आतंकियों को पकड़ने के लिए पाकिस्तान आर्मी ने उड़ाईं घरों की छतें
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पाकिस्तान आर्मी आतंकियों को पकड़ने के लिए एक अनोखा प्रयोग कर रही है। आतंकियों पर ऊपर से नजर रखने के लिए उसने कई घरों की छतें उड़ा दीं हैं। पाकिस्तानी सेना ने वजीरिस्तान के कबायली इलाकों में मकानों की छतें उड़ाईं हैं।
कभी दक्षिणी वजीरिस्तान पाकिस्तानी तालिबान का सबसे मजबूत गढ़ था। मिलिट्री के मुताबिक, देश के इस पूरे हिस्से को आतंकियों के कब्जे से मुक्त करा लिया गया है। आतंकियों को भगाने के लिए जिन लोगों के घरों को खाली करवाया गया था अब उन हजारों बेघरों को फिर से बापस बुलाया जा रहा है।
यह जिला अफगानिस्तान के बॉर्डर से लगे पाकिस्तानी संघ शासित कबायली क्षेत्र (फाटा) के अंतर्गत आता है। पाकिस्तानी आर्मी के मुताबिक, इनमें से कुछ मकान बारिश और तूफान के चलते तबाह हुए हैं। हालांकि इनमें से ज्यादातर मकानों की छत आर्मी ने हटाई है, ताकि इनका बेहतर एरियल व्यू मिल सके।
पाकिस्तान आर्मी ने तहरीक-ए-तालिबान के खिलाफ राह-ए-निजात नाम से एक आपरेशन चला रखा है
मिलिट्री अफसर ने मीडिया के साथ माकीन, लाधा और कानिगुर्म की हेलिकॉप्टर ट्रिप के दौरान इसकी जानकारी दी। हैलीकाप्टर से साफ दिख रहा है कि कई घर बिना छत के हैं लेकिन ये साफ नहीं है कि इनमें से कितने मकान आर्मी ने गिराए हैं और कितने मौसम के कारण तबाह हुए हैं।
पाकिस्तानी आर्मी के मुताबिक 2009 में आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान का चीफ बैतुल्लाह मेहसूद था जिसने 72 हजार परिवारों को वहां से विस्थापित होने को मजबूर कर दिया था। पाकिस्तान आर्मी ने तहरीक-ए-तालिबान के खिलाफ राह-ए-निजात नाम से एक ऑपरेशन चला रखा है।
कर्नल मो. इमरान के मुताबिक सात साल बाद करीब 42 हजार परिवार वापस इन इलाकों में भेजे गए हैं। अन्य बचे हुए 30 हजार परिवारों को साल 2016 के अंत तक वापस भेज दिया जाएगा। पाकिस्तान अथॉरिटी ने इस एरिया में लोगों की सुविधा के लिए फिर से सड़कें, जल अपूर्ती, स्कूल व चिकित्सा सुविधाओं का निर्माण किया हैं।
इमरान का कहना है कि वे विस्थापितों की वापसी से पहले उनके लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन लोगों के निवास की व्यवस्था का प्रयाप्त रूप से न होना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
दक्षिण वजीरिस्तान में छतों को लकड़ी और लोहे से बनाया जाता है
परंपरागत रूप से दक्षिण वजीरिस्तान में छतों को लकड़ी और लोहे से बनाया जाता है ताकि सर्दियों में पड़ने वाली भयानक बर्फ से सुरक्षा की जा सके। लेकिन अब वहां सब खाक हो चुका है। हैलीकॉप्टर से तबाही का नजारा साफ देखा जा सकता है।
सरकार का कहना है कि वो प्रत्येक परिवार को 4 लाख रुपए देगी ताकि वो अपने-अपने घरों का पुनरनिर्माण करा सके। मकीन से विस्थापित 55 वर्षीय हाजी मोहम्मद का कहना है कि 4 लाख रुपए से तो एक कमरे का निर्माण कराना भी मुश्किल है तो पूरा घर कैसे बनेगा। मेरे घर में खासकर महिलाएं वापस घर जानें के लिए काफी उत्साहित हैं लेकिन यह संभव नहीं लगता है।
जब डेवेलपमेंट हेड इमरान से पूंछा गया कि क्या यह फंड घर निर्माण के लिए पर्याप्त है तो उन्हेंने इसका जबाव देने से इनकार कर दिया। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि 285 मिलियन डॉलर की जरूरत अकेले फाटा में पुनर्निर्माण के लिए चाहिए लेकिन सरकार ने अभी तक केवल 48 मिलियन डॉलर ही दिए हैं।
जिनमें 12 मिलियन विस्थापितों में बांटा जा चुका है। कनिगुम से 32 वर्षीय मोहम्मद असलम ने बताया है कि सुरक्षा व्यवस्था शांतिपूर्ण व नियंत्रित है। लेकिन उसके तीन मंजिला घर में केवल तीन कमरे ही बचे हैं।
ऊपर से अथॉरिटी ने शाम के 7 बजे से सुबह के 7 बजे तक कर्फ्यू लगा दिया है। हम बाजार भी नहीं जा सकते। अधिकारियों ने हमसे हमारे घर को छोंड़ने से मना कर रखा है।