'मोदी ने सुकून त्यागा, पर पाक अफ़सर सो रहे हैं'
अखबार पाकिस्तान सरकार से कहता है कि वो दुनिया को बताए भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय सेना किस तरह से दहशतगर्दी को अंजाम दे रही है। अखबार लिखता है कि पाकिस्तान से दुश्मनी में मोदी ने अपना चैन-सुकून भी त्याग दिया है, और इधर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सो रहे हैं। अखबार के अनुसार, मोदी के प्रोपेगेंडा को काउंटर करने के लिए कोई कोशिश नहीं की गई।
‘एक्सप्रेस’ लिखता है कि इस महीने होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पाकिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप के सबूत पेश करने चाहिए। अखबार आरोप लगाता है कि इसके साथ-साथ भारत प्रशासित ‘कश्मीर में जारी भारत के जुल्मों को भी बेनकाब करना चाहिए।‘
अखबार ने भारत पर कराची और बलूचिस्तान में खुले तौर पर दखलंदाजी करने का आरोप लगाते हुए लिखा है कि संयुक्त राष्ट्र को पता होना चाहिए कि इस क्षेत्र में असल में दहशतगर्दी कौन फैला रहा है। ‘जंग’ लिखता है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत को करारा जबाव दिया है।
भारत का नाम लिए बगैर हुकमरानों को आईना दिखाया
‘औसाफ’ ने दशहतगर्दी से निपटने के सिलसिले में दिए गए पाकिस्तानी गृह मंत्री चौधरी निसार अली के बयान पर संपादकीय लिखा है। चौधरी निसार ने कहा था कि पाकिस्तानी सेना की तारीफ जरूरी करनी चाहिए, लेकिन पुलिस की कुर्बानियों को भी नहीं भूलना चाहिए।
अखबार लिखता है कि पाकिस्तान में एक दशक से दहशतगर्दी की यलगार ने देश को जबरदस्त जान-माल का नुकसान पहुंचाया है जबकि पाकिस्तानी सेना और कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने दहशतगर्दी के खिलाफ बीस हजार से ज्यादा ऑपरेशन किए हैं।
दहशतगर्दी में 56 फीसदी की कमी आई
अखबार लिखता है कि इन्हीं अभियानों का नतीजा है कि दहशतगर्दी में 56 फीसदी की कमी आई है और उसकी तीव्रता कम हुई है। वहीं ‘दुनिया’ ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बयान पर संपादकीय लिखा है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान में विदेशी मुद्रा भंडार सबसे ऊंचे स्तर पर है और पैसा देश से जा नहीं रहा है बल्कि आ रहा है।
अखबार के मुताबिक शरीफ ने कराची स्टॉक एक्सचेंज में हुए एक कार्यक्रम में ये भी बताया कि पाकिस्तान को टैक्स से मिलने वाले राजस्व में भी 60 फीसदी का इजाफा हुआ है। अखबार लिखता है कि जब दूसरे देशों से भेजी जाने वाली रकम में कमी आई है तो फिर कैसे कहा जा सकता है कि पैसा पाकिस्तान आ रहा है?
अखबार को आशंका है कि कहीं ये भंडार विदेशी कर्जों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से लिए गए आर्थिक पैकेज की वजह से तो नहीं बढ रहा है। और बाद में पता चले कि देश पर बहुत अधिक कर्ज हो गया है। अखबार के मुताबिक उम्मीद है कि सच इससे उलट होगा और पाकिस्तान हकीकत में तरक्की की मंजिल की तरफ बढेगा।