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सीरिया और आईएस से जुड़ी ऐसी 8 बातें, जिन्हें लोग गलत समझ लेते हैं

Sun, 06 Dec 2015 01:36 PM IST
Updated Sun, 06 Dec 2015 01:36 PM IST
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8 things about seriya which people get misunderstood

सीरिया में इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर कई देश बमबारी कर रहे हैं। अमरीका, रूस, फ्रांस के बाद अब ब्रिटेन ने भी हवाई बमबारी शुरू कर दी है।

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आईएस के खिलाफ लड़ाई में इन हवाई हमलों को कितनी सफलता मिलेगी, इसे लेकर संशय बना हुआ है। सीरिया के मैदान में इतने खिलाड़ी उतर गए हैं कि असली लड़ाई की तस्वीर और धुंधली हो गई है।
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बीबीसी न्यूजबीट ने मध्यपूर्व के जानकार टिम इटन से उन आठ सवालों के बारे में जानने की कोशिश की, जिनके बारे में आम तौर पर लोग गलतफहमी के शिकार हो जाते हैं।
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1-क्या ब्रिटेन सीरिया के साथ युद्ध लड़ रहा है?

टिम इटन का कहना है कि यह बात सही नहीं है। वो कहते हैं, “इस समय सीरिया में कई अलग-अलग समूह लड़ रहे हैं, इसलिए सीधे-सीधे ये कहना सही नहीं होगा कि ब्रिटेन सीरिया के साथ लड़ रहा है।”

वो कहते हैं, “सीरिया की असद सरकार के खिलाफ हवाई हमलों को लेकर 2013 में संयुक्त राष्ट्र में वोट हुआ था।”

अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बाधा हैं?

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यह पूरी तरह सही नहीं है। असल में इस लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय सीमाएं शामिल हैं। हमलों का समर्थन करने वालों का कहना है कि रेत में लकीर खींचने का कोई मतलब नहीं है। आईएस द्वारा घोषित ‘खिलाफत’ भी इराक और सीरिया की सीमा को तवज्जो नहीं दे रहा है।

टिम इटन के मुताबिक, “ब्रिटेन इराक में आईएस के खिलाफ पहले से हमले कर रहा है लेकिन वहां उसे इराकी सरकार ने आमंत्रित किया था, जबकि सीरिया में ऐसा नहीं है।”

“इराक से अलग सीरिया की सीमा पर बहुत कम लड़ाके हैं जिनका ब्रिटेन समर्थन कर सकता है, लेकिन ये सही है कि आईएस सीमा को बिल्कुल तवज्जो नहीं देता।”

वो कहते हैं, “सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या सिर्फ आईएस पर बमबारी करने के अलावा ब्रिटेन के पास इस पूरे विवाद को लेकर कोई रणनीति है?”

सीरिया में 70,000 'अच्छे' विद्रोही हैं?

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इटन के मुताबिक, इसके बारे में कोई साफ आंकड़ा नहीं है, “हम अकसर ‘उदार लड़ाके’ और ‘कट्टरपंथी ताकतें’ जैसे शब्द सुनते हैं लेकिन इसका क्या मतलब है, यह साफ नहीं है।”

टिम इटन कहते हैं, “यह संख्या विभिन्न विरोधी ग्रुपों को मिलाकर बताई जा रही है और ये कहना भ्रम पैदा करने जैसा है कि वो एकजुट ताकत हैं और आईएस से मुकाबला कर सकते हैं।”

असल में ये मुख्य रूप से राष्ट्रपति असद के खिलाफ लड़ रहे हैं और इनमें से भी अधिकांश तो एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं।

हवाई हमले कितने सटीक हैं?

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ब्रिटेन की कंजरवेटिव पार्टी के सांसद जॉनी मर्सर ने न्यूजबीट को बताया, “किसी पर बम गिराना बहुत घिसा पिटा विचार है। हम बहुत सटीक और घातक हथियार इस्तेमाल कर रहे हैं।”

लेकिन टिम इटन कहते हैं कि ब्रिटेन को इस बारे में बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है।

उनके मुताबिक, “हालांकि ब्रिटेन की वायु सेना के हथियार बहुत सटीक हैं लेकिन उनकी सटीकता खुफिया जानकारियों पर निर्भर करती है। अभी तक ब्रिटेन ने ठिकानों के बारे में सटीक जानकारी मिलने से पहले उन्हें निशाना नहीं बनाया है।”

वो कहते हैं, “ब्रिटेन के पास पर्याप्त खुफिया जानकारियां नहीं है इसलिए सच्चाई ये है कि वो बहुत ज्यादा बम नहीं गिराएगा।”

केवल जमीनी सेना ही आईएस को हरा पाएगी?

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इस बारे में सावधानी बरतने की जरूरत है।

इराक और अफगानिस्तान की लड़ाई के बाद अब राजनेताओं के लिए ‘सेना को जमीन पर उतारने’ वाली बात कहना थोड़ा मुश्किल है।

क्योंकि ये दोनों लड़ाइयां उम्मीद से ज्यादा लंबी खिंचीं और इनमें बहुत से ब्रितानी सैनिकों की जान गई।

लेकिन लेबर पार्टी के सांसद वेस स्ट्रीटिंग के अनुसार, “केलव जमीनी सेनाएं ही बुरे तत्वों का मुकाबला कर सकती हैं जबकि हवाई हमलों में हमेशा आम नागरिकों के मारे जाने का खतरा रहता है।”

लेकिन सच्चाई क्या है? इटन कहते हैं, “हमने देखा है कि इराक और सीरिया में जब जमीनी सैनिकों (अधिकांश कुर्द) को हवाई मदद दी गई तो उन्हें आईएस पर बढ़त हासिल हुई।”

वो बताते हैं, लेकिन यह रणनीति आईएस के गढ़ रक्का में बहुत सफल नहीं हो पाई।

“कुर्द सेना उत्तर पश्चिम में है और रक्का में बहुत ज्यादा कुर्द आबादी नहीं है इसलिए यहां सवाल खड़ा हुआ कि कौन सी ताकत रक्का पर हमला करेगी?”

“जो 70,000 लड़ाके हैं उनमें से अधिकांश मुख्य रूप से असद सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं। इसकी बहुत कम संभावना है कि वो असद के खिलाफ मोर्चा छोड़ आईएस के खिलाफ लड़ें।”

अरब देश ज्यादा कुछ नहीं कर रहे?

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असल में क्षेत्र के देश भी इसमें शामिल हैं। इटन के मुताबिक, “कतर की तरह ही सउदी अरब और तुर्की विपक्षी बलों की बहुत अधिक मदद कर रहे हैं। ”

वो कहते हैं, “लेकिन समस्या ये है कि इस विवाद में शामिल पश्चिमी देश और क्षेत्र के देश अलग अलग नतीजे चाहते हैं जो कि विवाद को केवल बढ़ा रहा है।”

ब्रिटेन को गठबंधन में शामिल होना चाहिए?

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इसकी कोई बाध्यता नहीं है। लेकिन यह सही है कि अमरीका और फ्रांस पहले से ही सीरिया और इराक में आईएस के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।

लेकिन गठबंधन में शामिल होने का मतलब है, ब्रिटेन दुनिया की भू रणनीति में अपनी जगह बनाए।

इटन कहते हैं, “अगर ब्रिटेन को कूटनीतिक मोर्चे पर प्रभावी होना है तो अधिकांश लोग तर्क देंगे कि ब्रिटेन को सैन्य कार्रवाई के मोर्चे पर होना चाहिए।”

क्या ये हमले आईएस को ब्रिटेन के खिलाफ उकसाएगा?

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टिम इटन के मुताबिक, “ब्रिटेन पहले से ही आईएस के निशाने पर है। फ्रांस को सिर्फ इसलिए निशाना नहीं बनाया गया क्योंकि उसने आईएस पर हमले किए। ब्रिटेन अपनी नीति इसलिए नहीं छोड़ सकता कि उसे जवाबी हमले का डर है।”

वो कहते हैं, “लेकिन एक सवाल तो खड़ा ही है कि इस्लामिक स्टेट से लड़ने का क्या यही सबसे बढ़िया तरीका है?”

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