ठाकरे भारत के हीरो, हाफिज सईद हमारा: मुशर्रफ
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पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने मुंबई में 26/11 हमले के मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद की तुलना भारत के शिवसेना से की है। एक पाकिस्तानी चैनल पर इंटरव्यू के दौरान मुशर्रफ ने कहा की जो लोग पाकिस्तान में हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं वो अपनी सीमा लांघ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बेशक 1990 की लड़ाई में अफगान और कश्मीरी मुजाहिद्दीन हमारे हीरो थे लेकिन अब माहौल बदल गया है। मुशर्रफ ने पत्रकार के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि आप देखिए भारत में क्या हो रहा है? वो हमारे साथ क्रिकेट नहीं खेलना चाहते। आपने देखा शहरयार खान (पीसीबी प्रमुख) के साथ क्या हुआ? कसूरी (पूर्व पाकिस्तानी विदेश मंत्री) के किताब के विमोचन का आयोजन कराने वाले का चेहरा काला कर दिया गया। गुलाम अली के कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।
मुशर्रफ ने कहा कि भारत में यही सब हो रहा है। उन्होंने कहा, 'वहां यही हो रहा है। क्या हम (भारत) किसी सेना (शिवसेना) के नेता को पकड़ रहे हैं? क्या बाल ठाकरे आतंकी नहीं थे, क्या किसी ने उसे पकड़ा। समझौता एक्सप्रेस धमाके में एक कर्नल का भी हाथ था जिसमें 100 पाकिस्तानी मारे गए थे। आप सईद की बात करते हैं, आप मुझे वह कर्नल दीजिए।'
'जो पहले हीरो थे अब वो आतंकी है'
मुशर्रफ ने कहा कि अफगान युद्ध में पाकिस्तान ने अमेरिका का समर्थन किया किया था लेकिन 1979 में इस्लामाबाद में जब धार्मिक आतंकवाद सोवियत संघ को बाहर करने के पक्ष में था तब से लेकर अबतक बहुत कुछ बदल गया है। उन्होंने कहा, 'हम दुनियाभर से मुजाहीद्दिनों को लाए थे। हमने तालिबान के प्रशिक्षित किया, और उन्हें वहां भेजा। वे हमारे हीरो हैं। 1980 के दौर में हक्कानी हमारा हीरो था। ओसामा बिन लादेन और सीआईए भी हमारे हीरो थे। अल जवाहिरी भी हमारा ही हीरो था।' लेकिन अब माहौल बदल गया है और 'हमारे हीरो अब खलनायक बन गए हैं।'
उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी ही घटना 1990 में पाकिस्तान में भी हुई थी। कश्मीर भारत से आजाद होना चाहते थे लेकिन उन्हें निर्ममता से मार दिया गया। भारतीय सेना ने उनकी हत्या कर दी, वे पाकिस्तान चले आए और हमने उनको हीरो की उपाधि दी। मुशर्रफ ने कहा कि हमने उन मुजाहीद्दिनों को प्रशिक्षण दिया और कश्मीर विद्रोह को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा, 'वे मुदाहिद्दीन थे जो अपने अधिकारों के लिए भारतीय सेना से लड़े। लश्कर-ए-तैय्यबा ऐसे 10 से 12 समूहों से मिलकर बना।' ये वही लोग हैं जिन्हें उस वक्त हीरो कहकर पुकारा जाता था लेकिन आज वही 'हीरो आतंकवादी बन गए हैं'।