एक 'आतंकवादी' के बेटे के दिल की बात
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जैक इब्राहिम ने कई सालों तक अपनी पहचान छिपाई लेकिन आखिर में उन्होंने सबके सामने आने और अपनी पहचान सार्वजनिक करने का फैसला किया।
जैक के पिता को 1993 में न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में ब्लास्ट के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उस वक्त वो सिर्फ 10 साल के थे।
जैक ने सालों बाद सबके सामने आने के अपने फैसले की वजह बताई। वो कहते हैं, "मैं लोगों को बताना चाहता था कि मेरी परवरिश जिस तरह की चरमपंथी विचारधारा के बीच हुई उसके बाद भी मैं वैसा नहीं बना।
मैं अपने पिता की तरह आतंकवादी नहीं बना। और दुनिया भर के ज्यादातर मुसलमान तो ऐसी विचारधारा से कोसों दूर हैं।
लोगों को बताना चाहता हूं कि एक आतंकी का बेटा
ऐसे में वो कैसे आतंकवाद को समर्थन दे सकते हैं?" जैक ने आगे कहा, "मैं शांति की बात करने, इसे बढ़ावा देने के लिए लोगों के सामने आया हूं।
लोगों को बताना चाहता हूं कि एक आतंकी का बेटा, आतंकी नहीं बना। इसलिए मुसलमानों से डरने की कोई जरूरत नहीं है। हम एक शांतिप्रिय कौम हैं।"
जैक के मुताबिक इस्लामिक स्टेट जैसे संगठन को सीरिया के कई मुसलमान मजबूरी में समर्थन देते हैं क्योंकि उनके लिए दो ही विकल्प हैं। या तो आईएस को समर्थन दें या मौत को चुनें।
इसलिए आईएस जैसे संगठन को अलग-थलग करने के लिए वहां के लोगों को हर तरह की मदद और समर्थन की जरूरत है।