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ओली और प्रचंड के बीच सहमति बनने के आसार, लगातार बैठकों का सिलसिला जारी

Tue, 07 Jul 2020 07:48 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 07 Jul 2020 07:48 PM IST
सार

  • सभी नेताओं की प्राथमिकता पार्टी को टूटने से बचाना, सीजफायर की कोशिशें तेज
  • दोनों नेताओं के बीच प्रस्तावित समझौते के बाद ही होगी स्थाई समिति की बैठक
  • पार्टी नेताओं ने कहा, गुपचुप समझौता मंजूर नहीं, स्थाई समिति लगाएगी मुहर

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PM kp sharma oli and pushpa kamal dahal prachand likely to reach on common agreement
KP sharma OLI and Pushp Kamal Dahal - फोटो : File Photo

विस्तार

पिछले कई महीनों से चल रहे सत्ता संघर्ष और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हटाने की मुहिम अब कमजोर पड़ती नजर आ रही है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों अध्यक्ष ओली और पुष्प कमल दहल प्रचंड समझौते का रास्ता तलाशने में लगे हैं।

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दोनों नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है और माना जा रहा है कि दोनों नेता इस बात के लिए राजी हो गए हैं कि एक-दूसरे के खिलाफ बोलना बंद करें, खुलेआम विरोध करना बंद हो और दोनों खेमों में ‘सीजफायर’ हो जाए।

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पिछले कई दिनों से ओली और प्रचंड समर्थक खुलेआम एक-दूसरे के खिलाफ बोल रहे हैं और इससे सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी कम्युनिस्ट पार्टी के टूटने का संकट मंडराने लगा है।
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इसे देखते हुए दोनों शीर्ष नेताओं में इस बात को लेकर सहमति बन गई है कि कम से कम पार्टी के बाहर और यहां तक कि भीतर के कायकर्ताओं के बीच ऐसा कोई संदेश न जाए जिससे उनका मनोबल टूटे।

पार्टी की स्थाई समिति की बैठक लगातार टल रही है और इसे फिर बुधवार तक के लिए टाल दिया गया है। इसके पीछे वजह यही बताई जा रही है कि पार्टी की बैठक से पहले दोनों अध्यक्षों के बीच के मतभेद कुछ समय के लिए खत्म करवाए जाएं।

इसलिए प्रचंड और ओली की लगातार कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं।

पार्टी की स्थाई समिति के एक सदस्य हरिबोल गजुरेल ने काठमांडू पोस्ट से बातचीत में बताया कि दोनों नेताओं के बीच गंभीर बातचीत जरूर चल रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है।

उनकी कोशिश है कि मौजूदा तनाव को पहले कम किया जाए, आपसी मतभेदों को समझते हुए उसे दूर करने की कोशिश की जाए और मौजूदा वक्त में सत्ता को लेकर चल रही खींचतान को फिलहाल के लिए स्थगित किया जाए।

पिछले कुछ दिनों से हो रही बातचीत में ओली इस बात के लिए राजी हो गए हैं कि अपने समर्थकों को प्रचंड विरोधी मुहिम चलाने से रोकें। स्थाई समिति के एक और नेता रघुजी पंत बताते हैं कि सोमवार को हुई बैठक के दौरान प्रचंड ने ओली से कोई फार्मूला मांगा है।

रघुजी पंत माधव नेपाल के करीबी नेता हैं और कहते हैं कि इस बार पार्टी इन दोनों शीर्ष नेताओं के बीच किसी गुपचुप समझौते को मंजूर नहीं करेगी और जो भी फार्मूला तय किया जाएगा, उसे बाकायदा स्थाई समिति की बैठक के सामने रखना होगा।

इसलिए बैठक को बार बार टाला जा रहा है ताकि दोनों नेता पूरा वक्त ले सकें, सोच समझ कर बीच का रास्ता निकालें और आने वाले वक्त में पार्टी की छवि न खराब हो।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार दोनों नेताओं ने तय किया है कि वो आपस में बात करेंगे और किसी तीसरे को इस बातचीत में शामिल नहीं करेंगे। उन्हें लग रहा है कि उन दोनों में उतनी समस्या नहीं है जितनी उनके समर्थकों के दबाव के बाद पैदा हो जाती है।

प्रचंड और ओली के बीच बातचीत का सिलसिला शुक्रवार से लगातार जारी है। बजट सत्र अचानक खत्म कर देने के बाद से दोनों ही नेता अपने अपने समर्थकों के साथ राष्ट्रपति बिद्यादेवी भंडारी से मिल चुके हैं।

ओली ने भंडारी को बताया कि प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे की मांग को छोड़कर वह प्रचंड और विरोधी गुट से हर मुद्दे पर बातचीत और विचार विमर्श को तैयार हैं।

ऐसे वक्त में सभी पार्टी नेताओं की कोशिश ये है कि पार्टी में किसी तरह की दरार न आए, यह टूटने से बच जाए और आपसी अंतर्विरोधों को भुलाकर एकीकरण के वक्त जो समझौते हुए थे उनका ईमानदारी से पालन किया जाए।


इसके तहत दोनों नेताओं को ढाई ढाई साल के लिए बराबर से सरकार चलाने की बात कही गई थी। अब सभी की निगाह दोनों नेताओं के बीच निर्णायक बातचीत और मौजूदा संकट को टालने के लिए की गई कोशिशों पर टिकी है। 

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