहीं है। अफ़गानिस्तान के लिए भारत औऱ पाकिस्तान दोनों से रिश्ते रखना हित में है। भारत भी नहीं चाहेगा कि वह अफ़गानिस्तान में पाकिस्तान के लिए ज़मीन छोड़े। तो वह यहाँ भी राष्ट्रीय हितों को देखते हुए पाकिस्तान को चुनौती दे सकता है। दूतावासों पर पाकिस्तान के सवाल: दो देश जब एक दूसरे के यहां दूतावास खोलने का फ़ैसला करते हैं तो ये दोनो देशों के बीच तालमेल के कारण होता है।

अफ़गानिस्तान आज़ाद देश है और ये अफ़गानिस्तान का अधिकार है कि वह भारत को अफ़गानिस्तान में दूतावास खोलने दे। ये भारत का अधिकार है कि वो किस देश के साथ रिश्तों को बढ़ाए और कहां दूतावास खोले। भारत और पाकिस्तान दोनों ही अफ़गानिस्तान के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत के अफ़गानिस्तान से अच्छे और दोस्ताना संबंध हैं। पाकिस्तान को इस मौके का फ़ायदा उठाते हुए चरमपंथियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान में बहुत समानताएं हैं। दोनो देशों के बीच 2,400 किलोमीटर की सीमा रेखा है। इसलिए बेहतर सुरक्षा के लिए उन्हें अफ़गानिस्तान के साथ मिलकर चरमपंथ के खिलाफ़ लड़ने की ज़रूरत है। मेरे भारतीय राजदूत अमर सिन्हा के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। अफ़गानिस्तान में उनका बहुत महत्वपूर्ण किरदार रहा है और उनके काम के लिए उनकी तारीफ़ होनी चाहिए।
(बीबीसी संवाददाता विनीत खरे से बातचीत पर आधारित)

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