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Hindi News ›   World ›   Pashupatinath Temple Nepal No permission to anyone for replica in India

Pashupatinath: 'भारत में मंदिर की प्रतिकृति बनाने की अनुमति नहीं'; नेपाल ने महादेव के मंदिर को लेकर कही यह बात

Sat, 25 Nov 2023 08:40 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 25 Nov 2023 08:40 PM IST
सार

नेपाल के पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट के अधिकारियों ने साफ किया है कि पशुपतिनाथ मंदिर की प्रतिकृति बनाने की अनुमति नहीं है। अधिकारियों ने कहा, भारत में विश्व प्रसिद्ध महादेव मंदिर- पशुपतिनाथ की प्रतिकृति बनाने की किसी को अनुमति नहीं दी गई है।

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Pashupatinath Temple Nepal No permission to anyone for replica in India
पशुपतिनाथ मंदिर, नेपाल - फोटो : Facebook/Worldwide Hindu Temples ॐ

विस्तार

भारत में पशुपतिनाथ मंदिर की प्रतिकृति बनाने की किसी को अनुमति नहीं है। नेपाल के पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट (पीएडीटी) के अधिकारियों ने शनिवार को कहा, सदियों पुराना यह मंदिर हिंदू भगवान शिव को समर्पित है, जो जानवरों के रक्षक पशुपति के अवतार में हैं।
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पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट (पीएडीटी) का बयान कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आया है। इन खबरों में कहा गया है कि काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर की प्रतिकृति का निर्माण उत्तराखंड के एक गांव में किया जा रहा है। पीएडीटी के कार्यकारी निदेशक डॉ. घनश्याम खातीवाड़ा ने कहा, "इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है कि पशुपतिनाथ मंदिर भारत के उत्तराखंड में बनाया जा रहा है।"
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ट्रस्ट का ध्यान इस झूठी खबर पर है। पशुपतिनाथ की प्रतिकृति पर समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक खातीवाड़ा ने कहा, ''हम मीडिया के एक वर्ग में छपी ऐसी झूठी खबर पर आपत्ति जताते हैं।'' बता दें कि पशुपतिनाथ काठमांडू के पूर्वी बाहरी इलाके में पवित्र बागमती नदी के तट पर है। इसे नेपाल का सबसे प्रतिष्ठित हिंदू मंदिर माना जाता है। दुनियाभर के लाखों हिंदू तीर्थयात्रियों की आस्था का यह केंद्र प्रमुख पर्यटन स्थल भी है।
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पीएडीटी ने एक बयान में कहा, "पशुपति सभी हिंदुओं के लिए आस्था का केंद्र है। मीडिया में प्रकाशित झूठी खबर के कारण पशुपति दर्शन में गहरी आस्था रखने वाले पूरे हिंदू समुदाय को झटका लगा है।" ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि भारत या किसी दूसरी जगह पर पशुपतिनाथ मंदिर की प्रतिकृति बनाने के लिए किसी अनुमोदन का "फैसला नहीं लिया गया है।"
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