{"_id":"5a1d49e04f1c1b8e698be7e1","slug":"will-the-attacker-be-released-from-india-s-negligence","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"क्या भारत की 'लापरवाही' से रिहा हो जाएंगे हमलावर?","category":{"title":"Pakistan","title_hn":"पाकिस्तान","slug":"pakistan"}}
क्या भारत की 'लापरवाही' से रिहा हो जाएंगे हमलावर?
बीबीसी, हिन्दी
Updated Tue, 28 Nov 2017 05:04 PM IST
विज्ञापन
मुंबई हमला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान के आठ लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। इन आठों अभियुक्तों पर मुकदमा पाकिस्तान की अदालत में चल रहा है। इनके वकीलों का कहना है कि यह केस अब सुनवाई के आखिरी चरण में है। भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में साल 2008 में इसी महीने 26 नवंबर को 60 घंटे का एक हमला हुआ था।
इस हमले की नौवीं बरसी पर बचाव पक्ष के वकील रिजवान अब्बासी ने बीबीसी से कहा कि रावलपिंडी की अदियाला जेल में हर हफ्ते इस मामले की सुनवाई हो रही है। इसी जेल में सात अभियुक्त कैद हैं। रिजवान अब्बासी ने कहा, ''इस मामले में 72 गवाहों की गवाही ली गई है। जांचकर्ता अभी कुछ और गवाहों की गवाही चाहते हैं, लेकिन यह केस आखिरी चरण में है।'' इन सभी अभियुक्तों पर अदालत में 2009 में सुनवाई शुरू हुई थी, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच भरोसे की कमी के कारण यह सुनवाई लंबी खिंचती गई।
पढ़ें- 26/11 हमला: सुनवाई में पाक कोर्ट कर रही देरी, भारतीय गवाहों से करना चाहता पूछताछ
विज्ञापन
आखिर इस मुकदमे में इतनी अड़चनें क्यों आईं? अब्बासी इसके लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हैं। अब्बासी कहते हैं, ''शुरुआत में समय काफी बर्बाद हुआ। भारतीय अधिकारियों ने इसमें बिल्कुल सहयोग नहीं किया। पाकिस्तानी अधिकारियों को भारत सबूत जुटाने के लिए नहीं आने दिया गया। इसके बाद जांच के लिए एक आयोग का गठन किया गया पर भारत ने सबूतों की जांच नहीं होने दी।''
अब पाकिस्तान ने भारत से 24 गवाहों को पाकिस्तान भेजने का आग्रह किया है ताकि उनके बयानों को रिकॉर्ड किया जा सके। बचाव पक्ष के वकील ने बीबीसी से कहा कि इस मामले भारत के अधिकारियों के पास कई पत्र भेजे गए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सरकार ने जांच को लेकर एक खास व्यक्ति की नियुक्ति की है ताकि मुकदमे का निपटारा जल्द किया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत इस मामले से जुड़े सारे अनुरोधों का जवाब नहीं दे रहा है। अब्बासी को अब लगता है कि भारत गवाहों को पाकिस्तान पूछताछ के लिए नहीं भेजेगा क्योंकि वो इसका निपटारा नहीं चाहता है। उन्होंने कहा कि भारत इस मामले को जिंदा रखना चाहता है ताकि पाकिस्तान के खिलाफ इसका राजनयिक इस्तेमाल किया जा सके।
विज्ञापन
इस हमले की नौवीं बरसी पर बचाव पक्ष के वकील रिजवान अब्बासी ने बीबीसी से कहा कि रावलपिंडी की अदियाला जेल में हर हफ्ते इस मामले की सुनवाई हो रही है। इसी जेल में सात अभियुक्त कैद हैं। रिजवान अब्बासी ने कहा, ''इस मामले में 72 गवाहों की गवाही ली गई है। जांचकर्ता अभी कुछ और गवाहों की गवाही चाहते हैं, लेकिन यह केस आखिरी चरण में है।'' इन सभी अभियुक्तों पर अदालत में 2009 में सुनवाई शुरू हुई थी, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच भरोसे की कमी के कारण यह सुनवाई लंबी खिंचती गई।
विज्ञापन
पढ़ें- 26/11 हमला: सुनवाई में पाक कोर्ट कर रही देरी, भारतीय गवाहों से करना चाहता पूछताछ
विज्ञापन
आखिर इस मुकदमे में इतनी अड़चनें क्यों आईं? अब्बासी इसके लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हैं। अब्बासी कहते हैं, ''शुरुआत में समय काफी बर्बाद हुआ। भारतीय अधिकारियों ने इसमें बिल्कुल सहयोग नहीं किया। पाकिस्तानी अधिकारियों को भारत सबूत जुटाने के लिए नहीं आने दिया गया। इसके बाद जांच के लिए एक आयोग का गठन किया गया पर भारत ने सबूतों की जांच नहीं होने दी।''
अब पाकिस्तान ने भारत से 24 गवाहों को पाकिस्तान भेजने का आग्रह किया है ताकि उनके बयानों को रिकॉर्ड किया जा सके। बचाव पक्ष के वकील ने बीबीसी से कहा कि इस मामले भारत के अधिकारियों के पास कई पत्र भेजे गए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सरकार ने जांच को लेकर एक खास व्यक्ति की नियुक्ति की है ताकि मुकदमे का निपटारा जल्द किया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत इस मामले से जुड़े सारे अनुरोधों का जवाब नहीं दे रहा है। अब्बासी को अब लगता है कि भारत गवाहों को पाकिस्तान पूछताछ के लिए नहीं भेजेगा क्योंकि वो इसका निपटारा नहीं चाहता है। उन्होंने कहा कि भारत इस मामले को जिंदा रखना चाहता है ताकि पाकिस्तान के खिलाफ इसका राजनयिक इस्तेमाल किया जा सके।
भारत ने नहीं किया सहयोग?
हाफिज सईद
मार्च 2012 में और फिर अक्टूबर 2013 में पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल सबूत जुटाने भारत गया था। पहला दौरा नाकाम रहा था और दूसरे दौरे में आठ सदस्यों वाले इस प्रतिनिधिमंडल को भारत में गवाहों से पूछताछ की अनुमति नहीं दी गई। इस प्रतिनिधिमंडल में वकील, जांचकर्ता और कोर्ट के अधिकारी शामिल थे। भारत ने इस मामले में किस तरह के सबूत मुहैया कराए हैं? इस पर अब्बासी कहते हैं कि सबूत के नाम पर कुछ नहीं दिया गया है बस आरोप और फाइलें हैं। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों का कोर्ट में कोई महत्व नहीं है। अब्बासी ने कहा कि इस मामले में ठोस सबूतों का अभाव है और इसे कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता है। हालांकि भारत इन दावों के हमेशा खारिज करता रहा है।
बचाव पक्ष की तरह दूसरे पक्ष के वकील की भी यही राय है। अभियोजक पक्ष के वकील अकरम कुरैशी ने कहा, ''इस मामले से अहम सबूत गायब है। भारत ने इस केस के अहम सबूतों को नहीं सौंपा है। उन्होंने कहा कि हथियार, गोलियां और सेल फोन को पाकिस्तान जांच के लिए नहीं भेजा गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत के लापरवाह रवैये के कारण केस में बहुत दम नहीं बचा है। मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के बाद से आठ जजों का तबादला क्यों किया गया? इस पर बचाव पक्ष के वकील रिजवान अब्बासी कहते हैं कि यह रूटीन तबादला है और इसमें कुछ भी खास नहीं है।
दूसरा सवाल यह है कि इस मामले में जकी-उर रहमान को मास्टरमाइंड कहा जा रहा है और उन्हें जमानत दे दी गई। आखिर जकीउर के साथ ऐसा क्यों किया गया? इस पर बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि बाकियों के लिए किसी ने जमानत की मांग नहीं की।
बचाव पक्ष की तरह दूसरे पक्ष के वकील की भी यही राय है। अभियोजक पक्ष के वकील अकरम कुरैशी ने कहा, ''इस मामले से अहम सबूत गायब है। भारत ने इस केस के अहम सबूतों को नहीं सौंपा है। उन्होंने कहा कि हथियार, गोलियां और सेल फोन को पाकिस्तान जांच के लिए नहीं भेजा गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत के लापरवाह रवैये के कारण केस में बहुत दम नहीं बचा है। मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के बाद से आठ जजों का तबादला क्यों किया गया? इस पर बचाव पक्ष के वकील रिजवान अब्बासी कहते हैं कि यह रूटीन तबादला है और इसमें कुछ भी खास नहीं है।
दूसरा सवाल यह है कि इस मामले में जकी-उर रहमान को मास्टरमाइंड कहा जा रहा है और उन्हें जमानत दे दी गई। आखिर जकीउर के साथ ऐसा क्यों किया गया? इस पर बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि बाकियों के लिए किसी ने जमानत की मांग नहीं की।
6 महीने के भीतर करना है निपटारा
अजमल कसाब
उन्होंने कहा, ''हाई कोर्ट का आदेश है इस केस को 6 महीने के भीतर निपटाया जाए। ऐसे में हमने फैसला किया है कि बाकी बचे अभियुक्तों को जमानत पर रिहा नहीं किया जाएगा। हमें उम्मीद है कि इस केस पर जल्द ही फैसला आएगा।''
उन्होंने कहा कि अगर इस मामले को भारत के असहयोग के कारण लंबे समय तक खींचा जाता है तो हमलोग सभी अभियुक्तों को जमानत के अनुरोध पर रिहा करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि यह उनका अधिकार है। रिजवान अब्बासी ने बीबीसी से कहा कि जकी उर रहमान लखवी पाकिस्तान में हैं और उन्हें अदालत में पेश होने से छूट सुरक्षा कारणों से दी गई है। रिजवान ने कहा कि उनके बदले उनका वकील कोर्ट में पेश होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि केस जिस मुकाम पर पहुंच गया है वहां से भारत के कहने पर फिर से जांच नहीं की जा सकती है। रिजवान ने कहा कि कोर्ट अब पीछे नहीं हटेगा और जारी सुनवाई को मुकाम तक पहुंचाएगा। भारत मुंबई हमले में हाफिज सईद को गिरफ्तार करने की मांग कर रहा है।
हाफिज सईद मामले में बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि अदालत ने उन्हें पहले ही आरोपों से मुक्त कर दिया है। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि हाफिज सईद के खिलाफ कोई सबूत नहीं है और मुबंई हमले में उनकी संलिप्तता को साबित नहीं किया जा सका।
उन्होंने कहा कि अगर इस मामले को भारत के असहयोग के कारण लंबे समय तक खींचा जाता है तो हमलोग सभी अभियुक्तों को जमानत के अनुरोध पर रिहा करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि यह उनका अधिकार है। रिजवान अब्बासी ने बीबीसी से कहा कि जकी उर रहमान लखवी पाकिस्तान में हैं और उन्हें अदालत में पेश होने से छूट सुरक्षा कारणों से दी गई है। रिजवान ने कहा कि उनके बदले उनका वकील कोर्ट में पेश होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि केस जिस मुकाम पर पहुंच गया है वहां से भारत के कहने पर फिर से जांच नहीं की जा सकती है। रिजवान ने कहा कि कोर्ट अब पीछे नहीं हटेगा और जारी सुनवाई को मुकाम तक पहुंचाएगा। भारत मुंबई हमले में हाफिज सईद को गिरफ्तार करने की मांग कर रहा है।
हाफिज सईद मामले में बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि अदालत ने उन्हें पहले ही आरोपों से मुक्त कर दिया है। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि हाफिज सईद के खिलाफ कोई सबूत नहीं है और मुबंई हमले में उनकी संलिप्तता को साबित नहीं किया जा सका।