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पाक: शव दफनाने को तैयार शिया

Mon, 14 Jan 2013 03:37 PM IST
Updated Mon, 14 Jan 2013 03:37 PM IST
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shia sit in ends in quetta on fourth day

पाकिस्तान में पिछले चार दिनों से प्रदर्शन कर रहे हज़ारों शिया मुसलमानों ने केंद्र सरकार द्वारा उनकी मांगों को मान लिए जाने के बाद अपना प्रदर्शन वापस ले लिया है और परिजनों के शवों को दफनाने पर राजी हो गए हैं।

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गुरुवार को क्वेटा में हुए बम धमाकों में करीब सौ लोग मारे गए थे और उनके परिजनों ने तब तक शवों को दफ़नाने से इंकार कर दिया था जब तक कि सरकार उनकी मांगे मान नहीं लेती।
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ ने इन लोगों की मांगों को स्वीकार करते हुए सोमवार की सुबह बलूचिस्तान प्रांत के मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर दिया और शिया समुदाय के लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। बलूचिस्तान को फिलहाल सीधे केंद्रीय नियंत्रण के अधीन कर दिया गया है।
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मुख्यमंत्री बर्खास्त

इससे पहले, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के मु्ख्यमंत्री को राजधानी क्वेटा में गुरुवार को हुए बम धमाकों के बाद उनके पद से हटा दिया गया। प्रधानमंत्री रजा परवेज अशरफ ने विरोध कर रहे शिया मुसलमानो के नेताओं से मिलने के बाद इस फैसले का ऐलान किया।

गुरुवार को क्वेटा में हुए दो बम धमाकों में नब्बे से ज़्यादा लोग मारे गए थे। ये हमले शिया मुसलमानों को निशाना बनाकर किए गए थे। हमलों के बाद शिया सड़कों पर उतर आए थे और उन्होंने मारे गए लोगों के शवों को तब तक दफ़नाने से इंकार कर दिया था जब तक उन्हे सुरक्षा नहीं दी जाती।

पाकिस्तान के शिया अल्पसंख्यक समुदाय में सुरक्षा को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। शियाओं की आबादी पाकिस्तान में वर्चस्व रखने वाले सुन्नी मुसलमानों की संख्या का 20 फीसदी है।

विरोध

अलि राजा नाम के एक प्रदशर्नकारी ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा कि क्वेटा कत्लगाह का मैदान बन गया है। हम इसका विरोध कर रहे हैं। ज्यादातर शिया मुसलमान हज़ारा समुदाय से आते हैं। शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने धार्मिक मामलों के मंत्री सैयद खुर्शीद शाह के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने से मना कर दिया था।


शिया कॉनफ्रेंस के अध्यक्ष सैयद दाउद अगा ने बीबीसी को बताया था कि उनका समुदाय लाशों को तब तक दफन नहीं करेगा जब तक कि फौज ये भरोसा न दिला दे कि वे शहर का निजाम अपने हाथों में ले लेंगे। पाकिस्तान का बलूचिस्तान सूबा मजहबी गुटों और अलगाववादी विद्रोहियों के संघर्ष से जूझ रहा है।

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