फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   protest against nawaz in pakistan continue

पाकिस्तान संकट: लोग क्या चाहते हैं?

Sun, 31 Aug 2014 01:56 PM IST
अहमद राशिद/बीबीसी डॉट कॉम
अहमद राशिद/बीबीसी डॉट कॉम Updated Sun, 31 Aug 2014 01:56 PM IST
विज्ञापन
protest against nawaz in pakistan continue

पाकिस्तान में जारी संकट ने कई सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ जनता स्थिरता चाहती है तो दूसरी तरफ राजनेता हलचल मचाए हुए हैं।

विज्ञापन


इमरान खान ने जब तीन हफ़्ते पहले प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के इस्तीफे और नए चुनाव कराने की मांग को लेकर इस्लामाबाद कूच किया था तो उन्हें लगा था कि पूरा देश उनके साथ लामबंद हो जाएगा। लेकिन ऐसा क्यों नहीं हुआ और पाकिस्तान की जनता क्या चाहती है, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

इमरान ने जैसा सोचा था उसके ठीक विपरीत हुआ। सारा देश इमरान, उनके समर्थकों और उनके इन दावों के ख़िलाफ़ हो गया कि पिछले साल हुए आम चुनावों में धांधली हुई थी।
विज्ञापन


लगभग सभी राजनीतिक धड़ों ने शरीफ का समर्थन किया। यहां तक कि उनके राजनीतिक विरोधियों ने भी उनका ही साथ दिया।

इमरान की मांग असंवैधानिक?

protest against nawaz in pakistan continue

पाकिस्तान के कारोबारी तबके, व्यापारियों, सिविल सोसायटी, मीडिया, वकीलों और अदालतों सभी ने सरकार, संविधान और यथास्थिति के प्रति अपना मजबूत समर्थन जाहिर किया।

इनमें से कई लोगों ने इमरान की मांग को गैर कानूनी और असंवैधानिक करार दिया, लेकिन मुद्दा यह नहीं था। वास्तव में पाकिस्तान के लोग ऐसा संकट और हालात नहीं चाहते थे जिससे सेना की सीधी भूमिका में वापसी हो सके।

इस तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। इमरान को सलाह दी गई थी कि शरीफ प्रशासन ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा, वह देश छोड़ देंगे और पाकिस्तान उनके जाने का स्वागत करेगा।

इसके बजाय देश ने मजबूती के साथ एक पक्ष लिया, जो शरीफ के पक्ष में हो यह जरूरी नहीं, लेकिन यह देश के स्थायित्व के पक्ष में था। यहीं पर इमरान खान और उनके तमाम सलाहकार मात खा गए।

पहले ही टल सकता था संकट

protest against nawaz in pakistan continue

पाकिस्तानी जनता ने दशकों के सैन्य शासन, राजनीतिक अस्थिरता, बेनजीर भुट्टो की हत्या, इस्लामी चरमपंथ का उभार, अर्थव्यवस्था का बिखराव देखा।

लोगों ने 1990 के दशक में सरकारों के बनने और गिरने का दौर भी देखा था और वे इन सबसे मुक्ति के लिए तड़प रहे थे।

पिछले साल जब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की निर्वाचित सरकार ने पहली बार बिना किसी सैन्य दख़ल के अपना कार्यकाल पूरा किया और फिर चुनाव के बाद नई सरकार ने सत्ता सौंपी तो जनता को राहत महसूस हुई।

हालांकि चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं थे, लेकिन अधिकांश लोगों ने सत्ता के लोकतांत्रिक हस्तांतरण के लिए इसे जायज माना।

सत्ता के मद में चूर शरीफ ने चार निर्वाचन क्षेत्रों में पुनर्मतदान की इमरान की मांग को नहीं माना। अगर उन्होंने पिछले साल यह मांग मान ली होती तो संभव है कि मौजूदा संकट टाला जा सकता था।

विज्ञापन

लोग आगे बढ़ना चाहते हैं

protest against nawaz in pakistan continue

यह इमरान के अहम का मसला भी नहीं है (उनको भी अच्छा लगता है कि कोई उन्हें 'कप्तान' या 'प्रधानमंत्री' कहे)। साथ ही यह शख़्सियतों और उनके टकराव का मसला भी नहीं है।

न ही यह पारिवारिक संबंधों का मामला है। शरीफ ने अपने मंत्रियों को ज्यादा अधिकार देने के बजाए अपने रिश्तेदारों को अहम पदों पर नियुक्त किया है। उनकी इस नीति के कारण पार्टी में भी असंतोष बढ़ रहा है।

पाकिस्तान के लोग राजनीति में शक्तिशाली सेना की कथित दखलंदाजी और उसकी ख़ुफ़िया इकाई आईएसआई से तंग आ गए हैं। इसलिए सैन्य हस्तक्षेप, शरीफ का इस्तीफा, फिर से चुनाव जैसे किसी भी समाधान को देश के बड़ी आबादी का समर्थन हासिल नहीं है।

लोग स्थायित्व और बेहतर सुरक्षा चाहते हैं ताकि अपनी ज‌िंदगी में आगे बढ़ सकें।

इस्लामिक स्टेट और तालिबान

protest against nawaz in pakistan continue

लोग सरकार से दो चीजें चाहते हैं, बेहतर प्रशासन और अर्थव्यवस्था में सुधार। लेकिन इमरान ने तो केवल अगला प्रधानमंत्री बनने का वादा किया है। स्थिरता का संदेश समान रूप से सेना तक भी पहुंचना चाहिए।


लोग सेना के उस खेल से तंग आ चुके हैं जिसके तहत वह कश्मीर, अफगानिस्तान और मध्य एशिया में अपने मंसूबों को आगे बढ़ाने के लिए छद्म इस्लामी समूहों को समर्थन दे रही है।

आज पाकिस्तानी तालिबान और लाहौर तथा अन्य पंजाबी शहरों में सक्रिय इस्लामी गुट सीरिया और इराक़ के इस्लामिक स्टेट जितने ही खतरनाक हैं।

पाकिस्तान में लोग इस्लामी अतिवाद नहीं स्थायित्व चाहते हैं। वे अगला जन्म सुधारने के बजाय शिक्षा चाहते हैं जिससे उन्हें बेहतर अवसर और रोजगार मिले।

संभव है कि पिछले एक महीने घटनाक्रम से लोगों में लोकतंत्र के प्रति निराशा का भाव पैदा हो लेकिन उन्हें स्थिरता तो किसी भी कीमत पर चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed