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पाकिस्तान में धार्मिक आजादी पर रोक की वजह से भाग रहे हैं हजारों अल्पसंख्यक

Wed, 17 Jan 2018 04:55 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 17 Jan 2018 04:55 PM IST
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Thousands of religious minorities are fleeing Pakistan due to extremism and religious intolerance
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक - फोटो : ANI
पाकिस्तान में बढ़ती कट्टरता और धार्मिक असहिष्णुता के कारण हजारों ईसाई, अहमदिया मुसलमान और हिंदू वहां से पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामिक समूहों द्वारा धार्मिक उत्पीड़न को रोकने में सरकार की निष्क्रियता के कारण काफी असंतोष फैला है। यहां तक की नास्तिकों को भी निशाना बनाया जा रहा है। 
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अहमदिया समुदाय इस्लामी धर्म का हिस्सा होने के बावजूद पाकिस्तान में खतरे में है और उन्हें खुलेआम जान से मारने की धमकी मिलती रहती है। गौरतलब है कि पाकिस्तान के संविधान के अनुसार अहमदिया लोगों को मुसलमान नहीं माना जाता। 
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पाकिस्तान के वह नागरिक जो नास्तिक हैं उनकी जिंदगी को भी वहां बड़ा खतरा है। इनमें से कई लोगों ने तो अगवा होने के डर से सोशल मीडिया से अपना प्रोफाइल तक हटा दिया है। अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए वे अपने घरों और इंटरनेट को भी सुरक्षित जगह नहीं मानते। 
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स्थानीय व्यक्ति अगर नास्तिक है तो मुसलमान के नाम पर छूट सकता है लेकिन हिंदू और ईसाई तो साफ तौर पर निशाने पर हैं। क्वेटा में बेथल मेमोरियल मेथोडिस्ट चर्च में हाल में हुए आत्मघाती बम हमले से यह साफ जाहिर होता है। 

मुस्लिम कट्टरपंथियों की धमकी की वजह से अनगिनत ईसाईयों को पाकिस्तान से भागकर कहीं और शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। 

एशिया टाइम्स के प्रकाशित लेख के मुताबिक हिंदुओं की किस्मत भी इससे अलग नहीं है। वे भी विदेशों में शरण मांग रहे हैं। 

'हर साल करीब 5000 हिंदू पाकिस्तान छोड़ रहे हैं'

Thousands of religious minorities are fleeing Pakistan due to extremism and religious intolerance
पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक
लेख के मुताबिक पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के सांसद रमेश कुमार ने कहा है कि, बड़े पैमाने पर हो रहे अत्याचार की वजह से 'हर साल करीब 5000 हिंदू पाकिस्तान छोड़ रहे हैं'। जबरन विवाह और फिरौती के लिए अपहरण, साथ ही हिंदू मंदिरों पर हमले भी इसकी वजह हैं। 

पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ता कपिल देव ने मुताबिक, 'दो-राष्ट्र सिद्धांत की विचारधारा को आधार बनाकर हिंदुओं के खिलाफ घृणा को बच्चों के दिमागों में भरा जा रहा है। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर और गढ़ी हुई कहानियों को किताबों में पढ़ाया जा रहा है। 

हिंदुओं के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने वाले गलत तरीके से पेश किए इतिहास और धार्मिक पाठ को हटाने की मांग तेज हुई है। 

कार्यकर्ता कट्टरपंथी इस्लामिक दृष्टिकोण का मुकाबला धर्मनिरपेक्षता के पाठ से करना चाहते हैं। लेकिन पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के महासचिव इब्न अब्दुर रहमान को जल्द ऐसा होने की उम्मीद नहीं दिखाई देती।

उन्होंने एशिया टाइम्स से कहा, 'सरकार ने इस्लामिक कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेक दिए हैं और धीरे-धीरे अपने नागरिकों से हर आजादी छीन लेने की तैयारी में है।' 
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