पाकिस्तान: 'घर जाना है, पर जाने नहीं देते'
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पाकिस्तान में धार्मिक नेता ताहिर उल कादरी का मार्च लंबा खिंच जाने की वजह से इसमें शामिल कई लोग अपने घर जाना चाहते हैं लेकिन उनका कहना है कि उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी जा रही है।
हालांकि आवामी तहरीक के प्रवक्ता ने इन आरोपों का खंडन किया है। प्रदर्शन में शामिल बहावलपुर के रहने वाले नवेद (बदला हुआ नाम) का कहना है कि उनकी तरह बहुत से लोग अपने घर जाना चाहते हैं।
दसवीं में पढने वाले नवेद के मुताबिक कादरी की आवामी तरहीक के स्थानीय कार्यकर्ता तनवीर अब्बासी ने उनके घरवालों को बताया कि उनका बेटा 'इंकलाब मार्च' में शामिल होने के लिए इस्लामाबाद जा रहा है और वो तीन दिन के बाद वापस आ जाएगा।
नवेद का कहना है कि आवामी तहरीक के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उनके घरवालों को छह हजार रुपए दिए थे जो उन्होंने खुशी-खुशी ले लिए।
उन्होंने कहा कि उनके इलाके से लगभग तीन सौ छात्रों को इसी तरह इस्लामाबाद लाया गया है। नवेद के मुताबिक उन्हें 21 दिन इस्लामाबाद में हो गए हैं और जब भी वो कहते है कि उन्हें घर जाना है तो उन्हें गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी जाती है।
मिलती है जान से मारने की धमकी
साथ ही ये भी कहा जाता है कि रावलपिंडी और इस्लामाबाद के बस स्टेंड पर उनके बंदे खडे हैं जो उन्हें घर जाने के बजाए 'अगली दुनिया' में पहुंचा देंगे।
बताया जाता है कि गुजरांवाला इलाके से भी लगभग सौ महिलाएं इस 'इंकलाबी मार्च' में लाई गई हैं और उनके घरवालों को दस हजार रुपए महीने के हिसाब से दिए गए हैं।
दूसरी तरफ पाकिस्तान आवामी तहरीक के प्रवक्ता उमर रियाज अब्बासी ने बीबीसी से बातचीत में इन बातों का खंडन किया।
उन्होंने कहा कि इस वक्त धरने में जितने भी लोग बैठे हैं वो अपनी मर्जी से बैठे हैं और उन्हें न तो मजबूर किया गया है और न ही उन्हें कोई पैसा दिया गया है। उन्होंने कहा कि कादरी के आदेश पर लगभग आठ सौ के ऐसे प्रदर्शनकारी घर वापस चले गए हैं जिनकी परिक्षाएं हैं या उनकी अन्य जरूरी काम हैं।
इंकलाबी मार्च में शामिल होने वालों के बारे में गृह मंत्रालय को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वक्त प्रदर्शनकारियों की तादाद चार से पाँच हजार है।