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मधुमेह से सावधान: गर्भवती से बच्चों में जन्मजात विकृति, दुनियाभर में तीन से चार लाख भ्रूणों में मां से होता है न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट

Wed, 15 Sep 2021 06:53 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Published by: देव कश्यप Updated Wed, 15 Sep 2021 06:53 AM IST
सार

शोध में पता चला है कि न्यूरल टिशु में गड़बड़ी के कारण भ्रूण का विकास प्रभावित होता है। कई मामलों में भ्रूण का विकास पर्याप्त कोशिकाओं और बिना न्यूरल ट्यूब की संरचना के बने ही समय से पहले रूक जाता है। इस कारण जन्म के बाद बच्चों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ देखने को मिलती है।

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Pregnant lady diabetic then congenital malformations in children
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मां को गर्भावस्था के दौरान मधुमेह है, तो बच्चों को जन्मजात तकलीफ हो सकती है। साइंस एडवांसेस जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन और दूसरी दवाएं देने के बाद भी भ्रूण को नुकसान हो सकता है जो बच्चे के लिए आजीवन तकलीफ का कारण हो सकता है। अमेरिका में मां बनने की स्थिति वाली 30 लाख जबकि दुनियाभर में छह करोड़ महिलाओं को मधुमेह है।

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वैज्ञानिकों का कहना है, दुनिया में हर साल तीन से चार लाख भ्रूणों में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट मां से होता है। इसमें जब उत्तक मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी का सृजन कर रहे होते हैं, तब वे इस गड़बड़ी के कारण पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। इससे गर्भपात भी हो जाता है। जो बच्चे जन्म ले लेते हैं, वे आजीवन स्वास्थ्य से जूझते हैं। 
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कोशिकाओं की संरचना अधूरी
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों का कहना है कि शोध में पता चला है कि न्यूरल टिशु में गड़बड़ी के कारण भ्रूण का विकास प्रभावित होता है। कई मामलों में भ्रूण का विकास पर्याप्त कोशिकाओं और बिना न्यूरल ट्यूब की संरचना के बने ही समय से पहले रूक जाता है। इस कारण जन्म के बाद बच्चों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ देखने को मिलती है।
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आधुनिकता के साथ बदली बीमारी
प्रमुख शोधकर्ता डॉ. पेक्सिन यांग का कहना है, मधुमेह आमतौर पर बुढ़ापे की बीमारी है। अब आधुनिक होती जा रही दुनिया ने रोग का पैमाना बदल लिया है। इसका प्रमुख कारण मोटापा, खानपान में गड़बड़ी के साथ और शारीरिक व्यायाम का दिनचर्या से हट जाना है। गर्भावस्था के दौरान मधुमेह के मामले बढ़ने से नई पीढ़ी के लिए भी खतरा बढ़ गया है।


इस समस्या का निदान संभव
वैज्ञानिकों का कहना है, चूहों पर अध्ययन के बाद पाया कि मधुमेह के कारण बच्चों में जन्मजात तकलीफ को रोका जा सकता है। गर्भपात के खतरे को भी कम किया जा सकता है। इसके लिए कुछ इस तरह की दवाएं तैयार करनी होंगी, जो कोशिकाओं को सामान्य ढंग से काम करने के लिए तैयार करें। इससे न्यूरल ट्यूब का विकास बेहतर होगा, जिससे स्वस्थ शिशु का जन्म होगा।

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