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अमेरिका की खरी-खरी: अफगानिस्तान में पाकिस्तान चल रहा दोहरी चाल, भारत के साथ संबंध और करने होंगे मजबूत

Tue, 14 Sep 2021 10:00 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Tue, 14 Sep 2021 10:00 AM IST
सार

पाकिस्तान दोहरी चाल चल रहा है। वह अमेरिका के आतंक विरोधी अभियान में साथ भी दे रहा है दूसरी ओर ऐसे तालिबान को लंबे समय से पाल रहा है, जिसमें कई खूंखार आतंकी शामिल हैं। ऐसे में अब अमेरिका आने वाले दिनों में पाकिस्तान के रुख की समीक्षा कर कोई फैसला लेगा। 
 

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Pakistans double move Maintaining Taliban and running antiterrorist campaign America will think again about relations
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन - फोटो : ANI

विस्तार

पाकिस्तान और तालिबान के बीच गहरी होती दोस्ती अब कई देशों को अखरने लगी है। इसलिए अब अमेरिका ने फैसला किया है कि वह पाकिस्तान को लेकर अपने रिश्तों की समीक्षा करेगा और भविष्य में कैसे रिश्ते पाकिस्तान के साथ रखने हैं यह तय करेगा। 

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विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने साफ किया कि तालिबान के साथ पाकिस्तान का जुड़ाव एक रणनीतिक चाल है। इसलिए अमेरिका पिछले 20 सालों में पाकिस्तान की भूमिका की समीक्षा करने के बाद ही कोई फैसला लेगा। 
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भारत की मौजूदगी से पाकिस्तान को हुआ नुकसान 
ब्लिंकन ने अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी की सराहना की। उन्होंने सदन में विदेशी मामलों की समिति को जवाब देते हुए कहा कि अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी से पाकिस्तान को नुकसान हुआ है और खतरनाक गतिविधियों पर असर पड़ा है। रिपब्लिकन कांग्रेस सदस्य मार्क ग्रीन ने कहा कि आईएसआई जिस तरह से तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को खुलेआम समर्थन दे रहा है, ऐसे में भारत के साथ मजबूत संबंधों पर विचार करना चाहिए।
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हक्कानी नेटवर्क के साथ पाकिस्तान का गठबंधन 
संसद की विदेश मामलों की समिति में कांग्रेसी सांसद बिल कीटिंग ने कहा कि तालिबान को दोबारा से खड़ा करने में पाकिस्तान 2010 से मदद कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी सैनिकों की मौत में जिस हक्कानी नेटवर्क का हाथ था, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और इसी हक्कानी नेटवर्क के बीच गठबंधन है।

पाकिस्तान की भूमिका तय करेगी रिश्ते 
ब्लिंकन ने सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हम पाकिस्तान को बेहतर भूमिका निभाते हुए देखना चाहते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में उसकी भूमिका क्या होगी यह हमारे और इस्लामाबाद के रिश्ते को तय करेगा। उन्होंने कहा कि इस समय पाकिस्तान एक रणनीतिक चाल चल रहा है। एक तरफ वह तालिबान को पाल रहा है तो दूसरी और आतंकी गतिविधियों के खिलाफ हमारे अभियानों में साथ भी दे रहा है। 

सेना वापसी सही थी, वहां और दिन रहने से कुछ नहीं होता 
अफगानिस्तान से जल्द सेना वापसी के सवाल पर ब्लिंकन ने कहा कि वहां पर कुछ और साल रहने से कुछ नहीं बदलने वाला था। हमने वहां पर करोड़ों निवेश किया है, जब इससे वहां की सेना और सरकार आत्मनिर्भर नहीं हुए तो आने वाले सालों में भी कुछ नहीं होता।


बीते कुछ महीनों से भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू के नेतृत्व में अमेरिकी कांग्रेस के प्रमुख सदस्यों एवं सीनेटरों से गहन संपर्क बनाया जा रहा है। कांग्रेस सदस्य स्कॉट पैरी ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिकी करदाताओं के पैसे से हक्कानी नेटवर्क और तालिबान का समर्थन करता है और अमेरिका को उसे अब और पैसा नहीं देना चाहिए तथा गैर नाटो सहयोगी का दर्जा भी उससे छीन लेना चाहिए।

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