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पाक: 'मैं आत्मघाती हमलावर क्यों बना'
शुमैला जाफरी (बीबीसी उर्दू, टांक)
Updated Wed, 26 Jun 2013 01:28 PM IST
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गहरी भूरी आंखों और मोहक मुस्कान वाले गुल खान अपनी उम्र के किसी भी अन्य लड़के की तरह ही दिखते हैं।
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कोई सोच भी नहीं सकता कि 18 साल का ये लड़का कुछ महीने पहले आत्मघाती जैकेट पहने पकड़ा गया था। गुल को पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में उस समय गिरफ्तार किया गया जब वो कोहट विश्वविद्यालय को बम से उड़ाने की फिराक में थे।
गुल खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के शहर कोहट में एक स्कूल में पढ़ते थे। गर्मियों की छुट्टियों के दौरान वो पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर कबायली इलाके में अपने पैतृक गांव जाते थे।
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इसी अशांत इलाके में उनके एक चचेरे भाई ने चरमपंथियों से उनका संपर्क कराया और गुल को प्रशिक्षण के लिए भर्ती करा लिया गया।
गुल ने कहा, 'वे हमें शरिया की शिक्षा देते थे और कहते थे कि सरकार के खिलाफ जेहाद जरूरी है। मैं उनकी बातों में आ गया था। उन्होंने तीन महीने तक मुझे तालीम दी।'
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गुल ने बताया कि उन्हें 12 अन्य लोगों के साथ ओरकजई कबायली क्षेत्र में एक शिविर में हथियारों का प्रशिक्षण दिया गया। उनके माता-पिता इस बात से पूरी तरह अनजान थे कि उनका झुकाव चरमपंथ की तरफ बढ़ रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों ने गुल के घर पर छापा मारकर उन्हें आत्मघाती जैकेट के साथ गिरफ्तार किया।
जन्नत
गुल ने बताया, 'उन्होंने कहा कि लड़कियों को विश्वविद्यालय में पढ़ाया जा रहा है जो इस्लाम की भावना के खिलाफ है। अगर लड़कियां पढ़ेंगी तो उनका सशक्तिरण होगा और इससे हमारे धार्मिक केंद्र बर्बाद हो जाएंगे। इसलिए मैंने सोचा कि अगर मैं विश्वविद्यालय को बम से उड़ा दूं तो मुझे जन्नत नसीब होगी।'
मुबारक अली ने पुलिस की गाड़ी पर हथगोला फेंका था। उन्होंने कहा कि उन्हें एक रहस्यमयी आदमी ने चरमपंथ की ओर धकेला था जो कॉलेज के बाहर मंडराता रहता था।
मुबारक ने कहा, 'उसके लंबे बाल थे और वो अपने मोबाइल पर जोरशोर से धार्मिक गीत बजाया करता था। हर दिन मैं उसे अपने कॉलेज के गेट पर लड़कों से बात करते हुए देखता था। वो उनसे दोस्ती गांठता था। मैं भी उसका दोस्त बन गया।'
उन्होंने कहा, 'क्लास खत्म होने के बाद वो मेरे साथ आ जाता था। हम इस्लाम तथा अफगानिस्तान और इराक में अमेरिकी हस्तक्षेप के बारे में लंबी चर्चाएं करते थे। उसने मेरा मन बदल कर रख दिया था।'
मुबारक ने कहा, 'वो जानता था कि दूसरों को कैसे मनाना है, कैसे उनका दिमाग बदलना है। मैं उसकी बातों पर विश्वास करने लगा था। वो कहता था कि अगर मैंने जिहाद में हिस्सा लिया तो मुझे जन्नत नसीब होगी।'
चरमपंथियों के सर्मथक युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान सीमा के करीब स्थित शहर टांक में एक केंद्र बना रखा है, जहां गुल ने मुझे अपनी कहानी बताई।
पुनर्वास
सेना ने पाकिस्तान में ऐसी तीन इकाइयां खोल रखी हैं। इस केंद्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। अंदर व्यावसायिक प्रशिक्षण की कक्षाएं चलती हैं, बास्केटबॉल का एक कोर्ट है, एक टीवी रूम है और एक मस्जिद है।
आत्मघाती हमलावर देश के आम नागरिकों और सुरक्षा बलों के खिलाफ पाकिस्तानी तालिबान का सबसे घातक हथियार साबित हुआ है। साल 2002 के बाद से देश में 350 आत्मघाती हमले हो चुके हैं।
सेना द्वारा संचालित इस प्रोग्राम में गुल सहित कुल 31 युवा शामिल हैं। तालिबान ने इन युवाओं को अफगानिस्तान और इराक में अमेरिकी हस्तक्षेप तथा पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन हमले का हवाला देकर जिहाद के लिए उकसाया था।
बाद में इन युवाओं को पश्चिमोत्तर पाकिस्तान के विभिन्न इलाक़ों से गिरफ्तार किया गया था।
पाकिस्तानी सेना के केंद्र में मुबारक अली और दूसरों को मनोचिकित्सक की सेवाएं भी दी जा रही हैं। उनके दिमाग से चरमपंथी विचारों को निकालने के लिए उदारवादी मौलवियों की भी मदद ली जा रही है।
मौलवी
मौलवी हर दिन छात्रों की क्लास लेते हैं और उन्हें बताते हैं कि इस्लाम में बेगुनाहों की हत्या और आत्महत्या दोनों पर सख्त मनाही है। साथ ही वो हर युवा से अलग-अलग भी बात करते है।
गुल खान कहते हैं, 'अब मैं अल्लाह का शुक्रगुजार हूं कि उसने मुझे जैकेट को उड़ाने से बचा लिया। मुझे बताया गया है कि इस्लाम आत्यहत्या की इज़ाजत नहीं देता है।'
सेना के कमांडर ब्रिगेडियर वारिच इस केंद्र के प्रमुख हैं। उन्होंने कहा, 'सुरक्षा एजेंसियां नियमित रूप से चरमपंथियों की साजिशों का पर्दाफाश करती हैं और हम कई लोगों को गिरफ्तार करते हैं। लेकिन सबको यहां नहीं लाया जाता है। लोगों की मनोस्थिति का आकलन करने के बाद ही उन्हें यहां लाया जाता है। वे लोग यहां लाए जाते हैं जिन्हें अपने किए पर पछतावा होता है और जिनकी सुधरने की नीयत होती है।'
अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान ये स्पष्ट हो जाता है कि कुछ युवा चरमपंथियों की बातों में आकर गलत रास्ते पर चले जाते हैं और वे बदलना चाहते हैं।
इसमें महिलाओं के प्रति व्यवहार भी शामिल है। मैंने गुल खान से उसकी बहन के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि वो पढ़ी लिखी हैं और यहां तक कि उसका दाखिला एक कॉलेज में किया गया है। जब उससे पूछा गया कि वो क्यों लड़कियों को पढ़ाने वाले कॉलेज को बम से उड़ाने जा कहा था तो उन्होंने कहा कि वो पूरी तरह से चरमपंथियों की बातों में आ गए थे और अब उन्हें समझ में आ गया वो गलत थे।
बदलाव
रहीमुल्ला सेना के केंद्र में आने वाले पहले बैच में थे। अब वो टांक में एक सफल बिजनेस चला रहे हैं।
रहीमुल्ला ने कहा, 'मैंने केंद्र में सिलाई सीखी और उसके बाद एक दुकान खोल ली। अब मैंने अपना बिजनेस फैला दिया है। मैंने एक सहायक भी रख लिया है और साथ ही में प्रॉपर्टी का बिजनेस भी कर रहा हूं। इससे मुझे हर महीने अच्छी कमाई हो जाती है।'
वो इस बात को लेकर बेहद संजीदा हैं कि उनके बच्चे उस राह पर न चलें जिस राह पर वो चले थे।
अब तक दो बैचों में 71 युवाओं इस केंद्र में प्रशिक्षण दिया जा चुका है और वे अपने घरों को लौट चुके हैं। हालांकि अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि ये पहल सफल है या नहीं लेकिन सेना का कहना है कि वो इन युवाओं पर बराबर नजर रखती है।
केंद्र में युवाओं को इलेक्ट्रीशियन, मिस्त्री और प्लम्बर बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है और साथ ही उन्हें टूल किट और कुछ आर्थिक मदद भी दी जाती है।
गुल खान ने अपनी नई जिंदगी के लिए कुछ सपने देखे हैं। उन्होंने कहा, 'मेरे गांव में कोई स्कूल नहीं है। साथ ही वहां अस्पताल और बिजली भी नहीं है। लोग अपना संयम खो चुके हैं। उनका कहना है कि सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया। यही वजह है कि वे आसानी से चरमपंथियों की बातों में आ जाते हैं।'
उन्होंने कहा, 'मैं अपने गांव के युवाओं से बात करने की कोशिश करूंगा। उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर अपने परिवार और अपनी चिंता करनी चाहिए।'
(पहचान छिपाने के लिए नाम बदल दिए गए हैं।)