जिन आंतकियों का किया इस्तेमाल अब वही पाकिस्तानी सेना के लिए बन गए सिरदर्द
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पाकिस्तानी सेना के लिए आज वही आतंकी सिरदर्द बनते जा रहे हैं जिनका पहले उसने इस्तेमाल किया था। सेना ने बलूचिस्तान के विद्रोहियों और अलगाववादियों के खिलाफ आतंकियों का इस्तेमाल किया था। इसके लिए सेना ने सिराज रायजानी के नेतृत्व में एक पार्टी का भी गठन किया था। ताकि बलूचिस्तान के विद्रहियों को दबाया जा सके। बता दें कि बलूचिस्तान के लोग और नेता पाकिस्तान से अलग देश की मांग करते आए हैं। एक बार तो यहां भारत के समर्थन में भी नारे लगे थे। इस वक्त राज्य में चुनावी गतिविधियां भी जोरों पर है।
सेना के लोकप्रिय नेता की मौत
बलूचिस्तान में सेना के लोकप्रिय नेता सिराज रायजानी (55) आम सभा को संबोधित कर रहे थे। वह बलूचिस्तान आवामी पार्टी के उम्मीदवार थे। जब वह मंच पर बोल रहे थे तभी एक आत्मघाती उनके समीप आकर खड़ा हो गया और खुद को बम से उड़ा लिया। इस हमले में सिराज तो मारे ही गए। साथ ही सभा में शामिल 149 लोग भी मारे गए। इसके अलावा 186 लोग घायल हुए।
मामले की जांच करने पर पता चला कि सेना के प्रिय नेता होने के कारण ही आतंकियों ने उनकी जान ली थी। इस हमले की जिम्मेदारी बाद में आतंकी संगठन आईएस ने ले ली। यह संगठन सेना द्वारा चलाए जा रहे आतंक विरोधी अभियान से नाराज था। बता दें इस संगठन का पाकिस्तान में पहले कोई वजूद नहीं था लेकिन सीरिया और इराक में हार के बाद यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर अपना प्रभाव जमाना चाहता है।
आतंकियों का किया था इस्तेमाल
पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान के विद्रोहियों और अलगाववादियों के खिलाफ आंतकवादियों का इस्तेमाल किया था। आज वही आतंकी सेना के लोकप्रिय लोगों और नेताओं को अपना निशाना बना रहे हैं। आज सेना के दांव पेंच उसी पर उल्टे पड़ते जा रहे हैं।
बलूचिस्तान है बेहद आवश्यक
बलूचिस्तान राज्य पाकिस्तान के लिए बेहद आवश्यक राज्य है। यहीं से पाकिस्तान को हर साल 7,000 करोड़ रुपये की आय होती है। एशिया में सबसे ज्यादा गैस, सोना और तांबा इसी राज्य में होता है। लेकिन बदले में यहां के लोगों को कुछ नहीं मिलता। यहां के विद्रोहियों का कहना है कि सेना उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अपना नियंत्रण रख रही है। जो कि ठीक नहीं है। साल 2004 के बाद से अब तक हजारों छात्र, विद्रोही और कार्यकर्ताओं को मारा गया है।
सुरक्षा एजेंसी ने इन विद्रोहियों का मुकाबला करने के लिए लश्कर और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों का इस्तेमाल शुरू किया था। लेकिन जब यह सफल नहीं हुए तो आईएस ने मजबूर होकर सेना को निशाना बनाना शुरू कर दिया। वहीं पाकिस्तान सरकार भारत और अफगानिस्तान पर बलूच विद्रोहियों को समर्थन देने के लिए आरोप लगाती रही है। सरकार का कहना है कि यही देश तालिबान को पाकिस्तान में सक्रिया बना रहे हैं।