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नेपाल: बालेंद्र शाह के सरकार में आते ही तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ तेज हुई जांच, धनशोधन का मामला
Mon, 30 Mar 2026 05:11 PM IST
Nirmal Kant
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू।
Published by: Nirmal Kant
Updated Mon, 30 Mar 2026 05:11 PM IST
सार
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के खिलाफ तीसरे दिन विरोध के बीच धनशोधन मामले की जांच तेज हो गई है। तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ धनशोधन की जांच की जा रही है। पढ़िए रिपोर्ट-
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नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
- फोटो : एक्स/एएनआई/वीडियो ग्रैब
विस्तार
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के विरोध में तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रहे। वहीं, अधिकारियों ने धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ जांच तेज कर दी है। ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। उन पर पिछले साल 8 और 9 सितंबर को हुई जेन-जी आंदोलन को दबाने को आरोप है। इस आंदोलन के दौरान दो दर्जन युवाओं समेत 76 की मौत हुई थी।
ओली की गिरफ्तारी के खिलाफ तीसरे दिन भी प्रदर्शन
ये गिरफ्तारियां तब हुईं, जब नई बनी बालेंद्र शाह सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में जेन-जी विरोध प्रदर्शनों की जांच रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया। सोमवार सुबह ओली की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत माक्सवादी-लेनिनवादी) और उसके सहयोगी संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता नया बनेश्वर इलाके में एकत्र हुए थे। कार्यकर्ता 'केपी ओली को तुरंत रिहा करो' और 'बदले की राजनीति बंद करो' जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। सोमवार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा। शनिवार व रविवार को हुए प्रदर्शनों में झड़पें हुई थीं।
ये भी पढ़ें: न्यूजीलैंड में सबसे बड़ा ड्रग का जखीरा बरामद, इंदिरा गांधी के हत्यारे का भतीजा चला रहा था रैकेट
तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ जांच तेज
इसी बीच, नेपाल के धनशोधन जांच विभाग और पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल के खिलाफ जांच तेज कर दी है। यह कार्रवाई पूर्व मंत्री दीपक खडका की गिरफ्तारी के बाद की गई है। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, विस्तृत जांच शुरू करने से करीब छह महीने पहले शुरुआती जांच की गई थी। इस दौरान हेराफेरी पाए जाने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया।
पूर्व ऊर्जा मंत्री की क्यों हुई गिरफ्तारी?
पूर्व ऊर्जा मंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता दीपक खडका को धनशोधन मामले में रविवार को गिरफ्तार किया गया था। स्वास्थ्य से जुड़ी शिकायत के बाद उन्हें रविवार को महाराजगंज स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन पर आरोप है कि ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री रहते हुए उन्होंने लाइसेंस और ठेके दिलाने के बदले आर्थिक लाभ लिया। पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान खडका और पूर्व प्रधानमंत्रियों देउबा और दहल के घरों पर जले हुए नोटों के टुकड़ों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे, जिनकी बाद में फोरेंसिक जांच में पुष्टि भी हुई थी।
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ओली की गिरफ्तारी के खिलाफ तीसरे दिन भी प्रदर्शन
ये गिरफ्तारियां तब हुईं, जब नई बनी बालेंद्र शाह सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में जेन-जी विरोध प्रदर्शनों की जांच रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया। सोमवार सुबह ओली की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत माक्सवादी-लेनिनवादी) और उसके सहयोगी संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता नया बनेश्वर इलाके में एकत्र हुए थे। कार्यकर्ता 'केपी ओली को तुरंत रिहा करो' और 'बदले की राजनीति बंद करो' जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। सोमवार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा। शनिवार व रविवार को हुए प्रदर्शनों में झड़पें हुई थीं।
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#WATCH | Kathmandu, Nepal: Supporters of former Nepal Prime Minister KP Sharma Oli protest against his arrest.
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Oli has been arrested in connection with a case linked to the alleged suppression of the September Gen Z protests pic.twitter.com/qynbKy0Zgw— ANI (@ANI) March 30, 2026
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तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ जांच तेज
इसी बीच, नेपाल के धनशोधन जांच विभाग और पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल के खिलाफ जांच तेज कर दी है। यह कार्रवाई पूर्व मंत्री दीपक खडका की गिरफ्तारी के बाद की गई है। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, विस्तृत जांच शुरू करने से करीब छह महीने पहले शुरुआती जांच की गई थी। इस दौरान हेराफेरी पाए जाने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया।
पूर्व ऊर्जा मंत्री की क्यों हुई गिरफ्तारी?
पूर्व ऊर्जा मंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता दीपक खडका को धनशोधन मामले में रविवार को गिरफ्तार किया गया था। स्वास्थ्य से जुड़ी शिकायत के बाद उन्हें रविवार को महाराजगंज स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन पर आरोप है कि ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री रहते हुए उन्होंने लाइसेंस और ठेके दिलाने के बदले आर्थिक लाभ लिया। पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान खडका और पूर्व प्रधानमंत्रियों देउबा और दहल के घरों पर जले हुए नोटों के टुकड़ों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे, जिनकी बाद में फोरेंसिक जांच में पुष्टि भी हुई थी।
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