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इंटरव्यू से कुलभूषण जाधव का नाम हटाने पर पाक में विरोध, पाकिस्तानी वित्त मंत्री ने किया था जिक्र
Sat, 15 Dec 2018 03:55 AM IST
गौरव द्विवेदी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Sat, 15 Dec 2018 03:55 AM IST
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कुलभूषण जाधव
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पाकिस्तान में बीबीसी को अपने एक इंटरव्यू को लेकर सरकार और स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बीबीसी ने पाकिस्तानी वित्त मंत्री असद उमर के इंटरव्यू से जासूसी के आरोप में जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव का नाम हटा दिया था, जिसके बाद उसके खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
लोग बीबीसी पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। इसके बाद बीबीसी को अपने टीवी इंटरव्यू कार्यक्रम ‘हार्ड टॉक’ में कुलभूषण का नाम ‘हटाने’ पर सफाई देनी पड़ी। बीबीसी ने कहा कि इंटरव्यू में कुलभूषण के जिक्र को एडिट (हटाना) करना कोई ‘सेंसरशिप’ नहीं था।
इस पर पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शीरीन माजरी ने कहा, ‘इंटरव्यू से कुलभूषण का नाम हटाना ‘पूरी तरह पक्षपात’ और बेहद शर्मनाक है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि बीबीसी को भारत में मोटी कमाई होती है।’ हालांकि, बीबीसी ने कहा, ‘रिकॉर्ड किया गया इंटरव्यू बहुत लंबा था और उसे प्रसारित करना मुश्किल था। हमें उसे एडिट करना पड़ा।
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इंटरव्यू को रेडियो और टीवी के लिए अलग-अलग तैयार किया गया था। महज भ्रम की स्थिति की वजह से ऐसा हुआ। हम दोबारा नाम लगाकर कार्यक्रम को फिर से प्रसारित करेंगे।’ बीबीसी के स्टीफन सैकर ने पाकिस्तानी वित्त मंत्री असद का इंटरव्यू लिया था। इसमें उन्होंने अर्थव्यवस्था, चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर समेत राष्ट्रीय महत्व के तमाम मुद्दों से जुड़े सवालों के जवाब दिए थे।
इसी इंटरव्यू में असद ने एक सवाल के जवाब में आरोप लगाया था कि बलूचिस्तान और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों में सीमा पार से चरमपंथ को बढ़ावा दिया जा रहा है और भारतीय ‘जासूस’ कुलभूषण ने इसकी जानकारी दी है। हालांकि, एडिट के दौरान बीबीसी ने इंटरव्यू से कुलभूषण का जिक्र हटा दिया।
बताते चलें कि कुलभूषण फिलहाल पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। सैन्य अदालत ने उन्हें जासूसी का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई है। इस साल मई में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने भारत की अपील पर कुलभूषण की सजा पर रोक लगा दी है।
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लोग बीबीसी पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। इसके बाद बीबीसी को अपने टीवी इंटरव्यू कार्यक्रम ‘हार्ड टॉक’ में कुलभूषण का नाम ‘हटाने’ पर सफाई देनी पड़ी। बीबीसी ने कहा कि इंटरव्यू में कुलभूषण के जिक्र को एडिट (हटाना) करना कोई ‘सेंसरशिप’ नहीं था।
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इस पर पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शीरीन माजरी ने कहा, ‘इंटरव्यू से कुलभूषण का नाम हटाना ‘पूरी तरह पक्षपात’ और बेहद शर्मनाक है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि बीबीसी को भारत में मोटी कमाई होती है।’ हालांकि, बीबीसी ने कहा, ‘रिकॉर्ड किया गया इंटरव्यू बहुत लंबा था और उसे प्रसारित करना मुश्किल था। हमें उसे एडिट करना पड़ा।
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इंटरव्यू को रेडियो और टीवी के लिए अलग-अलग तैयार किया गया था। महज भ्रम की स्थिति की वजह से ऐसा हुआ। हम दोबारा नाम लगाकर कार्यक्रम को फिर से प्रसारित करेंगे।’ बीबीसी के स्टीफन सैकर ने पाकिस्तानी वित्त मंत्री असद का इंटरव्यू लिया था। इसमें उन्होंने अर्थव्यवस्था, चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर समेत राष्ट्रीय महत्व के तमाम मुद्दों से जुड़े सवालों के जवाब दिए थे।
इसी इंटरव्यू में असद ने एक सवाल के जवाब में आरोप लगाया था कि बलूचिस्तान और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों में सीमा पार से चरमपंथ को बढ़ावा दिया जा रहा है और भारतीय ‘जासूस’ कुलभूषण ने इसकी जानकारी दी है। हालांकि, एडिट के दौरान बीबीसी ने इंटरव्यू से कुलभूषण का जिक्र हटा दिया।
बताते चलें कि कुलभूषण फिलहाल पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। सैन्य अदालत ने उन्हें जासूसी का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई है। इस साल मई में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने भारत की अपील पर कुलभूषण की सजा पर रोक लगा दी है।