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उर्दू प्रेस रिव्यू: पैगम्बर मोहम्मद पर हुई 'गलती' से भड़की हिंसा
बीबीसी हिंदी
Updated Mon, 27 Nov 2017 06:21 PM IST
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हाफिज सईद
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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अखबारों में इस हफ्ते राजधानी इस्लामाबाद में धार्मिक गुटों का धरना प्रदर्शन, हाफिज सईद की रिहाई से जुड़ी खबरें सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। सबसे पहले बात करते हैं राजधानी इस्लामाबाद में पाकिस्तान के धार्मिक गुटों के धरना प्रदर्शन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की। अखबार जंग ने सुर्खी लगाई है, ''इस्लामाबाद में हालात तनावपूर्ण, सेना तलब।''
अखबार 'दुनिया' लिखता है कि सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री से फोन पर बातचीत की। अखबार के अनुसार सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री से फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि दोनों तरफ से हिंसक वारदातें राष्ट्र हित में नहीं हैं और शांतिपूर्ण तरीक़े से समस्या का समाधान किया जाए।
'रोजनामा एक्सप्रेस' ने लिखा है, ''धरने के खिलाफ ऑपरेशन में सात लोगों की मौत, सैकड़ों जख्मी, मंत्रियों के घर पर हमले, सेना तलब।'' 'रोजनामा खबरें' ने लिखा है, ''धरने वालों पर पुलिस का धावा, शहर-शहर हंगामे।'' पिछले 20 दिनों से जारी धरना प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीक़े से खत्म कराने के तमाम प्रयासों के विफल होने के बाद आखिरकार सरकार ने शनिवार को बल प्रयोग करने का आदेश दे दिया।
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पढ़ें- पीओके में हाफिज सईद की रैली, बोला- 'हम और बुरहान लाएंगे'
पाकिस्तान के कई धार्मिक संगठनों के लगभग 3,000 लोग इस्लामाबाद में पिछले 20 दिनों से धरने पर बैठे हुए थे। तहरीक-ए-लब्बैक या तहरीक-ए-रसूलुल्लाह नाम का संगठन इसका नेतृत्व कर रहा था। उनकी मांग है कि चुनाव सुधार के लिए संसद में जो बिल पेश किया गया था उसमें कुछ ऐसी बातें कही गई थीं जो उनके अनुसार इस्लाम की बुनियादी मान्यताओं के विरुद्ध हैं।
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अखबार 'दुनिया' लिखता है कि सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री से फोन पर बातचीत की। अखबार के अनुसार सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री से फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि दोनों तरफ से हिंसक वारदातें राष्ट्र हित में नहीं हैं और शांतिपूर्ण तरीक़े से समस्या का समाधान किया जाए।
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'रोजनामा एक्सप्रेस' ने लिखा है, ''धरने के खिलाफ ऑपरेशन में सात लोगों की मौत, सैकड़ों जख्मी, मंत्रियों के घर पर हमले, सेना तलब।'' 'रोजनामा खबरें' ने लिखा है, ''धरने वालों पर पुलिस का धावा, शहर-शहर हंगामे।'' पिछले 20 दिनों से जारी धरना प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीक़े से खत्म कराने के तमाम प्रयासों के विफल होने के बाद आखिरकार सरकार ने शनिवार को बल प्रयोग करने का आदेश दे दिया।
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पाकिस्तान के कई धार्मिक संगठनों के लगभग 3,000 लोग इस्लामाबाद में पिछले 20 दिनों से धरने पर बैठे हुए थे। तहरीक-ए-लब्बैक या तहरीक-ए-रसूलुल्लाह नाम का संगठन इसका नेतृत्व कर रहा था। उनकी मांग है कि चुनाव सुधार के लिए संसद में जो बिल पेश किया गया था उसमें कुछ ऐसी बातें कही गई थीं जो उनके अनुसार इस्लाम की बुनियादी मान्यताओं के विरुद्ध हैं।
हाफिज सईद की रिहाई भी इस हफ्ते अखबारों की सुर्खियों में रही
हाफिज सईद
पाकिस्तानी कानून के अनुसार चुनाव में भाग लेने वाले किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को ये हलफनामा देना होता है कि पैगम्बर मोहम्मद इस्लाम के आखिरी पैगम्बर हैं और अब उनके बाद कोई दूसरा पैगम्बर नहीं आएगा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 'संशोधन के लिए पेश किए गए बिल में इस हलफनामे की शर्तों के साथ छेड़छाड़ की गई थी जिसे वो किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे।' सरकार ने इसे 'क्लैरिकल गलती' मानते हुए हलफनामे में सुधार कर दिया था, लेकिन प्रदर्शनकारी इसके लिए क़ानून मंत्री जाहिद हामिद को जिम्मेदार मान रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख और मुंबई में 2008 में हुए चरमपंथी हमलों के कथित मास्टरमाइंड हाफिज सईद की नजरबंदी खत्म हो गई है और वो एक बार फिर आजाद हैं। वो पिछले 10 महीनों से लाहौर स्थित अपने घर में नजरबंद थे। लेकिन बुधवार को लाहौर हाईकोर्ट के तीन सदस्यीय रिव्यू बोर्ड ने सरकारी वकील की दलील सुनने के बाद फैसला सुनाया था कि सरकार उनकी नजरबंदी को और आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सबूत देने में असफल रही है। रिव्यू बोर्ड के इस फ़ैसले के बाद हाफिज सईद की नजरबंदी खत्म हो गई और उन्होंने गुरुवार को मीडिया से बातचीत भी की। लेकिन अमरीका ने उनकी दोबारा गिरफ्तारी की मांग की है।
अखबार 'जंग' ने अमरीकी विदेश मंत्रालय के हवाले से लिखा है कि लश्कर-ए-तैयबा एक चरमपंथी संगठन है, उसके प्रमुख की रिहाई चिंता का विषय है। अखबार के अनुसार अमरीका ने मांग की है कि हाफिज सईद को पकड़कर उन्हें इंसाफ के कटघरे में लाया जाए। लश्कर-ए-तैयबा ने इसे पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है। अखबार 'दुनिया' के अनुसार लश्कर-ए-तैयबा के फ्रंट संगठन जमात-उद-दावा के प्रवक्ता यहया मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान की अदालतें स्वतंत्र हैं और उनके फैसलों पर चिंता जताना पाकिस्तान के अंदरुनी मामलों में दखल देना है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 'संशोधन के लिए पेश किए गए बिल में इस हलफनामे की शर्तों के साथ छेड़छाड़ की गई थी जिसे वो किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे।' सरकार ने इसे 'क्लैरिकल गलती' मानते हुए हलफनामे में सुधार कर दिया था, लेकिन प्रदर्शनकारी इसके लिए क़ानून मंत्री जाहिद हामिद को जिम्मेदार मान रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख और मुंबई में 2008 में हुए चरमपंथी हमलों के कथित मास्टरमाइंड हाफिज सईद की नजरबंदी खत्म हो गई है और वो एक बार फिर आजाद हैं। वो पिछले 10 महीनों से लाहौर स्थित अपने घर में नजरबंद थे। लेकिन बुधवार को लाहौर हाईकोर्ट के तीन सदस्यीय रिव्यू बोर्ड ने सरकारी वकील की दलील सुनने के बाद फैसला सुनाया था कि सरकार उनकी नजरबंदी को और आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सबूत देने में असफल रही है। रिव्यू बोर्ड के इस फ़ैसले के बाद हाफिज सईद की नजरबंदी खत्म हो गई और उन्होंने गुरुवार को मीडिया से बातचीत भी की। लेकिन अमरीका ने उनकी दोबारा गिरफ्तारी की मांग की है।
अखबार 'जंग' ने अमरीकी विदेश मंत्रालय के हवाले से लिखा है कि लश्कर-ए-तैयबा एक चरमपंथी संगठन है, उसके प्रमुख की रिहाई चिंता का विषय है। अखबार के अनुसार अमरीका ने मांग की है कि हाफिज सईद को पकड़कर उन्हें इंसाफ के कटघरे में लाया जाए। लश्कर-ए-तैयबा ने इसे पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है। अखबार 'दुनिया' के अनुसार लश्कर-ए-तैयबा के फ्रंट संगठन जमात-उद-दावा के प्रवक्ता यहया मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान की अदालतें स्वतंत्र हैं और उनके फैसलों पर चिंता जताना पाकिस्तान के अंदरुनी मामलों में दखल देना है।
सियासी सरगर्मी
हाफिज सईद
प्रवक्ता ने आगे कहा, ''हाफिज सईद शांति के पैरोकार और मानवसेवा के सबसे बड़े समर्थक हैं। उनका दहश्तगर्दी से कोई संबंध नहीं। उन्होंने तो मुंबई हमलों की निंदा भी की थी। अमरीका ने हाफिज सईद के खिलाफ सबूत जमा करने के लिए एक करोड़ ड़ॉलर की रक़म इनाम में देने की घोषणा की थी, लेकिन पांच साल से अमरीका को हाफिज सईद के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिल सका''
इसके अलावा सरकार और विरोधी पार्टियों के एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी सुर्खियों में बने रहे। विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान खान ने मुस्लिम लीग (नून) के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर जमकर हमला बोला। उन्होंने एक और विपक्षी पार्टी पीपीपी के को-चेयरमैन आसिफ अली जरदारी को भी नहीं बख्शा। रोजनामा एक्सप्रेस के अनुसार अपनी पार्टी की एक सभा को संबोधित करते हुए इमरान खान ने कहा कि नवाज शरीफ और जरदारी जैसे लोगों का सत्ता में आना पाकिस्तान की बदकिस्मती है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद उनकी पार्टी भ्रष्ट लोगों से एक-एक पाई वसूल करेगी।
अखबार 'नवा-ए-वक्त' ने भी इमरान खान की इस सभा को पहले पन्ने पर जगह दी है। अखबार के अनुसार इमरान खान ने नवाज शरीफ पर कड़ा हमला करते हुए कहा, ''नवाज शरीफ से मेरी तुलना करना वैसा ही है जैसे कि सुल्ताना डाकू से मेरी तुलना की जाए''
इसके अलावा सरकार और विरोधी पार्टियों के एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी सुर्खियों में बने रहे। विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान खान ने मुस्लिम लीग (नून) के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर जमकर हमला बोला। उन्होंने एक और विपक्षी पार्टी पीपीपी के को-चेयरमैन आसिफ अली जरदारी को भी नहीं बख्शा। रोजनामा एक्सप्रेस के अनुसार अपनी पार्टी की एक सभा को संबोधित करते हुए इमरान खान ने कहा कि नवाज शरीफ और जरदारी जैसे लोगों का सत्ता में आना पाकिस्तान की बदकिस्मती है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद उनकी पार्टी भ्रष्ट लोगों से एक-एक पाई वसूल करेगी।
अखबार 'नवा-ए-वक्त' ने भी इमरान खान की इस सभा को पहले पन्ने पर जगह दी है। अखबार के अनुसार इमरान खान ने नवाज शरीफ पर कड़ा हमला करते हुए कहा, ''नवाज शरीफ से मेरी तुलना करना वैसा ही है जैसे कि सुल्ताना डाकू से मेरी तुलना की जाए''