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सोशल डिस्टेंसिंग के बीच आलिंगन पर शोध, बीस सेकंड तक जादू की झप्पी सबसे अच्छी

Mon, 15 Jun 2020 02:19 PM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: आसिम खान Updated Mon, 15 Jun 2020 02:19 PM IST
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Research on the hug between social distancing in Japan, the best hug is twenty seconds 
सांकेतिक तस्वीर

दूरी बनाए रखने और अवसाद करने वाली खबरों के इस दौर में एक अच्छे आलिंगन से शायद ही किसी को इनकार होगा, लेकिन अच्छे से गले लगाना होता कैसा है? वैज्ञानिकों ने अब इस सवाल का जवाब ढूंढ लिया है। बस सीने से लगाने वाले को ज्यादा जोर से मत दबाइए। जापान के तोहो विश्वविद्यालय की एक टीम ने शिशुओं पर अलग-अलग दबाव के आलिंगनों के असर को मापा है। टीम ने अनजान लोगों के आलिंगनों और माता-पिता के आलिंगनों असर में अंतर को भी मापने में कामयाबी हासिल की है। 

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यह सब मापने के लिए बच्चों के दिल की धड़कन की गति को मॉनिटर किया गया और वयस्कों के हाथों पर दबाव मापने के लिए सेंसर लगाए गए। शोधकर्ताओं ने अलग-अलग स्थितियों में बच्चे की प्रतिक्रिया का आकलन किया जब उसे सिर्फ गोद में लिया गया। जब उसे मध्यम दबाव वाला एक आलिंगन दिया गया और जब उसे एक टाइट हग दिया गया। 
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'सेल' पत्रिका में छपे सर्वे के अनुसार, बच्चों को गोद में रखे जाने से ज्यादा मध्यम दबाव वाला आलिंगन अधिक अच्छा लगा। इसके उलट जोर से सीने से लगाने पर अच्छा लगने के स्तर में कमी आई।शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने आलिंगन की अवधि को 20 सेकंड पर सीमित रखा। क्योंकि उन्होंने पाया कि जब 1 मिनट या उससे ज्यादा समय के लिए आलिंगन किया गया, तो बच्चा का मूड हर बार खराब हो जाता था।
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शायद यह आश्चर्य की बात न हो। लेकिन 125 दिन से ज्यादा बड़े शिशुओं को किसी अनजान महिला के मुकाबले अपने माता-पिता से आलिंगन मिलने में अच्छा लगा इसलिए 'परफेक्ट हग' या संपूर्ण आलिंगन वही होता है जो माता-पिता से मिलता है और जो मध्यम दबाव वाला होता है।

ऑटिज्म के मरीजों का हो सकेगा बेहतर इलाज
वैज्ञानिकों का मानना है कि उनके इस शोध से पहली बार शिशु को सीने से लगाने के शारीरिक असर को मापा गया है और इस शोध से अभिभावकों और बच्चों के बंधन और शिशु मनोवैज्ञानिक के बारे में और जानकारी मिल सकेगी। 


टीम के शोधकर्ताओं में से एक हीरोमासा फुनातो ने बताया कि इसका इस्तेमाल ऑटिज्म को और जल्दी पता लगाने में हो सकता है। आलिंगन के दौरान प्राप्त किए गए विभिन्न मस्तिक संबंधित संदेशों से दिल के धड़कने की गति पर असर पड़ता है।

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