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'मर्ज सऊदी अरब का दर्द पाकिस्तान का'
अशोक कुमार/बीबीसी संवाददाता
Updated Sun, 05 Apr 2015 09:15 AM IST
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यमन में गहराते संकट और वहां सऊदी अरब के हस्तक्षेप को लेकर पाकिस्तान की कशमकश पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में छाई है।
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नवाए वक्त लिखता है कि सऊदी अरब ने यमन के हालात से निपटने के लिए बाकयदा पाकिस्तान फौज से मदद मांगी है, खासकर यमन के शिया हूथी विद्रोहियों के खिलाफ जमीनी कार्रवाई और सऊदी अरब की सीमाओं की सुरक्षा के लिए मदद तलब की गई है।
लेकिन अखबार ने इस मुद्दे पर साफ तस्वीर सामने न रखने के लिए सरकार को खरी खोटी भी सुनाई है।
वो कहता है कि एक तरफ विदेश सचिव ये कह रहे हैं कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद करने का फैसला कर लिया है क्योंकि वहां हमारे सबसे पवित्र स्थल हैं और लाखों पाकिस्तानी भी सऊदी अरब में काम करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता कहती हैं कि पाकिस्तानी सेना की मदद मांगे जाने की बातें अफवाह हैं जिस पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है।
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जंग ने यमन के हालात पर चर्चा के लिए संसद का साझा सत्र बुलाने के पाकिस्तानी सरकार के फैसले को सराहा है। अखबार लिखता है कि पाकिस्तान न सऊदी अरब को छोड़ सकता है और न ही ईरान को नाराज कर सकता है, इसलिए संसद का सत्र बेहद जरूरी है।
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जंग के मुताबिक मामला नाजुक है इसलिए जोश की बजाय होश से काम लिया जाए और उन ग़लतियों से बचा जाए जो अफगान जंग में शामिल होते वक्त हुई थीं और जिनका खमियाजा पाकिस्तान को उठाना पड़ा।