फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   plan of al qaida for india.

'अल कायदा से भारत के अस्तित्व को बड़ा खतरा नहीं'

Sun, 07 Sep 2014 11:24 AM IST
अजय साहनी/सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ
अजय साहनी/सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ Updated Sun, 07 Sep 2014 11:24 AM IST
विज्ञापन
plan of al qaida for india.

अल कायदा के प्रमुख आयमन अल जवाहिरी के वीडियो ने, जिसमें 'जमात क़ायदात अल जिहाद फी शीभी अल कर्रात अल हिंदिया' यानी भारतीय उपमहाद्वीप में जिहादी संगठन बनाने का ऐलान किया गया है, मीडिया जगत में बहुत प्रमुखता पाई है।

विज्ञापन


भारतीय विशेषज्ञ इससे खासतौर पर चिंतित हैं कि ज़वाहिरी के ऐलान में तीन भारतीय राज्यों जम्मू कश्मीर, गुजरात और असम का ज़िक्र हुआ है। और यह कि अब अल क़ायदा ब्रैंड के हाइपरटैररिज्म के लिए और संगठन में भर्ती के लिए ये राज्य निशाना बनेंगे।

विज्ञापन


हालांकि भारत में कमज़ोर ठिकाने चरमपंथ के निशाने पर हो सकते हैं मगर अल क़ायदा ने अब जो कहा है वो पहले भी ऐसी बातें कर चुका है।

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के उन्माद में सरकार और गृहमंत्रालय के बीच की बातें ही घूमती दिखाई दीं और शायद आंतरिक सुरक्षा पर अपनी अचूक पकड़ का दिखावा करने की कोशिश में तुरंत ‘हाई अलर्ट’ भी घोषित हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


चूंकि तब तक किसी फौरी चरमपंथी खतरे की कोई खास खुफ़िया जानकारी नहीं थी तो यह साफ नहीं कि सिवाय मुस्लिम इलाकों में पुलिसकर्मियों के जब-तब उत्पीड़न के इस ‘हाई अलर्ट’ से और क्या हासिल होना था।

हालांकि खबरों को देखें तो मीडिया को इस कदम के जरिए भरोसा दिला दिया गया था। किसी भी चरमपंथी खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता, मगर आकलन हक़ीकत के मुताबिक होना चाहिए। इसकी कुंजी है - किसी इरादे का ऐलान और कार्रवाई की क्षमता।

ज़वाहिरी के इरादे के ऐलान को गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे में जब भारतीय उपमहाद्वीप में जिहाद के लिए एक नए संगठन का गठन किया गया है और उसका नेता मौलाना असीम उमर को चुना गया है, तो फिर इसे और भी गंभीरता से लेना चाहिए।

1996 से कोशिश निशाना बनाने की कोशिश

plan of al qaida for india.

हालांकि इन आकलनों को हल्के में लेना इसलिए जरूरी है कि अल क़ायदा 1996 से ही दक्षिण एशिया को निशाना बनाने में नाकाम रहा है, जब ओसामा बिन लादेन आमतौर पर भारत को और जम्मू कश्मीर और असम को दुनिया के कुछ उन हिस्सों में गिना करते थे जहां मुसलमानों के ख‌िलाफ ‘अत्याचार’ हो रहे थे और जहां जिहाद की जायज वजहें मौजूद थीं।

2002 के दंगों के बाद भारत संबंधी अल क़ायदा के कई बयानों में गुजरात को इन दोनों सूबों के साथ शामिल किया जाने लगा।

फिर 2006 में बिन लादेन ने दुनियाभर के मुसलमानों के ख‌िलाफ ‘क्रूसेडर-ज‌ियोनिस्ट-हिंदू’ का सिद्धांत तैयार किया और कहा, "यह उम्मत का फ़र्ज़ है कि इराक, फलस्तीन, अफगानिस्तान, सूडान, कश्मीर और चेचेन्या में जिहाद शुरू करने के लिए सभी आदमी-औरतें और नौजवान ख़ुद, अपने पैसे, अनुभव और सभी तरह की मदद करें।"

दिलचस्प यह कि 2010 में अल क़ायदा में नंबर तीन सईद अल मसरी ने पाकिस्तान में ड्रोन हमले में अपनी मौत के वक़्त गोलमोल से दावे किए थे। इसमें जर्मन बेकरी को निशाना बनाने वाले ‘भारतीय ऑपरेशन’ का ज‌िक्र था।

उन्होंने तब कहा था, "पिछली फरवरी में भारत में हुआ हमला पश्चिमी भारत की राजधानी में एक स्थानीय यहूदी के ख‌िलाफ था।" इसमें भारत के भूगोल और दूसरी जानकारियों की अधूरी सी छाप थी।

उनके मुताबिक, "जर्मन बेकरियों के इलाक़े में दुश्मन ने छिपने की कोशिश की, और क़रीब 20 यहूदी मारे गए थे।" (हालांकि असल में भारत की राजधानी दिल्ली से करीब 14 सौ किलोमीटर दूर दक्षिण पश्चिम में 13 फरवरी 2010 को यह हमला हुआ था। पुणे में जर्मन बेकरी पर इस धमाके में 17 लोग मारे गए थे। इनमें ईरान के एक मुसलमान, सूडान के तीन मुसलमान, एक इटैलियन और 12 भारतीय थे।)

आतंकी चेतावनियां

plan of al qaida for india.

2012 में पाकिस्तान के लिए अल कायदा के ‘उपदेश और मीडिया विभाग’ प्रमुख उस्ताद अहमद फारुक़ ने चेतावनी दी थी कि म्यांमार और असम में मुसलमानों की हत्या "से हमें दिल्ली की तरफ़ तेजी से कूच करने के लिए मजबूती मिली है।"

भारतीय उपमहाद्वीप में अल कायदा के नेता बताए गए मौलाना असीम उमर ने जून 2013 में एक वीडियो जारी किया था, जिसका टाइटिल था- “तुम्हारे समंदर में तूफ़ान क्यों नहीं?” इसमें भारतीय मुसलमानों को वैश्विक जिहाद में शामिल होने के लिए उकसाया गया था।

उल्लेखनीय है कि भारत में अल क़ायदा की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कोई नई बात नहीं। पाकिस्तान में मौजूद भारत को निशाना बनाने वाले कई चरमपंथी संगठन जैसे लश्करे तैयबा, जैशे मुहम्मद, हरकत उल मुजाहिदीन और इंडियन मुजाहिदीन और यहां तक कि हरकत उल जिहाद इस्लामी बांग्लादेश (जिसकी 1992 में बिन लादेन के संगठन इंटरनेशनल इस्लामिक फ्रंट के सीधे आर्थिक सहयोग से स्थापना हुई थी) के कई साल से अल कायदा से वैचारिक, वित्तीय और सामरिक संबंध हैं।

भारत में इंडियन मुजाहिदीन के ऑपरेशंस कमांडर यासीन मुहम्मद अहमद जरार सिद्दीबापा उर्फ़ यासीन भटकल ने अगस्त 2013 में गिरफ्तारी के बाद बताया था कि उन्होंने अल कायदा के साथ मिलकर भारत में ‘ज्वाइंट ऑपरेशंस’ का फैसला किया था और इस बाबत उनकी अल क़ायदा के एक वरिष्ठ नेता से बात चल रही थी।

इसके अलावा इंडियन मुजाहिदीन के काडर अल कायदा में शामिल होकर ‘अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर लड़ रहे’ थे।

चरमपंथी संगठनों का भरोसा

plan of al qaida for india.

कुल मिलाकर जवाहिरी ने मौजूदा बयान में केवल वही बातें दोहराई हैं, जिन्हें पिछले कई बयानों में तथाकथित ‘जिहाद’ के लिए भारतीय मुसलमानों को भड़काने के इरादों और कोशिशों के रूप में कहा जा चुका है। अहम यह है कि भारत में अल कायदा के पास ख़ुद ऑपरेशन लायक क्षमता नहीं है।

हालांकि इंडियन मुजाहिदीन समेत भारत में काम कर रहे कई पाकिस्तानी संगठन उसका वैचारिक नेतृत्व कुबूल करते हैं। ये स्थिति कई साल से है और इसका भारत में इस्लामी चरमपंथ की चाल पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।

यह समझना उपयोगी है कि भारत ने पाकिस्तान, उसकी सेना और खुफ़िया संगठनों की तरफ़ से पिछले 25 साल से प्रायोजित इस्लामी चरमपंथ का मुकाबला किया है और उसे सीमित रखा है। अल कायदा की तरफ़ से कोई भी खतरा उतना बड़ा नहीं हो सकता जितना पाकिस्तान की इन सामूहिक कोशिशों की वजह से है।

अल कायदा के निगाह में इस्लामाबाद भी

plan of al qaida for india.

एक और चीज़ जिसे बहुत से आलोचक भूल जाते हैं वह है ज़वाहिरी के बयान में इस्लामाबाद का नाम जिनसे उन्होंने वादा किया - "बर्मा, कश्मीर, इस्लामाबाद और बांग्लादेश के हमारे भाइयों हम तुम्हें भूले नहीं हैं और हम तुम्हें नाइंसाफ़ी और ज़ुल्म से मुक्त कराएंगे।"


कम से कम 2008 से अल क़ायदा पाकिस्तान सेना और राज्य को विश्वासघाती मानता है और उन्हें जिहाद का जायज़ निशाना मानता है। ऐसे में दक्षिण एशिया में जिहादी ताक़तों के मज़बूत होने से दूसरे इलाक़ों से पहले पाकिस्तान को काफ़ी गंभीर और तत्काल ख़तरा पैदा हो जाएगा।

भारत में चरमपंथी हमले का ख़तरा बड़ा है, और शायद 2008 के मुंबई हमलों से कम नहीं है। ख़ुफ़िया और सुरक्षा एजेंसियों में असंगठित और अनियमित सुधार ही देखने को मिला है और देश की सुरक्षा में उनकी कुल क्षमताओं का योगदान मामूली ही रहेगा। हालांकि कमजोर ठिकानों पर चरमपंथी हमले का ख़तरा है पर चरमपंथ भारत के अस्तित्व या उसके ढांचे के लिए कोई बड़ा ख़तरा नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed