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वोटरों के अविश्वास के बीच शुरू होगा पाकिस्तान में मतदान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 24 Jul 2018 07:28 PM IST
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पाक में सोमवार शाम से चुनाव प्रचार थम चुका है। लेकिन आमतौर पर कार्यवाहक सरकार बनने के बाद से शुरू होने वाला पुरजोर चुनाव प्रचार इस बार फीका दिखाई दिया। इसकी सबसे बड़ी वजह है देश में राजनीतिक भरोसे की कमी का होना। वह चाहे नवाज शरीफ के परिवार का भ्रष्टाचार में लिप्त होना रहा हो या पाक सेना का इमरान खान को दिया जा रहा समर्थन हो।
पाक चुनावों में इस बार हाफिज सईद जैसे ताकतवर लोग भी मैदान में हैं जबकि बेनजीर के बेटे बिलावल अब तक लोगों का भरोसा नहीं जीत पाए हैं। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इन्हीं कारणों से इस बार पोस्टर युद्ध और तीखी बयानबाजी तो खूब चली लेकिन मतदाताओं में उत्साह नहीं के बराबर देखा गया। जियो न्यूज के पत्रकार तलत हुसैन ने कहा कि देश के मतदाताओं को अपने मताधिकार की ताकत पर भरोसा नहीं रहा है। डेरा इस्माइल खान, खैबर पख्तूनख्वा, रावलपिंडी, टंडो अल्लाह यार के मतदाता चुनाव परिणामों को लेकर भी बहुत उत्साह में नहीं है।
बलूचिस्तान और पंजाब के आंचलिक इलाकों में मतदाताओं के बीच यह संदेश गया है कि इस बार के चुनाव प्रचार में कुछ पार्टियों को दबाया गया है जबकि कुछ को बेवजह उभारा जा रहा है। मशहूर उर्दू अखबार दुनिया के मुताबिक कराची, क्वेटा, झंग और चमन गया में चुनावी सरगर्मी चुनाव प्रचार बंद होने के दिन तक दिखाई नहीं दी। समा टीवी ने देश के विभिन्न हिस्सों और पंजाब के चुनाव प्रचार पर विशेष कार्यक्रम में बताया कि इस बार चुनावी उम्मीद की बुनियाद में उम्मीद गायब दिखाई दी है।
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पाक चुनावों में इस बार हाफिज सईद जैसे ताकतवर लोग भी मैदान में हैं जबकि बेनजीर के बेटे बिलावल अब तक लोगों का भरोसा नहीं जीत पाए हैं। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इन्हीं कारणों से इस बार पोस्टर युद्ध और तीखी बयानबाजी तो खूब चली लेकिन मतदाताओं में उत्साह नहीं के बराबर देखा गया। जियो न्यूज के पत्रकार तलत हुसैन ने कहा कि देश के मतदाताओं को अपने मताधिकार की ताकत पर भरोसा नहीं रहा है। डेरा इस्माइल खान, खैबर पख्तूनख्वा, रावलपिंडी, टंडो अल्लाह यार के मतदाता चुनाव परिणामों को लेकर भी बहुत उत्साह में नहीं है।
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बलूचिस्तान और पंजाब के आंचलिक इलाकों में मतदाताओं के बीच यह संदेश गया है कि इस बार के चुनाव प्रचार में कुछ पार्टियों को दबाया गया है जबकि कुछ को बेवजह उभारा जा रहा है। मशहूर उर्दू अखबार दुनिया के मुताबिक कराची, क्वेटा, झंग और चमन गया में चुनावी सरगर्मी चुनाव प्रचार बंद होने के दिन तक दिखाई नहीं दी। समा टीवी ने देश के विभिन्न हिस्सों और पंजाब के चुनाव प्रचार पर विशेष कार्यक्रम में बताया कि इस बार चुनावी उम्मीद की बुनियाद में उम्मीद गायब दिखाई दी है।
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