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पंडोरा पेपर्स: अपने देश को गरीब बना कर बाहर धन ले जाने की तिकड़मों का खुलासा

Mon, 04 Oct 2021 06:34 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 04 Oct 2021 06:34 PM IST
सार

पंडोरा पेपर्स में ऐसे 14 फाइनेंशियल सर्विस प्रदाताओं का जिक्र है, जो इस तरह की सेवा दे रहे हैं। ये सर्विस प्रोवाइडर बेलिजे, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, सिंगापुर, साइप्रस और स्विट्जरलैंड में गोपनीय ट्रस्ट या फर्जी कंपनी बनवाने की सेवाएं देते हैं। पहले इन जगहों को ऑफशोर सेंटर कहा जाता था...

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Pandora papers: Some wealthy people declared themselves bankrupt in the country, and secretly carried their wealth to an offshore tax heavens
पंडोरा पेपर्स - फोटो : Agency

विस्तार

वाशिंगटन स्थित इंटरनेशनल कॉन्जर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जनर्लिस्ट्स (आईसीआईजे) ने पंडोरा पेपर्स नाम से धनी-मानी लोगों के टैक्स चोरी के बारे में अपनी तीसरी खोजी रिपोर्ट जारी की है। इसके पहले उसने पनामा पेपर्स और पैराडाइज पेपर्स नाम से अपनी रिपोर्टें जारी की थीं। पंडोरा पेपर्स के तहत दी गई जानकारियां एक करोड़ 19 लाख दस्तावेजों के अध्ययन पर आधारित हैं।

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इन पेपर्स में दुनिया भर के राजनेताओं, उद्योगपतियों, कलाकारों और खिलाड़ियों की करतूतों के सबूत हैं। इनसे सामने आया है कि ये रसूखदार लोग कैसे अपनी संपत्ति अपने देश की सरकारों से छिपा लेते हैं और टैक्स के रूप में देश के लिए उनकी जो वैध देनदारी बनती थी, उसे चुरा लेते हैं। इससे यह भी साफ हुआ है कि पनामा और पैराडाइज पेपर्स में जिन लोगों के नाम आए, उनमें से कई ने टैक्स चुराने के नए तरीके अपना लिए।
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इस सिलसिले में सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि ऑफशोर सिस्टम क्या है। यह एक वित्तीय सिस्टम है, जो पूरी तरह गोपनीय होता है। इससे लोगों और कंपनियों को अपनी जायदाद सरकारी अधिकारियों, कर्जदाताओं और अपने देश की जनता से छिपाने की सुविधा मिलती है। ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कुछ धनी लोगों ने देश में खुद को दिवालिया बता दिया, जबकि अपनी संपत्ति चोरी-छिपे उन्होंने किसी ऑफशोर सेंटर पर पहुंचा दी।
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धनी लोगों ने इस तरीके से अपने याच (विलासिता पूर्ण जहाज), विमान, कलाकृतियां, महल, नकदी और कंपनियों में अपने शेयरों को छिपाया है। इसके लिए अक्सर वित्तीय सेवा देता कंपनियों से ये लोग किसी टैक्स हैवेन में फर्जी कंपनी या ट्रस्ट बनवाते हैं। फिर अपनी संपत्ति उसे ट्रांसफर कर देते हैं। इस पूरे सिस्टम को ऑफशोर फाइनेंस कहा जाता है। इसे ऐसा नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि अक्सर ये धन उन द्वीपों या देशों में ले जाया जाता है, जिनका आकार छोटा है और वहां की आबादी बहुत कम है।

पंडोरा पेपर्स में ऐसे 14 फाइनेंशियल सर्विस प्रदाताओं का जिक्र है, जो इस तरह की सेवा दे रहे हैं। ये सर्विस प्रोवाइडर बेलिजे, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, सिंगापुर, साइप्रस और स्विट्जरलैंड में गोपनीय ट्रस्ट या फर्जी कंपनी बनवाने की सेवाएं देते हैं। पहले इन जगहों को ऑफशोर सेंटर कहा जाता था। अब अमेरिका के साउथ डकोटा, डेलावेयर और दो अन्य राज्यों में भी ऐसी सेवा उपलब्ध हो गई है। जहां इस तरह के ट्रस्ट या कंपनियों को रजिस्टर करवाने की सुविधा है, उन्हें ऑफशोर सेंटर या टैक्स हैवेन कहा जाता है।

पंडोरा पेपर्स के मुताबिक ऑफशोर सेंटरों पर गोपनीय ट्रस्ट या कंपनी बनाना वहां के कानून के अनुरूप होता है। इसके बावजूद कई लोगों और कंपनियों ने जिस तरह से ऑफशोर सेवाओं का उपयोग किया है, वह कानूनी नहीं है। वैसे जिन देशों से धन लाया जाता है, वहां के कानून की आंख में धूल झोंकते हुए ही ऐसा किया जाता है।

जिन अखबारों ने पंडोरा पेपर्स से जुड़ी रिपोर्टों को छापा है, उनमें अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट भी है। पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन देशों में कमाया जाता है और जिनका उस पर वैध अधिकार है, ऑफशोर सिस्टम के कारण उससे वे देश वंचित हो जाते हैं। इससे उन देशों में गरीबी और गैर-बराबरी बढ़ती है। पंडोरा पेपर्स से जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें 130 से ज्यादा ऐसे हैं, जो फॉर्ब्स मैग्जीन की अरबपतियों की सूची में शामिल हैं।

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