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पाक पंजाब एसेंबली में पहली बार सिख एमएलए
Updated Tue, 04 Jun 2013 08:49 AM IST
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कुछ दिन पहले जब पाकिस्तान की पंजाब एसेंबली के सदस्यों ने शपथ ली तो सफेद कुर्ता-पायजामा और केसरी पगड़ी पहने सरदार रमेश सिंह अरोड़ा अलग ही नज़र आ रहे थे।
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भारत-पाकिस्तान के बँटवारे के बाद पहली बार पाकिस्तान की पंजाब एसेंबली में सिख समुदाय के किसी सदस्य को बैठने का मौका मिला है।
रमेश सिंह अरोड़ा को पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) की ओर से नामांकित किया गया है। ज़ाहिर है उनके घर में जश्न का माहौल है और मिठाइयों का दौर चल रहा है।
वे बताते हैं कि उनका फोन लगातार घनघना रहा है और फेसबुक पर भी बधाइयाँ मिल रही हैं। रमेश सिंह अरोड़ा का परिवार बँटवारे के पहले से ही पाकिस्तान में बसा हुआ था।
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1947 में भारत-पाक विभाजन के बाद उनके दादा ने पाकिस्तान में ही बसे रहने का फैसला किया।
रमेश सिंह का जन्म गुरु नानक की धरती ननकाना साहब में हुआ। बाद में उन्होंने लाहौर से एमबीए (फाइनेंस) किया।
पिछले कई सालों से वो ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काम कर रहे थे। पाकिस्तान में विश्व बैंक के एक प्रोजेक्ट से भी जुड़े रहे हैं।
सचिन के मुरीद
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रमेश सिंह पंजाब एसंबेली के पहले सिख समुदाय चुने जाने पर फख़्र महसूस करते हैं।
वे कहते हैं, "इससे पहले कभी नहीं हुआ कि कोई पगड़ी वाला सिख असेंबली में जाकर बैठा हो। इस कदम से पाकिस्तान में धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा मिलेगा।"
भारत के साथ वे बेहतर रिश्तों के हिमायती हैं और कई बार भारत आ चुके हैं।
आखिरी बार वे 2010 में भारत आए थे। करोड़ों भारतीयों और पाकिस्तानियों की तरह वे भी क्रिकेट के फैन हैं।
जब उनके पसंदीदा क्रिकेटर के बारे में पूछा तो उन्होंने हँसते हुए कहा, "ईमानदारी से कहूँ तो दोनों मुल्कों के खिलाड़ियों में से सचिन मेरे पसंदीदा है। मैं पाकिस्तानी होते हुए इसमें पक्षपात नहीं करूँगा।"
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की हालत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है- चाहे वो हिंदू हों या ईसाई समुदाय हो।
अल्पसंख्यकों के लिए क्या करेंगे?
अल्पसंख्यकों के बारे में सवाल पूछे जाने पर रमेश सिंह अरोड़ा कहते हैं, "हमारी सरकार ने फैसला किया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक शब्द इस्तेमाल नहीं करेंगे। हम मुस्लिम या ग़ैर मुस्लिम लोग कहेंगे। मैं ये बिल्कुल नहीं कहूँगा कि पाकिस्तान में ग़ैर मुसलमानों को लेकर कोई समस्या नहीं है और स्थिति एकदम परफेक्ट है। बड़ी बात ये है कि इन मुद्दों को सुलझाया कैसे जाता है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के सामने चुनौती यही होगी कि हम धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दे, अलग-अलग धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाएँ।"
बीबीसी से बातचीत में उनका कहना था, "हम कोशिश करेंगे कि जो भी मतभेद हैं उन्हें आमने सामने बैठकर सुलझाएँ बजाए इसके कि आपस में लड़ाई शुरु हो जाए। हम इस बात को समझते हैं कि अगर इस ओर कदम नहीं उठाए गए तो ये पाकिस्तान के लिए बड़ी समस्या बन सकती है।"
पाकिस्तान में 150 से ज़्यादा गुरुद्वारे हैं और भारत से बड़ी संख्या में लोग हर साल इन गुरुद्वारों के दर्शन के लिए वीज़ा अर्ज़ी देते हैं।
लेकिन सिख समुदाय के बहुत से लोगों की शिकायत रहती है कि उन्हें सभी गुरुद्वारों के दर्शन करने नहीं दिए जाते।
इसके लिए रमेश सिंह अरोड़ा का सुझाव है कि कुछ ऐसा वीज़ा सिस्टम होना चाहिए कि श्रद्धालु सब जगह आ जा सकें।
रमेश सिंह अरोड़ा ये बात स्वीकार करते हैं कि आज भी पाकिस्तान में कई गुरुद्वारे ऐसे हैं जहाँ संगत नहीं है और पाठ नहीं होता।
वो भरोसा दिलाते हैं कि उनकी पार्टी की सरकार इन्हें चालू करने की पूरी कोशिश करेगी।
ये भी आश्वासन देते हैं कि पंजाब एसेंबली में अल्पसंख्यक समुदाय के सभी सदस्य मिलकर कोशिश करेंगे कि ग़ैर मुस्लिम समुदाय की समस्याएँ सुलझाई जाएँ।
वंदना/बीबीसी संवाददाता