जाते-जाते बासित बोले- बर्थडे विश किया, मां के लिए साड़ी भेजी फिर भी दुश्मनी बनी रही
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भारत में पाकिस्तान के अंतरिम उच्चायुक्त अब्दुल बासित का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ के बेहतर आपसी संबंध होने के बावजूद दोनों देशों के बीच की आपसी तकरार को खत्म करने में और आगे बढ़ने में किसी तरह की मदद नहीं मिली।
बासित ने कहा कि नेताओं के बीच बातचीत बहुत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि हम भारत द्वारा की गई पहल की सराहना करते हैं मगर ये प्रयास किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे। बासित ने पाक के अंतरिम उच्चायुक्त के तौर पर दिए गए अपने अंतिम साक्षात्कार में ये बाते कही।
इससे पूर्व अब्दुल बासित ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंध सुधारने की ‘‘आवश्यकता’’ है। उन्होंने कहा कि इसमें दोनों पक्षों की तरफ से ‘‘आदान- प्रदान’’ की जरूरत है।
बासित ने कश्मीरियों के ‘‘आत्मनिर्णय’’ की अपनी वकालत के साथ ही दोनों देशों के बीच बातचीत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति के लिए जम्मू कश्मीर मुद्दे का हल होना चाहिए।
बासित ने कहा ‘‘दोनों देशों को इसका निर्णय करने की जरूरत है कि उन्हें किन मुद्दों पर बातचीत करने की जरूरत है....जैसा कि शर्म अल शेख में निर्णय हुआ था, जहां हमने वार्ता को आतंकवाद से अलग करने का निर्णय किया था। हमें उन ताकतों का बंधक नहीं बनना चाहिए जो प्रगति नहीं चाहते।’’
बासित ने यह टिप्पणी एक कार्यक्रम में की जो कि संभवत: पद छोड़ने से पहले नयी दिल्ली में उनका आखिरी सार्वजनिक कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘साउथ एशिया फोरम फॉर आर्ट एंड क्रिएटिव हेरीटेज’ द्वारा किया गया था।
मालूम हो कि वर्ष 2014 में पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ को विशेष न्यौता दिया गया जिसे स्वीकार करते हुए शरीफ ने पीएम मोदी के शपथ ग्रहण सामारोह में शिरकत भी की।
नवाज शरीफ और पीएम मोदी के आपसी संबंधों की बात करें तो आपको बता दें कि पीएम मोदी ने नवाज शरीफ की मां के लिए सॉल भेजा था जबकि शरीफ ने पीएम मोदी की मां के लिए साड़ी भेज कर रिटर्न गिफ्ट दिया।
इसके अलावा अमेरिका की यात्रा के दौरान भारत लौटते वक्त पीएम मोदी ने पाकिस्तान जाकर नवाज शरीफ को उनके जन्मदिन पर बधाई दी थी।
पठानकोट हमले के बाद हुए संबंध खराब
बासित ने कहा, ‘‘पठानकोट या पठानकोट नहीं, हमें इसका निर्णय करना होगा कि हम वार्ता प्रक्रिया को बाधित नहीं करेंगे। हम जहां पठानकोट मुद्दे पर सहयोग कर रहे थे, हम वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते थे। उससे मदद मिलती।’’ बासित को 2014 में भारत में पाकिस्तान का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। अब उनका स्थान सोहेल महमूद लेंगे जिनके अगले महीने पदभार संभालने की उम्मीद है।
बासित को दो बार पाकिस्तान के विदेश सचिव पद के लिए नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि संबंध सुधारने की प्रक्रिया के सवाल पर ‘‘वास्तविक होने’’ की जरूरत है।उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम राजनीतिक इच्छाशक्ति जुटा लें तो हम अपनी समस्याओं का हल खोज सकते हैं। हम जब भी बातचीत में शामिल हुए हैं, हमें अच्छे परिणाम मिले हैं। हमें एक वार्ता प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत है और यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सीबीएम :विश्वास बहाली उपाय: का अक्षरश: पालन हो। हमें दोनों देशों के बीच बनावटी अवरोध नहीं आने देने चाहिए।’’