सऊदी अरब: बम धमाका मामले में 5 दोषियों को सजा-ए-मौत
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समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक सऊदी अरब की एक अदालत ने साल 2003 में राजधानी रियाद में हुए सिलसिलेवार आत्मघाती बम हमलों के दोषी पांच लोगों को मौत की सजा सुनाई है।
सऊदी मीडिया ने जानकारी दी है कि आत्मघाती कार बम हमले के बाकी 37 दोषियों को तीन से 35 साल की अलग अलग सज़ाएं दी गई हैं।
साल 2003 में राजधानी रियाद में तीन आवासीय परिसरों में आत्मघाती कार बम धमाके किए गए थे। हमले में सऊदी अरब के दर्जनों नागरिक और विदेशियों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।
हमले में अल कायदा का था हाथ
हमले में चरमपंथी समूह अल-कायदा का हाथ होने की आशंका जताए जाने के बाद इसके खिलाफ सघन अभियान शुरू किया गया था।
हमले के दोषी पांच लोगों को रियाद के पास स्थित एक सैन्य अड्डे पर हमले की साजिश रचने और अपने नेता तुर्की अल-दांदनी को वित्तीय और संचालन संबंधी मदद मुहैया करने का भी दोषी पाया गया है।
दांदनी अल-कायदा के शीर्ष कार्यकर्ता माने जाते हैं। उनकी मौत सऊदी पुलिस के साथ हुए एक मुठभेड़ में हो गई थी।
मामले में विशेष अदालत का गठन
सऊदी अरब के अधिकारियों ने साल 2011 में चरमपंथियों से पूछताछ के लिए एक विशेष अदालत का गठन किया। इस अदालत का उद्देश्य उन दर्जनों सऊदी और विदेशियों पर मुकदमा चलाना था जिनपर अल-कायदा से संबंध का शक था या जिन्हें साल 2003 में अशांति फैलाने में शामिल माना गया था।
साल 2003 में हुए आत्मघाती हमले ने अधिकारियों को प्रेरित किया कि वे सऊदी अरब में जन्मे ओसामा बिन लादेन द्वारा स्थापित जेहादी नेटवर्क की जांच-पड़ताल करें। ओसामा की मौत मई 2011 में अमेरिकी कमांडो की ओर से चलाए गए एक ऑपरेशन में हो गई थी।
ओसामा के साथ ओबामा
ओसामा की मौत अमेरिकी कमांडो ऑपरेशन में हुई थी। अल-कायदा से जुड़े कथित चरममंथियों के खिलाफ चलाए गए इस अभियान का असर यूं हुआ कि कई चरमपंथी यमन भाग गए। वहां अरब प्रायद्वीप में अल-कायदा समूह के गठन के लिए स्थानीय सेना में शामिल हो गए।
अमेरिका यमन के इस विंग को अल-कायदा का सबसे सक्रिय और घातक विंग मानता है। इसे अमरीका की धरती पर भी किए गए कई नाकाम हमलों का भी दोषी पाया गया और इसके खिलाफ गुप्त ड्रोन हमले भी हुए।
साल 2014 के शुरूआत में सऊदी अरब ने प्रतिबंधित चरमपंथी समूहों की सूची में सीरिया में सक्रिय समूह अल-कायदा का नाम भी शामिल कर लिया है।