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अमेरिकी विश्वविद्यालय ने 25 भारतीय छात्रों को निकाला
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 07 Jun 2016 08:34 PM IST
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Kentucky University
- फोटो : Kentucky University
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न्यूयॉर्क टाइम्स की एक खबर के अनुसार पश्चिमी केंटकी विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान कार्यक्रम के पहले सेमेस्टर में पढ़ रहें 25 भारतीय छात्रों को विद्यालय छोड़ने को कहा गया है। क्योंकि वह सभी छात्र विश्वविद्यालय के प्रवेश के मानकों को पूरा नहीं कर पाए थे। विश्वविद्यालय ने इन छात्रों को वापस भारत जाने और वहीं के विश्वविद्यालयों में अपने लिए जगह खोजने को कहा है। यह फैसला तब लिया गया। जब प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका की यात्रा पर हैं।
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इस साल जनवरी में पश्चिमी केंटकी विश्वविद्यालय में 60 भारतीय छात्रों को कंप्यूटर विज्ञान कार्यक्रम के लिए नामांकित किया गया था और विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय नियोक्ताओं का इस्तेमाल करते हुए उन्हें दाखिलें प्रदान किए गए थे। पश्चिमी केंटकी के कंप्यूटर विज्ञान कार्यक्रम के अध्यक्ष जेम्स गैरी ने टाइम्स को बताया की सभी छात्रों में से लगभग 40 छात्रों ने दाखिले की शर्तों को पूरा नहीं किया है। विद्यालय ने दाखिले की शर्तों को पूरी करने के लिए उन्हें समय भी दिया था। तथा विश्वविद्यालय द्वारा उपचारी मदद की पेशकश की गई थी। पर ये छात्र शर्तें पूरी नही कर पाए।
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विश्वविधालय की ओर से 35 छात्रों को ही पढ़ाई पूरी करने दी जाएगी बाकी 25 छात्रों को वापस भारत जाना होगा। केंटकी विश्वविद्यालय के कप्यूटर प्रोग्राम के विभाग अध्ययक्ष जेम्स गैरी ने कहा है कि कुछ छात्रों को उनके कुछ विषयों को पूरा करने दिया जा सकता है। क्योंकि वह उनके कंप्यूतर प्रोग्राम के पाठयक्रम का एक जरुरी हिस्सा है। और एक कौशल भी है। बाकी अमेरिकी विद्यालय स्नातक से नीचे यह पाठयक्रम पढ़ाने में असमर्थ है। गैरी ने कहा की यह मेरे और विभाग दोनों के लिए बड़े शर्म की बात होगी कि यह छात्र यहां से अपना पाठयक्रम पूरा नही कर पा रहे हैं। लेकिन मैं पाठयक्रम जारी रखने के लिए उन्हें अनुमति नही दे सकता।
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सभी छात्रों को भारत में चल रहे प्रचार अभियानों के तहत ही दखिला दिया गया था। जिसके तहत उन्हें ऑन द स्पॉट एडमीशन और ट्यूशन फीस में छूट पहले ही छुट दी गई थी। ऐसा तब किया गया था। जब विश्वविद्यालय बजट में गहरी कटौती की सामना कर रहा था। तब उसने दाखिलों की सख्या बढाने के लिए ऑन द स्पॉट एडमीशन और ट्यूशन फीस छूट देने के लिए कई देशों में यह अभियान चलाया था। विश्वविद्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने सभी देशों के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय दाखिलों की प्रक्रिया को बदल दिया है और इसकी जानकारी सभी देशों में कंप्यूटर विज्ञान संकाय के सभी सदस्यों को भेज चुके हैं।
पश्चिमी केंटकी विश्वविद्यालय में पढ़ रहे भारतीय छात्रसंघ के अध्यक्ष, आदित्य शर्मा ने भातीय छात्रों को विश्वविद्यालय छोड़ने के लिए कहे जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि "मैं निश्चित रूप से इन छात्रों के साथ हूं और इनके लिए हर संभव लड़ाई लड़ रहा हूं, बहुत पैसा खर्च कर इतनी दूर पढ़ने आए हम सभी छात्रों के एक साथ है " शर्मा, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन में एक स्नातक छात्र है।' लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि छात्रों में से कुछ ने अपने पाठयक्रम की शर्तें पूरी नही की हैं। ना ही वे अपने जीपीए (ग्रेड बिंदु औसत ) को पूरा नहीं कर सके हैं, इसलिए विश्वविद्यालय को इस मामले में निर्णय लेना पड़ा।