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गिलगित-बाल्टिस्तान को 5वां प्रांत बनाएगा पाक, भारत के लिए हो सकती है मुश्किल

Wed, 15 Mar 2017 08:48 PM IST
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम Updated Wed, 15 Mar 2017 08:48 PM IST
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pakistan will be declare Gilgit-Baltistan as fifth province
nawaz sharif

रणनीतिक रूप से अहम माने जाने वाले विवादित गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को पाकिस्तान अपना पांचवां प्रांत घोषित करने की तैयारी कर रहा है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से सटे होने के कारण भारत के लिए पाकिस्तान का यह कदम चिंता का सबब बन सकता है।

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पाकिस्तान के अंतर-प्रांतीय समंवय मंत्री रियाज हुसैन पीरजादा ने कहा कि विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के नेतृत्व वाली एक समिति ने गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है। पीरजादा ने बताया कि समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का एक प्रांत बनाया जाना चाहिए।
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उन्होंने यह भी कहा कि उस क्षेत्र का दर्जा बदलने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा। गौरतलब है कि 46 अरब डॉलर की लागत से बनने वाला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) इसी इलाके से होकर गुजरेगा। वहीं, चीन की इस योजना पर भारत कई बार आपत्ति जता चुका है। भारत का मानना है कि पाक अधिकृत कश्मीर से गुजरने के चलते यह योजना भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है।

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सीपीईसी को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए पाक ने उठाया यह कदम

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पाकिस्तान - फोटो : social media

वर्तमान में पाकिस्तान में बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध चार प्रांत हैं। पाकिस्तान में गिलगित-बाल्टिस्तान को एक अलग भौगोलिक क्षेत्र माना जाता है। वहां एक प्रादेशिक विधानसभा है और एक चुना हुआ मुख्यमंत्री है।

ऐसा माना जा रहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के अनिश्चित दर्जे को लेकर चीन की चिंता को देखते हुए ही पाकिस्तान ने उसका दर्जा बदलने का फैसला किया है। ऐसे में पाकिस्तान का यह कदम भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि यह इलाका पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से लगा हुआ है।

सीपीईसी को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए पाक ने उठाया यह कदम
बहुत पहले आई डॉन अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 46 अरब डॉलर की लागत से बनने वाली सीपीईसी योजना को कानूनी तौर मान्यता दिलाने के लिए पाकिस्तान इस इलाके के संवैधानिक दर्जे को बढ़ाने पर विचार कर रहा था। उस रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया था कि इस कदम से पूरे कश्मीर क्षेत्र के भविष्य को लेकर पाकिस्तान के रुख में ऐतिहासिक बदलाव का देखने को मिल सकता है।

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