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पाकिस्तानः यहां प्यार के बदले मिलती है मौत

Sat, 13 Dec 2014 07:26 PM IST
याल्दा हकीम/बीबीसी, पाकिस्तान
याल्दा हकीम/बीबीसी, पाकिस्तान Updated Sat, 13 Dec 2014 07:26 PM IST
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punishment for women for love in pakistan.

पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां पितृसत्ता और कबायली परंपराओं को बचाए रखने की कोशिशें हो रही हैं। यही वजह है कि यहां महिलाओं को प्यार करने की सजा के तौर पर हिंसक प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है।

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कई बार तो प्यार करने वाली महिलाओं को इसके बदले मौत ही मिलती है। पढ़ें लेख विस्तार से-

25 साल की अरफिया ने एक दिन अपने परिवार के फैसले के खिलाफ उस आदमी के संग भाग कर चुपके से शादी कर ली जिससे वो प्यार करती थीं।

अगले ही दिन पाकिस्तान के सबसे बडी़ आबादी वाले शहर कराची की एक व्यस्त सडक पर उनके परिवार के पुरुषों ने उन्हें और उनके पति को घेर लिया। बंदूक की नोक पर वो लोग अरफिया को घर वापस ले आए।
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उनके पति अब्दुल मलिक अपने आंसू पोछते हुए बताते हैं, "पांच दिन बाद बहुत मुश्किल से पता चला कि मेरी बीवी जिंदा है और उन्हें कहीं छुपा दिया गया है।"

मलिक को डर है कि उनकी भी जान जा सकती है। वो पिछले तीन महीने से छुपकर रह रहे हैं। वो कहते हैं, "पाकिस्तान में प्यार करना बहुत बडा़ पाप है। सदियां बीत चुकी हैं, दुनिया बहुत आगे बढ़ चुकी है। लेकिन हमारे यहां अब भी सदियों पुरानी परंपरा और नियम चल रहे हैं।"

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एक साल में 1000 प्रेमियों की हत्याएं

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सिर्फ इस एक साल में करीब 1000 महिलाओं की कथित 'इज्जत के नाम पर हत्या' हो चुकी है। कहना न होगा ये केवल वो मामले हैं जिनके बारे में आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है।

इसी साल मई में फरजाना परवीन नामक युवती को पत्थरों से मार-मार कर मार देने की घटना ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। उनका गुनाह था अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ उस आदमी से शादी करना जिससे वो प्यार करती थीं।

यह घटना लाहौर हाई कोर्ट के बाहर पुलिसवालों और आम लोगों के सामने हुई थी।

नवंबर में फरजाना के पिता, भाई समेत कई रिश्तेदारों को हत्या को दोषी पाया गया था और उन्हें सजा भी हुई। लेकिन ऐसा बहुत कम ही होता है। आम तौर पर ऐसे मामलों में कबायली समाज के नियम हत्या करने वालों की ढाल बन जाते हैं।

कई धार्मिक नेता मानते हैं कि परिवार के सम्मान को ठेस पहुंचाने वालों की हत्या करना उचित है। ये अलग बात है कि परिवार और कबीले की इज्जत को बहाल करने के लिए अक्सर महिलाओं की ही जान ली जाती है।

पत्‍थर और कोड़े मारने की है सजा

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हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान में बहुत कम लोग कबायली परंपराओं और नियमों का विरोध कर रहे हैं। द प्यू रिसर्च सेंटर के एक ताजा सर्वेक्षण में पाकिस्तान में बहुसंख्यक आबादी देश में इस्लामी शरिया कानून लागू करने के पक्ष में थी।

कराची के एक मदरसे में मेरा जाना हुआ जिसमें हजारे बच्चे-किशोर धार्मिक शिक्षा लेते हैं। यहां पढ़ाने वाले मौलवी को लगता है कि पाकिस्तान में शांति लाने के लिए शरिया कानून लागू करना जरूरी है।

मैंने महिलाओं के पराए मर्दों से रिश्ते रखने यानी परगमन के बारे में उनकी राय जाननी चाही। उनका कहना था, "शरिया में परगमन के लिए पत्थर मारने और कोडे़ मारने की सजा मुकर्रर है।"

मदरसे के एक छात्र ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा, "एक बार जुर्म साबित हो जाए तो शरिया में इसके लिए संगसार करने या कोडे़ मारने की ही सजा है।" लेकिन देश का कानून इस बारे में क्या कहता है?

1979 में सैन्य शासक जनरल जिया उल-हक ने कथित हुदूद कानून लागू किया। इस विवादित कानून के सहारे उन्होंने देश के इस्लामीकरण की कोशिश की। दूसरे कई प्रावधानों के साथ इसके तहत शादी के बाहर रिश्ता बनाने (परगमन) के लिए संगसार करने और कोडे मारने की सजा निर्धारित की गई।

महिलाओं की बढ़ती मुश्किल

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2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने महिलाओं की रक्षा के लिए इनमें से कुछ कानूनों को नरम बनाने की कोशिश की लेकिन जमीनी स्तर इन्हें कम ही लागू किया गया।

बहरहाल, परगमन पाकिस्तान में अब भी अपराध है। पाकिस्तान में बढ़ते मध्यवर्ग के साथ बढती आधुनिकता और धर्मनिरपेक्षता के बावजूद महिलाविरोधी पुरानी सोच का सामना करना मुश्किल होता जा रहा है।

महिलाओं के साथ होने वाली क्रूरता और भेदभाव गांवों और शहरों दोनों जगहों पर करीब एक जैसी है। देश में बढ़ते धार्मिक कट्टरपन के साथ ही महिलाओं की आजादी पर होने वाले हमले भी बढ़ते जा रहे हैं।

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