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Hindi News ›   World ›   Piyush Goyal Warns EU Over Carbon Tax on Steel, Sets €310 Billion India-Germany Trade Target

गोयल की दो टूक: स्टील पर कार्बन कर लगाकर आफत बुला रहा यूरोप, जर्मनी को 310 अरब यूरो कारोबार का दिया न्योता

Fri, 23 Oct 2026 03:43 AM IST
Rajkishor राजकिशोर
Updated Fri, 23 Oct 2026 03:43 AM IST
सार

पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ के कार्बन टैक्स और स्टील पर आयात शुल्क को लेकर चिंता जताई है। साथ ही भारत-जर्मनी व्यापार को 310 अरब यूरो तक पहुंचाने का प्रस्ताव रखा।

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Piyush Goyal Warns EU Over Carbon Tax on Steel, Sets €310 Billion India-Germany Trade Target
जर्मनी की ऊर्जा मंत्री कैथरीना राइशे के साथ पीयूष गोयल। - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

स्टील पर कार्बन कर और 50 फीसदी आयात शुल्क लगाकर यूरोपीय संघ खुद आफत को न्योता दे रहा है। इससे वहां रहन-सहन महंगा होगा और उद्योग दुनिया के बाजार में टिक नहीं पाएंगे। यह दो टूक चेतावनी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में दी। उन्होंने कहा कि जिन खुली सीमाओं के दम पर यूरोप विकसित बना, अब वही नियमों और पाबंदियों का अंबार लगाकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा। 

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गोयल ने कहा कि यूरोपीय संघ ने कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था यानी सीबीएएम खुद पर थोप ली है और स्टील लाने पर 50 फीसदी शुल्क लगा दिया है। कुछ क्षेत्रों को बचाने के लिए कई बार बेतुके मानक लाए जा रहे हैं, जिनसे उद्योग पर बोझ बढ़ता है और दूसरों के लिए गैर शुल्क बाधाएं खड़ी होती हैं।
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आप एक नियम लाएंगे, वे दो लाएंगे 
गोयल ने आगाह किया कि अब दुनिया जैसे को तैसा वाली है, और यह बात उनसे कहीं बड़े नेता भी कह रहे हैं। अगर कोई नियम बनाकर किसी देश को अपने साथ कारोबार से रोकेगा, तो वह देश दो नियम लाकर जवाब देगा। नतीजा यह होगा कि यूरोप में महंगाई बढ़ेगी और कारोबार की प्रतिस्पर्धा घटेगी। भारत का पक्ष रखते हुए गोयल ने कहा कि दुनिया की 17 फीसदी आबादी वाला भारत वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में सिर्फ तीन से साढ़े तीन फीसदी का हिस्सेदार है।
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गोयल ने कहा, भारत सभी साझेदारों के साथ निष्पक्ष और संतुलित समझौते कर रहा है और सिंगापुर जैसे देशों से कारोबार करेगा, जहां ऐसी पाबंदियां नहीं हैं। भारत कई बार इन नियमों पर आपत्ति जता चुका है। अनुमान है कि कार्बन कर से यूरोप जाने वाले भारतीय स्टील, एल्युमिनियम और सीमेंट पर 20 से 35 फीसदी तक का बोझ पड़ सकता है। वन कटाई वाले नियम से रबड़ जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों पर भी कड़ी शर्तें लागू होती हैं।

31 के आगे एक शून्य
नसीहत के साथ गोयल ने दोस्ती का बड़ा गणित भी रखा। भारत-जर्मनी कारोबारी मंच पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के 31 अरब यूरो के व्यापार के आगे एक शून्य जोड़ दिया जाए तो यह 310 अरब यूरो हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की समयसीमा उद्योग तय करें। इस दौरन ऊर्जा मंत्री कैथरीना राइशे ने भी अफसरशाही के बोझ की बात मानी। उन्होंने कहा कि रिश्ते को रफ्तार देनी है तो दोनों देशों को अपने यहां लालफीताशाही खत्म करनी होगी। दोनों तरफ से संयुक्त उपक्रमों पर ज्यादा जोर देना होगा, मुक्त व्यापार समझौता रिश्तों की मजबूत नींव बनेगा और जर्मनी भारतीय उद्यमियों का स्वागत करता है।


20 साल का इंतजार 13 महीने की रफ्तार
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर राइशे ने चुटकी ली कि समझौते तक पहुंचने में करीब 20 साल लग गए, पर अब इंतजार खत्म हुआ। गोयल ने मुस्कुराते हुए कहा कि बातचीत भले 20 साल चली, असली काम पिछले 13 महीनों में हुआ। गोयल ने बताया कि 27 जनवरी को समझौता पूरा होने की घोषणा हुई और यूरोपीय संघ के सभी 27 देशों ने एकमत से समर्थन दिया। इसी साल हस्ताक्षर और अगले चार-पांच महीने में इसके लागू होने की उम्मीद है।

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