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यूरोप की 'फिट फॉर फिफ्टी फाइव' योजना पर उठा विरोध, आसान नहीं है अमल

Sat, 17 Jul 2021 04:47 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 17 Jul 2021 04:47 PM IST
सार

स्पेन की मोटर इंडस्ट्री ने स्पेन सरकार से कहा है कि वह इस बारे में अपने रुख पर पुनर्विचार करे। जर्मनी के कार उत्पादकों के संगठन वीडीए ने कहा है कि ये पूरी योजना आविष्कार विरोधी है। इसमें ऐसे लक्ष्य रखे गए हैं जिन्हें हासिल करना असंभव है...

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Protest against European union 'Fit for Fifty Five' plan, implementation is not easy
क्लाइमेट चेंज - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यूरोपियन यूनियन (ईयू) की जलवायु परिवर्तन रोकने की योजना फिट फॉर फिफ्टी फाइव का उन हलकों से तीखा विरोध शुरू हो गया है, जिन पर इस योजना का असर पड़ेगा। खास कर एयरलाइन, मोटर वाहन और तेल उद्योग के क्षेत्र ने आरोप लगाया है कि इस योजना के जरिए ईयू नए निवेश और आविष्कार की संभावनाओं को खतरे में डाल रहा है। इसी हफ्ते ईयू ने फिट फॉर फिफ्टी फाइव योजना का एलान किया था। उसके मुताबिक ईयू क्षेत्र अपने कार्बन उत्सर्जन में 2030 तक 55 फीसदी की कटौती करेगा।

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ईयू की योजना में यह शामिल है कि 2035 के बाद इस क्षेत्र में डीजल और पेट्रोल की नई कारों पर रोक लग जाएगी। उधर विमानन और समुद्री परिवहन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन पर टैक्स में भारी बढ़ोतरी होगी। ईयू के उत्सर्जन ट्रेडिंग सिस्टम के तहत प्रदूषण का अधिकार खरीदने की प्रथा चरणबद्ध रूप से 2026 तक खत्म कर दी जाएगी।
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ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अब कई कंपनियां और व्यापारियों के संगठन इस योजना के खिलाफ लॉबिंग में नए संसाधन झोंकने की तैयारी कर रहे हैँ। इसे इस बात का संकेत माना गया है कि फिट फॉर फिफ्टी फाइव योजना को लागू करना यूरोपीय देशों के लिए आसान नहीं होगा। उत्सर्जन रोकने के सख्त लक्ष्य लागू करने की योजना से सबसे ज्यादा नाराज कार निर्माता कंपनियां हैं।
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स्पेन की मोटर इंडस्ट्री ने स्पेन सरकार से कहा है कि वह इस बारे में अपने रुख पर पुनर्विचार करे। जर्मनी के कार उत्पादकों के संगठन वीडीए ने कहा है कि ये पूरी योजना आविष्कार विरोधी है। इसमें ऐसे लक्ष्य रखे गए हैं जिन्हें हासिल करना असंभव है। विमानन कंपनियों के वैश्विक संगठन आईएटीए ने इस योजना को ईयू का ओन गोल (अपनी ही टीम के खिलाफ किया गया गोल) कहा है। उसने कहा है कि जेट ईंधन के महंगा होने से यूरोपीय विमानन कंपनियां प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगी। विमानन कंपनियों के यूरोपीय संगठन ए4ई ने कहा है कि यह विमान यात्रा को महंगा बनाने की योजना है।

सीमेंट, इस्पात, उर्वरक और अल्यूमिनियम निर्माता कंपनियों भी इस योजना पर विरोध जताया है। ईयू में होने वाले कुल कार्बन उत्सर्जन में इन कंपनियों का हिस्सा 45 फीसदी है। उधर यूरोप की धातु उत्पादक कंपनियों ने भी अपने लिए अधिक संरक्षण की मांग की है।

पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि यूरोप में नीति निर्माण में उद्योग और व्यापार के क्षेत्र की लॉबिंग की बड़ी भूमिका रहती है। अलग-अलग देशों में कारोबार जगत का सरकारों पर प्रभाव गुजरे दशकों में बढ़ा है। ऐसे में जलवायु रक्षा की उसकी योजना के लिए इन क्षेत्रों की चुनौती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कई देशों की सरकारें इस योजना को लागू करने को लेकर आशंकित हैं। उन्हें आशंका है कि फ्रांस के येलो वेस्ट जैसा आंदोलन उन देशों में भी हो सकता है। येलो वेस्ट आंदोलन की शुरुआत ईंधन की कीमत में बढ़ोतरी के बाद ट्रक कारोबार से जुड़े लोगों ने की थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा चर्चा डीजल और पेट्रोल कारों पर अगले 14 साल में रोक लगाने के प्रस्ताव की है। बताया जाता है कि इस प्रस्ताव को लेकर यूरोपीय आयोग में भी मतभेद थे। इसी संस्था ने ये प्रस्ताव तैयार किए हैं।

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